कोरोना में ऑक्सीजन है संजीवनी बूटी तो क्यों नहीं हम इसको सिलेंडरों में भर लेते?

काश! ऐसा होता कि ऑक्सीजन हम अपने घरों में या पैसों की तरह बैंक में सेव कर पाते. ये एक कल्पना मात्र ही है. लेकिन आइए इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश करते हैं. 

कोरोना में ऑक्सीजन है संजीवनी बूटी तो क्यों नहीं हम इसको सिलेंडरों में भर लेते?
प्रतीकात्मक तस्वीर

भोपालः दम घोटू कोरोना की दूसरी लहर ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है. जीने के लिए हर इंसान को भोजन पानी और हवा की जरूरत होती है. हवा में मौजूद ऑक्सीज़न लेवल हमें जीवन देता है. ऑक्सीज़न नहीं तो ज़िन्दगी नहीं. कोरोना ने हमें ऑक्सीज़न क्यों जरूरी हैं ये तो समझा दिया है लेकिन कमी को पूरा कैसे करें इसका तरीका नहीं मिल रहा है. कोरोना की दूसरी लहर में हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि सरकार 50 हज़ार मीट्रिक टन ऑक्सीज़न खरीदने के लिए दुनिया के बाज़ार में खड़ी ऑक्सीज़न मिलने का इंतज़ार कर रही है.

काश! ऐसा होता कि ऑक्सीज़न हम अपने घरों में या पैसों की तरह बैंक में सेव कर पाते. ये एक कल्पना मात्र ही है. लेकिन इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश करते हैं, आख़िर इस हवा को हम क्यों नहीं भर पाते और अस्पतालों में मिलने वाली मेडिकल ऑक्सीज़न क्या है कहां से आती है. हम ज़्यादा क्यों नहीं बना पाते?

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मेडिकल ऑक्सीजन क्या है?
2015 में इसे आवश्यक दवा के रूप में स्वीकार किया गया और दवा की सूची में जोड़ा गया. ये WHO की भी आवश्यक दवाइयों में शामिल है. इसके तीन लेवल सुनिश्चित किये गए है.

  • प्राइमरी लेवल
  • सेकंडरी लेवल
  • टर्शियरी लेवल

 मेडिकल ऑक्सीज़न में नमी, धूल या दूसरी अशुद्धि जैसी गैस नहीं होती है. ये 98% शुद्ध होती है.

 क्यों नहीं भर पाते सिलेंडरों में?
 प्राकृतिक रूप से मिली हवा में केवल 21% ऑक्सीज़न होती है इसलिए मेडिकल ऑक्सीजन को वैज्ञानिकों की मदद से बनाया जाता है. इसके लिए बड़े बड़े प्लांट लगाए जाते है. ये लिक्विड फॉम में तैयार की जाती है. अब आप सोचिये इतने सारे लोग और 21% हवा कैसे पूर्ति करेगी. इसलिए मेडिकल ऑक्सीज़न का निर्माण किया जाता है इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए.

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 अस्पतालों में कौन से सिलेंडर का इस्तेमाल होता है?

  • 7 क्यूबिक मीटर वाले सिलेंडर का इस्तेमाल होता है.
  • इसकी ऊंचाई 4 फुट 6 इंच होती है.
  • इसकी क्षमता 47 लीटर होती है.
  • प्रेशर से करीब 7000 लीटर ऑक्सीज़न भरी जाती है.
  • एक सिलेंडर लगभग 20 घंटे तक चलता है.
  • इसके रिफिलिंग में 175 रुपए से 200 रुपए तक का खर्च आता है.

एक स्वस्थ व्यक्ति को कितनी चाहिए ऑक्सीज़न?
एक स्वस्थ वयस्क 1 मिनट में 12 से 20 बार सांस लेता है। अगर 12 से कम या 20 से ज़्यादा बार कोई व्यक्ति लेता सांस है तो उसे कोई परेशानी की निशानी होती है. अगर एक वयस्क व्यक्ति जब कोई काम नही कर रहा होता तो उसे हर मिनट 7 से 8 लीटर हवा की जरूरत होती है। यानी रोज़ 11000 लीटर हवा चाहिए होती है। सांस के ज़रिए फेफड़ों में जाने वाली हवा 20% ऑक्सीज़न होती है जबकि 15% हवा हम छोड़ते है यानी बची 5% हवा का इस्तेमाल होता है यानी 5% ऑक्सीज़न है जो कार्बन डाइऑक्साइड में बदलती है यानी 24 घंटे में करीब 550 लीटर शुद्ध ऑक्सज़न की जरूरत होती है.

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