पीएम आवास की दूसरी किश्त अटकी, आवास पड़े अधूरे, हितग्राही परेशान

 प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना वर्ष 2015-16 से आगर जिले में भी शुरू की गई. लेकिन आगर नगरीय क्षेत्र में अधिकारियों के उदासीन रवैये से इसपर पलीता लगता दिखाई दे रहा है.

पीएम आवास की दूसरी किश्त अटकी, आवास पड़े अधूरे, हितग्राही परेशान

आगर: प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना वर्ष 2015-16 से आगर जिले में भी शुरू की गई. लेकिन आगर नगरीय क्षेत्र में अधिकारियों के उदासीन रवैये से इसपर पलीता लगता दिखाई दे रहा है. पक्के मकान का सपना संजोय बैठें पात्र हितग्राही ने सूची में नाम आने के बाद पहली किस्त के रूप में एक-एक लाख रुपए डाल दिये, मगर महीनों बीत जाने के बाद भी दूसरी किश्त के ठिकाने नहीं है.ॉ

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दरअसल आगर नगर के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के दूसरे चरण में 1554 पात्र हितग्राहियों की डीपीआर स्वीकृत हुई थी. जानकारी के अनुसार गत वर्ष अगस्त माह में 732 हितग्राहियों के मान से 7 करोड़ 32 लाख रुपये शासन द्वारा नगर पालिका को आवंटित किए जा चुके थे. नगर पालिका ने 2 सितंबर को 732 हितग्राहियों की सूची जारी कर पहली किश्त के रूप में 1-1 लाख रुपए खातों में डालने की प्रक्रिया शुरू की और यह मामला राजनीति की भेंट चढ़ गया. सूची जारी होते ही आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गए. क्योंकि कई जरूरतमंद, गरीब व पात्र लोगों के नाम सूची में नहीं थे. बाद में जांच के बाद 1-1 लाख की राशी डाली गई तो अब दूसरी किस्त का इंतजार जारी है.

केस 1
कच्चे मकान को भी तोड़ दिया था
टूटी-फूटी कच्ची छत के नीचे जैसे तैसे गुजर बसर कर रहे बेरोजगारी के साथ-साथ अपने दोनों पैरो से दिव्यांग विनोद बैरागी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि उनका भी पक्का मकान होगा, लेकिन पीएम आवास योजना में नाम स्वीकृत होने के बाद मानो सपनो को पंख लग गए. लेकिन उनकी खुशी ज्यादा दिन टिक न सकी. पहली किश्त मिलने के बाद जो कच्चा मकान था उसको भी तोड़ दिया. जितनी राशी मिली उतना निर्माण कर लिया, राशि के अभाव में छत अधूरी रह गई तो जैसे तैसे टीन की छत तान दी. लेकिन बारिश में टूटी फूटी छत से पानी टपकने की चिंता अब सता रही है. 

केस 2
किराए के मकान में रहना पड़ रहा
इसी तरह की परेशानी जैसे तैसे गुजर बसर करने वाली लीला बाई की है. जो किराए के मकान में रहकर अब सिस्टम को कोस रही है. लीला बाई के मकान के लिए भी राशी स्वीकृत की गई थी. 1 लाख की राशि खाते में जमा भी हुई. जिसके चलते लीला बाई ने पहले से बना उनका कच्चा पक्का जर्जर मकान तोड़ दिया और जैसे-तैसे अपनी जमा पूंजी मिलाकर आधा निर्माण कर लिया. अब महीनों से 2000 रुपए का किराया भी भुगत रहे है. बेटा होटल पर मजदूरी करता है. जिससे जैसे तैसे घर चल रहा है. पति को लकवा हो जाने से बिस्तर पर रहने को मजबूर है. ऐसे में जल्द ही बाकी राशि मिल जाए उसके लिए लगातार जिम्मेदारों के चक्कर लगा रहे है.

केस 3
पक्के मकान को तोड़ दिया
सूची में नाम आने के बाद देवीलाल यादव भी ऐसे कई हितग्राहियों में से एक है. जिन्होंने पक्के मकान के चक्कर मे अपना कच्चा मकान भी तोड़ दिया और अब राशी के अभाव में मकान का काम आगे नहीं बड़ा पा रहे है. कुछ झोपड़ी बनाकर रह रहे है तो कुछ किराए के मकानों में रहने को मजबूर है तो कोई अधूरे मकानों में अपने सामान की रखवाली कर रहा है.ॉ

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राशि मिलते ही डाल देंगे
नगर पालिका सीएमओ बन्नेसिंह सोलंकी का कहना है कि आगर शहर में प्रचलित आवास योजना के अंतर्गत जिन हितग्राहियों को पहली किस्त दी जा चुकी है और उन्होंने इस राशि के उपयोग से निर्माण कर लिया है. उनके लिए दूसरी किस्त के लिए डिमांड नियमानुसार कार्रवाई पूर्ण करते हुए गत माह की है. जल्दी ही राशि आने की उम्मीद है.

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