MP: पेंच टाइगर रिजर्व की बाघिन के नाम है ये कीर्तिमान, बना चुकी है अनूठा विश्व रिकॉर्ड

सितम्बर 2005 में जन्मी कालरवाली बाघिन अब तक 8 बार में 29 शावकों को जन्म दे चुकी है, जो एक अनूठा विश्व रिकॉर्ड है.

MP: पेंच टाइगर रिजर्व की बाघिन के नाम है ये कीर्तिमान, बना चुकी है अनूठा विश्व रिकॉर्ड

भोपाल: मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का तमगा दिलाने में अहम योगदान देने वाली पेंच टाइगर रिजर्व की बाघिन 'कालरवाली' के नाम विश्व में सर्वाधिक संख्या में प्रसव और शावकों के जन्म का कीर्तिमान है. सितम्बर 2005 में जन्मी कालरवाली अब तक 8 बार में 29 शावकों को जन्म दे चुकी है, जो एक अनूठा विश्व रिकॉर्ड है. यह एक साथ 5 शावकों को भी जन्म दे चुकी है. बता दें कि कालरवाली बाघिन की अपनी मां और भाई-बहनों के साथ बनी डाक्यूमेंट्री फिल्म 'Tiger: Spy in the Jungle' भी काफी लोकप्रिय है. BBC ने कालरवाली की मां टी-7 और उसके चार शावकों पर यह डाक्यूमेंट्री बनाई थी. फिल्म में कालरवाली और अन्य शावक उछल-कूद, मस्ती, शिकार करते और बड़े होते हुए दिखाये गए हैं.

पेंच टाइगर रिजर्व की टी-7 बाघिन ने 4 शावकों को जन्म दिया था, जिनमें 2 मादा और 2 नर शावक थे. रिजर्व में पहली बार एक मादा शावक को 11 मार्च, 2008 को बेहोश कर भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून के विशेषज्ञों द्वारा रेडियो कॉलर पहनाया गया. इसके बाद से यह बाघिन कालरवाली के नाम से प्रसिद्ध हो गई. इसका विचरण पर्यटन क्षेत्र में होने के कारण यह पर्यटकों को सबसे ज्यादा दिखाई पड़ती है. दूसरी मादा शावक बड़ी होने पर नाला क्षेत्र के पास अधिक पाये जाने के कारण उसका नाम बाघिन नालावाली पड़ गया. यह बाघिन भी पर्यटकों को गाहे-बगाहे दिख जाती है.

कालरवाली अब तक 8 बार शावकों को जन्म दे चुकी है
पहली बार कालरवाली ने मात्र ढाई वर्ष की उम्र में 3 शावकों (एक नर, दो मादा) को जन्म दिया था. किशोर मां की अनुभवहीनता, भीषण गर्मी और कमजोर होने के कारण इन शावकों की 2 माह के अंदर मृत्यु हो गई.

दूसरी बार कालरवाली ने 4 शावकों को जन्म दिया
दूसरी बार कालरवाली ने एक मादा और 3 नर शावकों को जन्म दिया. हाथी महावतों ने इन शावकों को पहली बार मां के साथ 10 अक्टूबर, 2008 को देखा. इनमें से एक शावक को भारतीय वन्य जीव संस्थान, देहरादून के विशेषज्ञों ने 25 मार्च, 2010 को रिजर्व में चल रहे प्रोजेक्ट 'ईकोलॉजी ऑफ टाइगर इन पेंच टाइगर रिजर्व' के अंतर्गत बाघों का अध्ययन करने के लिये बेहोश कर कॉलर पहनाया.

रिजर्व के इतिहास में किसी बाघिन ने 5 शावकों को दिया जन्म
क्षेत्र संचालक पेंच टाइगर रिजर्व विक्रम सिंह परिहार बताते हैं कि कालरवाली ने तीसरी बार 5 शावकों को जन्म दिया, जो रिजर्व के इतिहास में पहली बार हुआ. बाघिन अपने 5 शावकों के साथ पहली बार 5 अक्टूबर, 2010 को देखी गई. इन शावकों में 4 मादा और एक नर शावक था. चारों मादा शावक अपनी मां के साथ रहते थे, जबकि नर शावक हमेशा ही सबसे दूरी बनाकर चलता था, मानो सबकी सुरक्षा कर रहा हो.

पन्ना टाइगर रिजर्व की बाघ पुन:स्थापना में भी कालरवाली का आधारभूत योगदान है. बाघ शून्य होने के बाद पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की पुन:स्थापना का काम जारी था. इसी के तहत पेंच टाइगर रिजर्व से एक किशोरवय बाघिन को वहां भेजा जाना था. इसके पहले भी पेंच से एक बाघ को जनवरी 2010 में पन्ना भेजा जा चुका था.
कालरवाली के 5 शावकों में 4 मादा शावक थे. उनमें से एक शावक को पन्ना भेजने का निर्णय लिया गया. अक्सर कर्माझिरी के पास देखी जाने वाली मादा बाघ शावक को 21 जनवरी, 2013 को बेहोश कर रेडियो कॉलर पहनाया गया और सड़क मार्ग से विशेष रेस्क्यू वाहन द्वारा पन्ना टाइगर रिजर्व भेज दिया गया. सुरक्षित रूप से पहुंची यह बाघिन आज पन्ना में 3 बच्चों को जन्म देकर परवरिश कर रही है.

कालरवाली बाघिन ने 15 मई, 2012 को 3 शावकों को जन्म दिया

इस बार कालरवाली ने 2 मादा और एक नर शावक को जन्म दिया. लेकिन मादा शावक की 20 अप्रैल, 2013 को बीजामट्टा तालाब के पास अज्ञात बीमारी से मौत हो गई.

2013 में 3 नर शावकों को दिया जन्म
पांचवीं बार कालरवाली बाघिन ने 16 अक्टूबर, 2013 को 3 नर शावकों को जन्म दिया. आज ये बाघ रिजर्व की शोभा बढ़ा रहे हैं और पर्यटकों को अकसर दिखते रहते हैं.

छठवीं बार 4 शावकों को दिया जन्म
छठवीं बार जन्में शावकों को कालरवाली के साथ लगभग 15-20 दिन की उम्र में 6 अप्रैल, 2015 को देखा गया. उस समय शावकों की आंखें खुल चुकी थी और सभी स्वस्थ अवस्था में थे. इस बार उसने 4 शावकों को जन्म दिया था.

2017 और 2018 में भी शवकों को जन्म दिया
सातवीं बार वर्ष 2017 में कालरवाली ने 3 शावकों को जन्म दिया. अठखेलियां करते हुए ये शावक भी मां के साथ पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बने रहे और इनका फोटो भी काफी लोकप्रिय हुआ.
कालरवाली बाघिन दिसम्बर 2018 में आठवीं बार जन्में नवजात 4 शावकों के साथ देखी गई. पर्यटकों ने 27 जनवरी, 2019 को बाघिन द्वारा अपने बच्चों को मुंह में दबाकर सुरक्षित स्थान पर ले जाने की प्रक्रिया को भी देखा. इन शावकों में से वर्तमान में 3 शावक जीवित हैं.