OTT Platforms Digital Media Guidelines: इन पॉइंट्स में समझे पूरी खबर, जानिए आप पर क्या पड़ेगा असर?

OTT प्लेटफॉर्म पर 18 साल से ज्यादा उम्र के लोग ही एडल्ट कैटेगरी का कंटेंट देख सकेंगे. 

OTT Platforms Digital Media Guidelines: इन पॉइंट्स में समझे पूरी खबर, जानिए आप पर क्या पड़ेगा असर?

नई दिल्लीः केन्द्र सरकार ने डिजिटल मीडिया और ओवर द टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म्स के लिए गाइडलाइंस जारी कर दी हैं. इन गाइडलाइंस को इंटरमीडिएरी इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code)रूल्स 2021 नाम दिया गया है और इसे जल्द ही लागू कर दिया जाएगा. केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और प्रकाश जावड़ेकर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन गाइडलाइंस की जानकारी दी. इन गाइडलाइंस के दायरे में सोशल मीडिया, डिजिटल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म आएगा. यहां पॉइंट में जानिए क्या हैं सरकार की गाइडलाइंस और आम जनता पर इनका क्या असर पड़ेगा-

OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए गाइडलाइंस

  • ओटीटी प्लेटफॉर्म पर 18 साल से ज्यादा उम्र के लोग ही एडल्ट कैटेगरी का कंटेंट देख सकेंगे. 
  • कंटेंट को 6 कैटेगरी में बांट दिया गया है. जिसमें U (यूनिवर्सल), U/A, U/A 7+, U/A 13+, U/A 16+ और ए कैटेगरी होगी. 
  • U कैटेगरी के कंटेंट को सभी लोग देख सकेंगे. वहीं U/A कैटेगरी उस कंटेंट को दी जाएगी, जिसके कुछ सीन्स बच्चों के लिए सही नहीं होंगे.
  • बच्चों के लिए U/A7+ और U/A13+ कैटेगरी तय की गई हैं. 7+ कैटेगरी में हिंसा के सीन सिर्फ फैंटेसी या कॉमेडी के रूप में ही दिखाए जा सकते हैं. साथ ही इस कैटेगरी के कंटेंट में किसी तरह की नग्नता या शारीरिक शोषण से संबंधित सीन्स नहीं दिखाए जाएंगे. 
  • 13+ कैटेगरी में हिंसा को ज्यादा रियलस्टिक तरीके से दिखाया जा सकता है लेकिन उसे ज्यादा लंबा या वीभत्स तरीके से नहीं दिखा सकते हैं. यहां भी नग्नता और शारीरिक शोषण से संबंधित ग्राफिक्स नहीं दिखाए जा सकते हैं. 
  • 16+ कैटेगरी में हिंसक ग्राफिक्स और शारीरिक शोषण के सीन दिखाए जा सकते हैं लेकिन इन्हें ज्यादा लंबा ना खींचा जाए और वीभत्स तरीके से ना दिखाया जाए. ड्रग के इस्तेमाल को भी दिखा सकते हैं लेकिन उसका महिमामंडन ना किया गया हो.
  • एडल्ट कैटेगरी में सख्त भाषा, नग्नता, हिंसक ग्राफिक्स का इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि इसमें क्रिमिनल लॉ का उल्लंघन नहीं होना चाहिए. 
  • ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया जाए. यह कमेटी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स से संबंधित शिकायतों की सुनवाई करे. 
  • ओटीटी और डिजिटल मीडिया को डिस्कलोजर में इस बात की जानकारी देनी होगी कि वह इंफोर्मेशन उन्हें कहां से मिली है. 

Digital, Social Media के लिए गाइडलाइंस

  • गाइडलाइंस के तहत सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वह आपत्तिजनक कंटेंट को जल्द से जल्द अपने प्लेटफॉर्म से हटाएं. साथ ही सरकारी या कानूनी आदेश के बाद आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने में 36 घंटे से ज्यादा का वक्त नहीं लगना चाहिए. 
  • Social Media कंपनियों को किसी मामले की जांच में 72 घंटे के भीतर जांच एजेंसियों को जानकारी मुहैया करानी होगी. शिकायत मिलने पर सोशल मीडिया कंपनियों को आपत्तिजनक कंटेंट शिकायत मिलने वाली दिन ही हटाना होगा. 
  • सोशल मीडिया कंपनियों को एक मुख्य शिकायत निवारण अधिकारी की तैनाती करनी होगी, जो कानूनी जांच एजेंसियों के साथ कॉर्डिनेट करेगा. साथ ही गाइडलाइंस लागू होने के 3 महीने के भीतर ही कंपनियों को “grievance redressal officer” की नियुक्ति  भी करनी होगी. 
  • गाइडलाइंस के मुताबिक एक कमेटी का गठन किया जाएगा. जिसमें रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और खूफिया विभाग के साथ ही आईटी और महिला एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल होंगे. इस कमेटी के पास शक्ति होगी कि वह नियमों के उल्लंघन पर सोशल मीडिया कंपनियों को चेतावनी दे सके, आपत्तिजनकर कंटेंट को सेंसर करा सके. ये नियम डिजिटल मीडिया पर भी लागू होंगे. 
  • गाइडलाइंस में महिला यूजर्स के गौरव की रक्षा करने के लिए, उनकी मोर्फ्ड इमेज या आपत्तिजनक कंटेंट पोस्ट करता है तो शिकायत मिलने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कंटेंट को तुरंत हटाना होगा. साथ ही आपत्तिजनक कंटेंट पोस्ट करने वाले व्यक्ति की जानकारी भी जांच एजेंसियों को देनी होगी. 
  • गाइडलाइंस में इस बात का भी जिक्र है कि यूजर्स के वेरिफिकेशन के बाद उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स द्वारा वेरिफिकेशन सिंबल दिया जाएगा. इससे यूजर्स को पता चल सकेगा कि कौन वेरिफाइड और कौन अनवेरिफाइड यूजर है. 
  • सोशल मीडिया कंपनियों को हर महीने कम्पलायंस रिपोर्ट जारी करनी होगी. जिसमें बताया जाएगा कि कितनी शिकायतें आईं और उन पर क्या कदम उठाए गए. 

सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे निर्देश
साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को चाइल्ड पोर्नोग्राफी, रेप, गैंगरेप से जुड़े कंटेंट को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से हटाने के लिए गाइडलाइन बनाने के निर्देश दिए थे. इस के बाद सरकार ने इस दिशा में काम शुरू किया.