Heroes of Gabba: अगर मोटिवेशन चाहिए तो इनकी कहानी पढ़िए, जीवन संघर्ष सीख जाएंगे

टीम इंडिया के खिलाड़ी  ऋषभ पंत, वाशिंगटन सुंदर, मोहम्मद सिराज, शार्दूल ठाकुर, शुभमन गिल और नवदीप सैनी जैसे कुछ ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनकी रियल लाइफ स्टोरी भी चुनौतियों से भरी रही. पढ़िए पूरी खबर....

Heroes of Gabba: अगर मोटिवेशन चाहिए तो इनकी कहानी पढ़िए, जीवन संघर्ष सीख जाएंगे
जीत के बाद की तस्वीर..

भोपाल: टीम इंडिया ने ब्रिस्बेन टेस्ट जीतकर ऑस्ट्रेलिया को 4 टेस्ट की सीरीज में 2-1 से हरा दिया. चोट से जूझ रही टीम इंडिया ने इसी के साथ इतिहास भी रच दिया. गाबा में भारत का ये कारनामा महज ऐतिहासिक जीत नहीं हैं, बल्कि उन किरदारों के हौसलों की कहानी भी है, जिन्होंने मुफलिसी में भी हौसला कायम रखा और चुनौतियों का सामना डटकर सामना किया. मैदान के भीतर ही नहीं, बाहर भी चुनौतियों का सामना करके यहां तक आए इन युवाओं को हार नहीं मानने का जज्बा मानों विरासत में मिला है. 

इस भारतीय टीम में कोई खिलाड़ी बडे़ शहर का था तो किसी ने छोटे शहर से अपनी सफलता की कहानी लिखनी शुरू कर दी थी. ऐसे ही कुछ खिलाड़ियों के संघर्ष की कहानी को जानते हैं. इन खिलाड़ियों में भारतीय टीम के नए सितारे टी नटराजन, रिषभ पंत, मोहम्मद सिराज, वॉशिंगटन सुंदर, शुभमन गिल, नवदीप सैनी और शार्दूल ठाकुर शामिल हैं, जो गाबा की जीत के हीरो भी हैं. इन हीरोज ने मैदान ही नहीं, असल जिंदगी में अपनी काबिलियत से चुनौतियों को मात दी है. 

1. ऋषभ पंत

उत्तराखंड के रुड़की को हमेशा से बेहतरीन आईआईटी सहित कुछ बेहतरीन इंजीनियरिंग कॉलेज के तौर पर जाना जाता है, लेकिन यह ऋषभ पंत का घरेलू शहर है. पंत बचपन के दिनों में अपनी मां के साथ दिल्ली के सोन्नेट क्लब में अभ्यास करने के बाद कई बार गुरूद्वारा में आराम करते थे. उन्होंने पिता राजेन्द्र के निधन के बाद भी आईपीएल में मैच खेलना जारी रखा था. ऋषभ ने सिर्फ अपने कैरियर की खातिर अपने परिवार को दिल्ली स्थानांतरित करने के लिए आश्वस्त किया था.

2. नवदीप सैनी

नवदीप सैनी गरीब परिवार से हैं. उनके पिता सरकारी ड्राइवर थे. नवदीप के पास स्पोर्ट्स शूज तक नहीं थे. पैसों के लिए उन्होंने छोटे-छोटे टूर्नामेंट में खेलना शुरू किया. एक्जिबिशन मैच से नवदीप को 300 रुपए की कमाई हो जाती थी. एक बार वह दिल्ली टीम की प्रैक्टिस देखने के लिए पहुंचे थे. यहीं से उनकी किस्मत पलट गई. दिल्ली के प्रथम श्रेणी खिलाड़ी सुमित नरवाल उन्हें रणजी ट्रॉफी के नेट अभ्यास के लिए ले आए, जहां तत्कालीन कप्तान गौतम गंभीर ने उन्हें टूर्नमेंट के लिए चुना. इसके बाद नवदीप ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. 

3. शुभमन गिल

भारतीय टीम के मौजूदा कप्तान विराट कोहली के उत्तराधिकारी के तौर पर देखे जा रहे इस खिलाड़ी का जन्म पंजाब के फाजिल्का के एक गांव में किसान परिवार में हुआ था. गिल के दादा ने अपने सबसे प्यारे पोते के लिए खेत में ही पिच तैयार करवा दी थी, उनके पिता ने बेटे की क्रिकेट की महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए चंडीगढ़ में रहने का फैसला किया. वह भारत अंडर -19 विश्व कप टीम के सदस्य थे. एक इंटरव्यू में गिल ने कहा था कि 'मेरे माता-पिता ने कभी पढ़ाई को लेकर मुझ पर दबाव नहीं बनाया, जब मैं सात साल का था तो मेरे पिता ने मेरी प्रतिभा को पहचाना और तभी उन्होंने चंडीगढ़ शिफ्ट होने का फैसला किया. उन्होंने काफी त्याग किए. 

