जानिए क्यों खास है Remdesivir, इसे खरीदने के लिए क्यों लग रहीं लंबी-लंबी लाइनें?

कांग्रेस विधायक प्रवीण पाठक ने भी सीएम शिवराज को चिट्ठी लिखकर रेमडिसिविर दवाई की कालाबाजी रोकने की अपील की है.

जानिए क्यों खास है Remdesivir, इसे खरीदने के लिए क्यों लग रहीं लंबी-लंबी लाइनें?
फाइल फोटो.

ग्वालियर: कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच जिस एक चीज की सबसे ज्यादा मांग बनी हुई है, वो है रेमडिसिविर दवाई. बता दें कि रेमडिसिविर दवाई कोरोना के मरीजों को दी जाती है और इस वक्त इस दवाई की बहुत ज्यादा डिमांड है. ज्यादा डिमांड के चलते ही इस दवाई की बाजार में शॉर्टेज हो गई है. ऐसे में कई जगहों पर रेमडिसिविर दवाई की कालाबाजारी की खबरें भी आ रही हैं. ग्वालियर से कांग्रेस विधायक प्रवीण पाठक ने भी सीएम शिवराज को चिट्ठी लिखकर रेमडिसिविर दवाई की कालाबाजी रोकने की अपील की है. 

विधायक प्रवीण पाठक ने पत्र में लिखा है कि रेमडिसिविर दवाई की कीमत करीब 700-800 रुपए है लेकिन कालाबाजारी में यह दवाई 10-15 हजार रुपए की बिक रही है. विधायक ने दवाई की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की भी मांग की है. 

क्या है रेमडिसिविर दवाई
बता दें कि अमेरिका की एक कंपनी ने हेपेटाइटिस के इलाज के लिए रेमडिसिविर दवाई की खोज की थी. बाद में इबोला वायरस के खिलाफ भी यह दवाई काफी कारगर पाई गई. अब कोरोना महामारी में भी जब कोरोना मरीजों पर इस दवाई का इस्तेमाल किया गया तो कोरोना संक्रमण में भी यह दवाई प्रभावी निकली. दरअसल यह दवाई शरीर में कोरोना के संक्रमण को फैलने से रोकती है. बीते दिनों डब्लूएचओ ने भी कोरोना के इलाज के लिए रेमडिसिविर दवाई के इस्तेमाल को मंजूरी दी थी. उसके बाद से ही भारत में इस दवाई की डिमांड काफी बढ़ गई है. 

कोरोना की दूसरी लहर में बढ़ी मांग
टीओआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, रेमडिसिविर दवाई सिर्फ डॉक्टर के प्रिसक्रिप्शन पर ही खरीदी जा सकती है. कोरोना की देश में पहली लहर के दौरान सिर्फ 15-20 मरीजों को ही रेमडिसिविर के इंजेक्शन दिए गए लेकिन दूसरी लहर में यह आंकड़ा बढ़कर 80 फीसदी के करीब पहुंच गया है. 

रिपोर्ट के अनुसार, स्टैंडर्ड प्रोटोकोल के मुताबिक यह दवाई इतनी इस्तेमाल नहीं होनी चाहिए लेकिन निजी अस्पतालों के डॉक्टर इसका बहुत ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. यही वजह है कि देश में अचानक से इस दवाई की डिमांड काफी बढ़ गई है और शॉर्टेज की वजह से इसकी कालाबाजारी हो रही है.