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Zee Madhya Pradesh ChhattisgarhPhotosमहाकाल की नगरी का वो श्मशान घाट जिसे मिला है 'तीर्थ' स्थान का दर्जा, तंत्र साधकों का लगता है डेरा
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महाकाल की नगरी का वो श्मशान घाट जिसे मिला है 'तीर्थ' स्थान का दर्जा, तंत्र साधकों का लगता है डेरा

Chakratirth Shamshan Ghat Ujjain: बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन केवल एक धार्मिक शहर नहीं है, बल्कि सनातन आस्था की जीवन चेतना है. यहां समय भी शिव के अनुशासन में चलता है और मृत्यु को भी मोक्ष का द्वारा माना जाता है. शिप्रा नदी के तट पर बसी यह प्राचीन नगरी सदियों से साधना, त्याग और आत्मिक शुद्धता की भूमि रही है. शास्त्रों में उल्लेखित अवंतिका (उज्जैन) को देवताओं की प्रिया नगरी कहा गया है, जहां हर घाट, हर मंदिर और हर दिशा किसी दिव्या शक्ति से जुड़ी मानी जाती है. उज्जैन की पहचान जहां महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से है, वहीं इस नगरी का एक रहस्य और गुड़ स्वरूप भी है. यहां स्थित चक्रतीर्थ श्मशान घाट को साधारण शमशान घाट नहीं, बल्कि आध्यात्मिक तीर्थ माना जाता है. 

 

मोक्षदायनी शिप्रा के तट पर स्थित है चक्रतीर्थ श्मशान घाट

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मोक्षदायनी शिप्रा के तट पर स्थित है चक्रतीर्थ श्मशान घाट

मोक्ष प्रदान करने वाली शिप्रा नदी के किनारे स्थित चक्रतीर्थ श्मशान घाट धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से विशेष महत्व रखता है. मान्यताओं के अनुसार यहां किए गए अंतिम संस्कार से आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है और वह परमलोक की यात्रा पर अग्रसर होती है.

 

महाभारत काल से जुड़ी है चक्रतीर्थ की पौरणिक मान्यता

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महाभारत काल से जुड़ी है चक्रतीर्थ की पौरणिक मान्यता

इस स्थल से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पौराणिक मान्यता प्रचलित है. कथाओं के अनुसार महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद समेत अनेक योद्धा वीरगति को प्राप्त हुए तब उनके अंतिम संस्कार के लिए ऐसी भूमि की खोज की गई, जो पूर्ण रूप से पवित्र और निष्कलंक हो. मान्यता है कि पृथ्वी पर लंबे समय तक ऐसा कोई स्थान नहीं मिला, जहां कभी पाप का प्रभाव ना रहा हो. 

 

कर्ण के अंतिम संस्कार से जुड़ी है कहानी

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कर्ण के अंतिम संस्कार से जुड़ी है कहानी

इसके बाद देवदूतों को अवंतिका (उज्जैन) नगरी में एक ऐसा दिव्या क्षेत्र दिखाई दिया, जिससे इस उद्देश्य के लिए उपयुक्त माना गया. कहा जाता है कि भगवान विष्णु जो, उसे समय श्रीकृष्ण के रूप में अवतरित थे. अपने सुदर्शन चक्र के माध्यम से कर्ण के पार्थिव शरीर का विधिवत अंतिम संस्कार कराया. इसी पौराणिक प्रसंग के कारण इस स्थल को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त हुआ और यह स्थान आज के चक्रतीर्थ शमशान घाट के नाम से प्रसिद्ध है, जिसे तीर्थ का दर्जा दिया गया है.

 

आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र है चक्रतीर्थ

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आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र है चक्रतीर्थ

उज्जैन स्थित चक्रतीर्थ श्मशान घाट को केवल अंतिम संस्कार स्थल के रूप में नहीं, बल्कि एक विशिष्ट आध्यात्मिक केंद्र के रूप में भी देखा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के चलते इसे तीर्थ का दर्जा प्राप्त है. यह स्थान तंत्र साधना और सिद्धि से भी जुड़ा माना जाता है. मानता है कि यहां का वातावरण और ऊर्जा साधकों को विशेष आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करती है. खास तौर पर दिवाली की अमावस्या पर देश और विदेशी तांत्रिक व साधक यहां पहुंचते हैं, जहां वह अपनी साधनाएं करते हैं और सिद्धि प्राप्त करने का प्रयास करते हैं. इन मान्यताओं के कारण चक्रतीर्थ शमशान घाट आस्था, रहस्य और अध्यात्म का अनोखा केंद्र माना जाता है.

 

अखिलेश्वर शमशान घाट

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अखिलेश्वर शमशान घाट

उज्जैन में कुल तीन प्रमुख श्मशान घाट है, जिन्हें अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं और कथाओं से जोड़ा जाता है. चक्रतीर्थ श्मशान घाट के अलावा दो और शमशान घाट है. जिनका महत्व अधिक माना जाता है. अखिलेश्वर शमशान घाट जो मंगलनाथ मंदिर के पास स्थित है. यह शिप्रा नदी के तट पर है. इस घाट को विशेष रूप से पितृ कर्म और साथ से जोड़ा जाता है. मानता है कि यहां किए गए अंतिम संस्कार और पिंडदान से पितरों को शांति प्राप्त होती है. स्थानीय लोग इस घाट को पारंपरिक और शांत स्थल के रूप में जानते हैं, यह नियमित रूप से दाह संस्कार की क्रियाएं संपन्न होती है.

 

त्रिवेणी क्षेत्र का श्मशान घाट

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त्रिवेणी क्षेत्र का श्मशान घाट

त्रिवेणी क्षेत्र का श्मशान घाट उज्जैन का तीसरा प्रमुख अंतिम संस्कार स्थल है. यह नवग्रह मंदिर के पास स्थित है. यहां शिप्रा, गंडकी, सरस्वती तीन धाराओं के संगम के कारण त्रिवेणी के नाम से जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संगम स्थल पर अंतिम संस्कार करने से आत्मा को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. यह घाट भी स्थानीय श्रद्धालु और निवासियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां नियमित रूप से अंतिम संस्कार किए जाते हैं.