बसंत पंचमी 2021: जानें कब है बसंत पंचमी, इस दिन किन बातों का रखना चाहिए ख्याल

इस साल बसंत पंचमी 16 फरवरी को है. सुबह 03 बजकर 36 मिनट पर पंचमी तिथि लगेगी और अगले दिन यानी 17 फरवरी को सुबह 5 बजकर 46 मिनट पर खत्म होगी.

बसंत पंचमी 2021: जानें कब है बसंत पंचमी, इस दिन किन बातों का रखना चाहिए ख्याल
मां सरस्वती

नई दिल्ली: नया साल शुरू होने के साथ ही त्योहारों का सिलसिला भी शुरू हो गया है. मकर संक्राति के बाद अब बसंत पंचमी का त्योहार आने वाला है. इस साल बसंत पंचमी 16 फरवरी को है. सुबह 03 बजकर 36 मिनट पर पंचमी तिथि लगेगी और अगले दिन यानी 17 फरवरी को सुबह 5 बजकर 46 मिनट पर खत्म होगी.

ये त्योहार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है. बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन हिन्दू धर्म के लोग मां सरस्वती को पूजते हैं और विद्या और बुद्धि के लिए प्राथना करते हैं. सभी लोग इस दिन पीले कपड़े पहनते है, पीला भोजन या मिठाई खाते हैं. पर क्या सबको ये पता है कि ऐसा क्यों किया जाता है. आज हम आपको बसंत पंचमी से जुड़ी कुछ खास बातें और पूजा के नियम के बारे में बताएंगे.

ये भी पढ़ेंं-राशिफल 22 जनवरी 2021: मकर राशि वाले आज रहें थोड़ा सतर्क, आप भी जानें आपका राशिफल

क्यों पहनते हैं पीला रंग
बसंत पंचमी के दिन पीला रंग शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि इस मौसम में सरसों की फसल की वजह से चारों तरफ पीला रंग नजर आता है, हमारी धरती पीली नजर आती है. इसी को ध्यान में रखते हुए लोग बसंत पंचमी के दिन पीले कपड़े पहते हैं. जबकि दूसरी मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी के दिन सूर्य उत्तरायण होता है. जिसकी पीली किरणें लोगों को सूर्य की तरह गंभीर और प्रखर बनने के लिए प्रेरित करती हैं. इसलिए लोग पीले कपड़े पहनते हैं और पीला खाना खाते हैं.

बसंत पंचमी पर मां सरस्वती के आशीर्वाद के लिए क्या करें और किन बातों का रखें ख्याल 

1. इस दिन झगड़े से बचना चाहिएब
2.शाकाहारी भोजन का ही सेवन करना चाहिए
3. बसंत पंचमी पर पितृ तर्पण करना चाहिए
4. इस दिन मन में बुरे विचारों को नहीं आने देना चाहिए
5. स्नान करना जरूरी है, बिना स्नान किए भोजन नहीं खाना चाहिए
6. इस दिन काले या नीले कपड़े नहीं पहनने चाहिए, कोशिश करें की पीले कपड़े ही पहनें.
7. बसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे काटने की भूल नहीं करनी चाहिए.

कैसे हुआ था मां सरस्वती का जन्म
कथाओं में बताया गया है कि सृष्टि को बनाने वाले भगवान ब्रह्मा ने जब संसार की रचना की थी, तो उन्हें पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी. इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं. उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी. तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था. जब उन्होंने वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया. इसी से उनका नाम देवी सरस्वती पड़ा. उस दिन बसंत पंचमी थी. तब से इस दिन देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी.

Watch LIVE TV-