PM मोदी ने की जिन महिलाओं की तारीफ, जानिए उन्होंने कैसे मेहनत से पाया मुकाम
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PM मोदी ने की जिन महिलाओं की तारीफ, जानिए उन्होंने कैसे मेहनत से पाया मुकाम

चिचगांव की कुछ आदिवासी महिलाओं ने ऐसा काम किया है जो सबके लिए प्रेरणादायक है. ये आदिवासी महिलाएं जिस राइस मिल में मजदूरी करती थी, उसी राइस मिल को इन महिलाओं ने अपनी मेहनत से खरीद लिया. जिसके बाद प्रधानमंत्री ने भी उनकी इस सफलता का जिक्र 'मन की बात' कार्यक्रम में करते हुए उनकी तारीफ की. 

PM मोदी ने की जिन महिलाओं की तारीफ, जानिए उन्होंने कैसे मेहनत से पाया मुकाम

बालाघाटः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल की शुरूआत में पहली बार 31 जनवरी को रेडियों के माध्यम से देश के लोगों से ''मन की बात'' की. इस दौरान पीएम मोदी ने मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में आने वाले चिचगांव की कुछ आदिवासी महिलाओं की तारीफ की. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस गांव की महिलाओं ने ऐसा क्या काम किया है, जिसके लिए पीएम मोदी भी उनकी तारीफ करने को मजबूर हो गए.

अपनी मेहनत से खरीदी राइस मिल
दरअसल, चिचगांव की कुछ आदिवासी महिलाओं ने ऐसा काम किया है जो सबके लिए प्रेरणादायक है. ये आदिवासी महिलाएं जिस राइस मिल में मजदूरी करती थी, उसी राइस मिल को इन महिलाओं ने अपनी मेहनत से खरीद लिया. जिसके बाद प्रधानमंत्री ने भी उनकी इस सफलता का जिक्र 'मन की बात' कार्यक्रम में करते हुए उनकी तारीफ करते हुए लोगों को इन महिलाओं से प्रेरित होने की बात कही है.  

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कोरोना काल में आपदा को अवसर में बदला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में कहा कोरोना काल में कैसे आपदा को अवसर में बदला जाता है, यह हमें चिचगांव में रहने वाली आदिवासी महिलाओं से सीखना चाहिए. ये महिलाएं जिस राइस मिल में काम करती थी, वह मिल कोरोना काल में बंद हो गई. मिल के मालिक ने मशीन भी बेचने की बात कही. जिसके बाद बेरोजगार हुई इन महिलाओं ने सोचा कि यह मशीन वे मिलकर खरीदेंगी और अपनी खुद की राइस मिल शुरू करेगी. जिसके बाद महिलाओं ने अपनी मेहनत से जो पैसा इक्कठा किया था. उससे मिल की मशीन खरीदी और अपनी खुद की राइस मिल शुरू की.

3 लाख रुपए का मुनाफा भी कमाया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज ये महिलाएं यह राइस मिल अपने दम पर चला रही है. पीएम ने कहा कि इन महिलाओं मिल शुरू करने के लिए बैंक से कुछ लोन भी लिया था. जिसे चुकाकर अब तक वे  3 लाख रुपए का मुनाफा भी कमा चुकी है. ये महिलाएं अपने व्यापार को और आगे बढ़ाने में जुटी हुई हैं. जिसके लिए उनकी जितनी तारीफ की जाए कम होगी.

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मीना राहंगडाले ने बनाया महिलाओं का स्वयं सहायता समूह
दरअसल, बालाघाट जिले के चिचगांव में रहने वाली मीना राहंगडाले ने गांव की कुछ महिलाओं को जोड़कर स्वयं सहायता समूह बनाया. जिसके बाद सभी महिलाओं ने मशीन खरीदने के लिए पैसा इक्कठा किया और जितना पैसा कम पड़ा उतना बैंक से लोन ले लिया और इस तरह इन महिलाओं ने मिलकर राइस मिल में बिक रही मशीन खरीद ली.  खास बात यह है कि इसी मिल में यह महिलाएं कोरोना के पहले तक काम किया करती थी.

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