4. शार्दुल ठाकुर

महाराष्ट्र के पालघर के इस खिलाड़ी ने 13 साल की उम्र में स्कूल क्रिकेट (हैरिश शिल्ड) में एक ओवर में छह छक्के लगाए थे. वह विवेकानंद इंटरनेशनल स्कूल के छात्र रहे हैं, जहां भारतीय उपकप्तान रोहित शर्मा भी पढ़ते थे. इन दोनों खिलाड़ियों को दिनेश लाड ने कोचिंग दी है. मुंबई की सीनियर टीम में चुने जाने से पहले शार्दूल ठाकुर मोटापे से जूझ रहे थे. मुंबई की सीनियर टीम में चुने जाने से पहले सचिन तेंदुलकर ने उन्हें वजन कम करने की सलाह दी थी. सचिन ने शार्दूल से यह भी कहा था कि 'उनका भविष्य उज्ज्वल है. मोटापे की समस्या से जीतने के बाद शार्दूल IPL टीम में चुने गए थे. शार्दूल भारत की वनडे और टी-20 टीम का भी हिस्सा बन चुके हैं. ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले उन्होंने केवल एक टेस्ट मैच खेला था. ब्रिस्बेन टेस्ट की पहली पारी में उन्होंने फिफ्टी लगाई और बेहद जरूरी 67 रन बनाए. इस टेस्ट में उन्होंने 7 विकेट भी लिए. 

5. टी नटराजन

तमिलनाडु के सुदूर गांव छिन्नप्पमपट्टी में जन्मा ये खिलाड़ी दिहाड़ी मजदूर का बेटा है, जिसके पास गेंदबाजों के लिए जरूरी स्पाइक्स वाले जूते खरीदने के भी पैसे नहीं थे. कई सालों तक नटराजन नए जूते खरीदने से पहले सौ बार सोचते थे. IPL के दौरान नटराजन एक बेटी के पिता बने, पर उसे देखने नहीं जा सके. उस वक्त वो UAE में आईपीएल खेल रहे थे. उसके बाद वो सीधे ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना हो गए. अभी तक वो अपनी बेटी से नहीं मिल पाए हैं. खास बात ये है कि वह अपनी जड़ों को नहीं भूले और उन्होंने अपनी गांव में क्रिकेट अकादमी शुरू की है. 

6. मोहम्मद सिराज

सिराज के पिता रिक्शा चालक थे. मोहम्मद सिराज ने ऑस्ट्रेलिया दौरा शुरू होने से पहले ही अपने पिता को खो दिया था, पर पिता का ही सपना था कि बेटा देश के लिए खेले. BCCI ने सिराज को वापस जाने की मंजूरी दे दी थी, लेकिन पिता का सपना पूरा करने के लिए वो भारत नहीं लौटे. ब्रिस्बेन टेस्ट (गाबा) में वो लीडिंग बॉलर थे. सिराज ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था, 'पिताजी मुझे 70 रुपए पॉकेट मनी देते थे. इसमें से 60 रुपए पेट्रोल में जाते थे. इसके बाद उन्होंने मेरी पॉकेट मनी 10 रुपए बढ़ा दी. मैं 2017 में रणजी ट्रॉफी में तीसरा सबसे ज्यादा विकेट लेने वाला गेंदबाज था. उसके बाद भरत अरुण सर मेरे जीवन में आए. इससे मेरी जिंदगी बदल गई. मैं सनराइजर्स हैदराबाद की टीम में चुना गया और मेरा इंटरनेशनल लीग में खेलने का सपना सच हो गया. आईपीएल में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद सिराज अपने खेल को और मजबूत करते गए.

7. वॉशिंगटन सुंदर

डेब्यू टेस्ट में 4 विकेट और 84 रन बनाने वाले वॉशिंगटन सुंदर की इस कामयाबी का सफर आसान नहीं रहा. 4 साल की उम्र में सुंदर के पिता को पता चला कि बेटा सिर्फ एक कान से सुन सकता है. कई अस्पतालों में भटकने के बाद पता चला कि ये खामी दूर नहीं हो सकती. पर, खामी कभी भी आड़े नहीं आई. क्रिकेट जैसे खेल में परेशानी का सामना करना पड़ता था, लेकिन आखिरकार वो एक कामयाब क्रिकेटर बने. भारत की टी-20, वनडे के बाद उन्होंने टेस्ट टीम में भी अपनी जगह बना ली है. वॉशिंगटन सुंदर के पिता ने अपने मेंटॉर पीडी वॉशिंगटन को श्रद्धांजलि देने के लिए सुंदर के नाम के साथ वॉशिंगटन जोड़ा है. सुंदर 2016 में अंडर-19 टीम में सलामी बल्लेबाज थे. उनकी ऑफ स्पिन गेंदबाजी देखकर राहुल द्रविड़ और पारस महाम्ब्रे ने उन्हें गेंदबाजी पर ध्यान देने की सलाह दी थी और इसके बाद उन्होंने मुड़कर पीछे नहीं देखा.

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