63 लाख वोटर्स के हाथ में सत्ता की चाभी, 3 को करेंगे मतदान और 10 को चुनी जाएगी सरकार

28 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए 9361 पोलिंग बूथ, जबकि 1441 सहायक मतदान केंद्र बनाए गए हैं. जानकारी के मुताबिक 2018 में हुए विधानसभा चुनाव की तुलना में  उपचुनाव में 18 प्रतिशत अधिक पोलिंग बूथ बनाए गए हैं. वोटिंग शांतिपूर्ण तरीके से हो सके, इसके लिए 56 हजार मतदान कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है. 

63 लाख वोटर्स के हाथ में सत्ता की चाभी, 3 को करेंगे मतदान और 10 को चुनी जाएगी सरकार
सांकेतिक तस्वीर.
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भोपाल: मध्य प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए वोट 3 नवंबर को डाले जाएंगे. जिसके लिए कुल 63.68 लाख वोटर्स मतदान करेंगे. इनमें 33.72 लाख पुरुष, 29.77 लाख महिला, 198 थर्ड जेंडर, 18737 सर्विस वोटर्स और 80 साल से अधिक उम्र के 71627, जबकि 55329 दिव्यांग वोटर्स हैं. 

28 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए 9361 पोलिंग बूथ, जबकि 1441 सहायक मतदान केंद्र बनाए गए हैं. जानकारी के मुताबिक 2018 में हुए विधानसभा चुनाव की तुलना में  उपचुनाव में 18 प्रतिशत अधिक पोलिंग बूथ बनाए गए हैं. वोटिंग शांतिपूर्ण तरीके से हो सके, इसके लिए 56 हजार मतदान कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है. जबकि विभिन्न जिलों में 24003 बैलेट यूनिट, 23558 कंट्रोल यूनिट और 23053 वीवीपैट उपलब्ध कराए गए हैं. 

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वोटर आईडी नहीं होने पर इन डॉक्यूमेंट्स के साथ डाल सकेंगे वोट
जिन मतदाताओं के पास वोटर आईडी नहीं है, वे मतदान पर्ची के साथ 13 प्रकार के दस्तावेजों- आधार कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, पैन कार्ड, बैंक  डाकघर द्वारा जारी फोटोयुक्त पासबुक, श्रम योजना स्वास्थ्य बीमा योजना के स्मार्ट कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, कर्मचारियों को जारी की गई फोटो पहचान पत्र, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के स्मार्ट कार्ड, फोटो युक्त पेंशन दस्तावेज, सांसद विधायक विधान परिषद के सदस्य द्वारा जारी पहचान पत्र में से कोई एक आईडी लेकर जाकर वोट डाल सकेंगे.

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आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में 2018 में विधानसभा चुनाव हुए थे. इस चुनाव में कांग्रेस ने बहुमत के साथ जीत दर्ज किया था और कमलनाथ के नेतृत्व में सरकार बनाई थी. लेकिन मार्च में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ ही 22 समर्थक विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थें. जिसकी वजह से कमलनाथ की सरकार गिर गई थी. वहीं, 3 विधायकों की मौत हो गई थी, जबकि 2 कांग्रेसी बिधायक बाद में बीजेपी में शामिल हो गए थें. 

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