जीवनभर किया शिक्षा का दानः बुढ़ापे में नहीं कोई सहारा, सिस्टम की बदहाली का खामियाजा उठा रहा यह शिक्षक

शिक्षक नारायण को इस बुढ़ापे में शासन का सहारा तो नहीं मिल रहा बल्कि दो वक्त की रोटी कमाने के लिए दूसरों के घर मजदूरी करना पड़ रही है.

जीवनभर किया शिक्षा का दानः बुढ़ापे में नहीं कोई सहारा, सिस्टम की बदहाली का खामियाजा उठा रहा यह शिक्षक

आगर: एक शिक्षक जीवन भर बच्चों को पढ़ाता है, भविष्य के लिए देश की नींव को मजबूत करता है. मगर उसे क्या मालूम कि देश की आने वाली पीढ़ी के भविष्य को बनाते-बनाते खुद का बुढ़ापा अंधकार में जाने वाला है. इसके पीछे बड़ी वजह शासन की वह व्यवस्था है, जिसमें प्रदेश के कई शिक्षकों के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है. 

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दरअसल आगर मालवा जिले के गांव लिंगोड़ा मे रहने वाले रिटायर्ड शिक्षक नारायण मालवीय, जिन्होंने अपनी वर्षों तक सेवा शिक्षा विभाग को दी, बच्चो को जीवन भर पढ़ाया लिखाया मगर अब उन्हें खाने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है. घर में किरान के पैसे नहीं है, पत्नी के हाथों में इंफेक्शन हो गया है, इलाज के लिए पैसे उधार मांगना पड़ता है. हालात यह है कि दो वक्त की रोटी की व्यवस्था जुटाने में भी असमर्थ पति-पत्नी सहकारी सिस्टम के चलते खून के आंसू रोने को मजबूर है.

दूसरोंं के घर की मजदूरी करना पड़ रही
शिक्षक नारायण को इस बुढ़ापे में शासन का सहारा तो नहीं मिल रहा बल्कि दो वक्त की रोटी कमाने के लिए दूसरों के घर मजदूरी करना पड़ रही है. दूसरों के घर पशुओं के गोबर को साफ करना, चारा ओर गंदगी साफ करना आज इस बुजुर्ग रिटायर्ड अध्यापक की मजबूरी हो गई है. शिक्षा विभाग से रिटायर्ड होने के बाद नारायण को एक सर्टिफिकेट तो मिला मगर पेंशन के नाम पर आज उन्हें सिर्फ 1137 रुपये मिलते है. ऐसे में आज की महंगाई के दौर में हजार रुपये में घर चलाना ही सबसे मुश्किल बात है.

केन्द्र-राज्य की नीति का मामला
इस पूरे मामले में जब जिला शिक्षा अधिकारी के के अग्रवाल से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा ये पेंशन पॉलिसी केन्द्र और राज्य शिक्षा विभाग का मामला है, इसें जिला शिक्षा अधिकारी क्या कर सकता है. उन्होंने सरकारी योजना का हवाला देते हुए असमर्थता व्यक्त कर दी.

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इतनी कम पेंशन क्यों मिल रही है आईये जानते है
दरअसल डैनी सूर्यवंशी जिला अध्यक्ष पुरानी पेंशन बहाल संघ ने बताया कि  NPS यानि नेशनल पेंशन स्कीम के अंतर्गत नारायण जी आते है. मध्यप्रदेश में 2004 के बाद जिनकी भी नौकरी लगी, उन पर यह नियम लागू हुआ है. प्रतिवर्ष मध्यप्रदेश में ही सैकड़ों कर्मचारी अलग-अलग विभाग से रिटायर्ड होते है. जब रिटायरमेंट होता तब जितनी राशि कुल जमा होती है. उसका 60% दे दिया जाता है बाकि 40% राशि का बैंक ब्याज ही आपकी पेंशन होती है. उदाहरण के तौर पर में यदि रिटायरमेंट के समय 8 लाख जमा है, तो ऐसे में उसके 40% राशि यानि 3 लाख 20 हजार का ब्याज पेंशन के रूप में मिलेगा.

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