Earth Day Special: 18 राज्यों में सवा करोड़ पीपल के पेड़ लगा चुका है यह शख्स, अब कोरोना से बचने का दिया ये 'मंत्र'

पीपल बाबा के देशव्यापी हरियाली क्रांति अभियान से 15 हजार से ज्यादा स्वयंसेवक जुड़े हैं. अब तक किए काम से इनकी टीम की पहुंच 18 राज्यों के 202 जिलों तक हो गई है.

Earth Day Special: 18 राज्यों में सवा करोड़ पीपल के पेड़ लगा चुका है यह शख्स, अब कोरोना से बचने का दिया ये 'मंत्र'
पीपल बाबा ने अपनी टीम के साथ अब तक 2 करोड़ 30 लाख पेड़ लगाए हैं

नई दिल्लीः 22 अप्रैल को हर साल दुनियाभर में पृथ्वी दिवस (Earth Day) मनाया जाता है. आज जहां कोरोना के बढ़ते संक्रमण काल में ऑक्सीजन की कमी से कई लोगों की जान जा रही है, ऐसे में धरती को बचाने और प्राकृतिक ऑक्सीजन की जरूरत हर किसी को महसूस होने लगी.

मध्य प्रदेश के रतलाम शहर में आज एक नई पहल शुरू की गई, जहां ऑक्सीजन की सहायता से स्वस्थ होकर घर लौटने वाले मरीजों को प्रशासन द्वारा एक पौधा दिया जा रहा है. मरीजों को शपथ दिलाई जा रही है कि वे इस पौधे को बड़ा करेंगे और धरती से ली गई ऑक्सीजन का कर्ज चुकाएंगे. वहीं देश की राजधानी दिल्ली में एक शख्स ऐसा भी रहता है जो अब तक 2 करोड़ 30 लाख पेड़ लगा चुका है.

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18 राज्यों तक फैली है पहुंच
अब तक लगाए गए 2 करोड़ से ज्यादा पेड़ों में 1 करोड़ 27 लाख पेड़ पीपल के हैं, जिस कारण शख्स का नाम पीपल बाबा पड़ गया. बाबा का मुख्य उद्देश्य पीपल के पेड़ लगाने की ओर ही रहा. उनका मानना है कि किसी अन्य पेड़ के मुकाबले पीपल के पेड़ से सबसे ज्यादा ऑक्सीजन मिलती है. उनकी इस देशव्यापी हरीत क्रांति में 15 हजार से ज्यादा स्वयंसेवक जुड़े हैं. अब तक किए काम से इनकी टीम की पहुंच 18 राज्यों के 202 जिलों तक हो गई.

ऑनलाइन पृथ्वी दिवस पर क्या बोले पीपल बाबा
पीपल बाबा ने जी मीडिया से बात करते हुए बताया कि दो साल पहले तक ऑफलाइन माध्यम और नई-नई थीम के साथ पृथ्वी दिवस के कार्यक्रम होते थे. लेकिन कोरोना महामारी ने इसे भी ऑनलाइन कर दिया, यहां तक इस महामारी ने एक ही महीने के अंदर लोगों को प्राकृतिक हवा का महत्त्व समझा दिया. वे लोग पिछले दो सालों से पृथ्वी के साथ ही जल और पर्यावरण दिवस भी ऑनलाइन ही मना रहे हैं, लेकिन धरती पर होने वाले अत्याचार फिर भी वैसे के वैसे बरकरार हैं.

 

बिना समय गंवाए पेड़ लगाएं
उन्होंने कहा कि अब समय नहीं बचा कि सभी बातचीत करें, आईडिया निकालें, अब सिर्फ एक्शन का समय है. अगर अब भी एक्शन नहीं लिए गए तो जल्द ही पृथ्वी का अंत हो जाएगा, ऐसे में पृथ्वी दिवस मनाने वाला कोई भी नहीं रहेगा. चारों तरफ ऑक्सीजन की कमी है, लोग समाधान पर ध्यान लगाने की बजाय इस ओर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं कि समस्या किस वजह से बढ़ी. देश के हर नागरिक की जिम्मेदारी है पेड़ लगाना और इसी से कोरोना जैसी भयावह महामारी से बचा जा सकेगा.

महामारी बढ़ने के पीछे बताई ये बड़ी वजह
वृक्षों के लगातार कटने और शहरों के विकास से ऑक्सीजन खुद-ब-खुद घट गया. शहरों में ज्यादा लोग बसने लगे, ऑक्सीजन की कमी से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो गई. इसी कारण कोरोना इस वक्त सबसे ज्यादा तबाही उन्हीं क्षेत्रों में मचाए हुए है जहां कम जगह में बहुत ज्यादा लोग रहते हैं और जहां पेड़ों की संख्या भी बेहद कम है.

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दिल्ली के एक वर्ग KM में 11,394 लोग
उन्होंने कहा कि 2011 जनगणना के अनुसार दिल्ली में एक वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में 11,394 लोग रहते हैं. ऐसे में इन्हीं लोगों को ज्यादा समस्या होने लगी, वहीं अगर इस समस्या का समाधान कोई कर सकता है तो वो भी इसी शहर के लोग है. जितने ज्यादा लोग पेड़ लगाने में रहेंगे, उतनी ही आसानी से समस्या दूर होगी. इस घटना से देश के नागरिकों को सबक लेकर आज से ही पेड़ लगाकर उन्हें बड़ा करना शुरू कर देना चाहिए. समस्या की गंभीरता को समझते हुए सरकार को भी इस विषय में कानून बनाना चाहिए. अगर हम अब भी संभल कर पेड़ लगाना शुरू नहीं करेंगे तो कोरोना जैसी भयंकर महामारी का सामना भी नहीं कर पाएंगे.

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