Sawan Somwar Vrat 2021: सावन में MP के इन मंदिरों में जुटती है भारी भीड़, जानिए क्या है पूजा की सही विधि

Sawan Somwar Puja Vidhi 2021: सावन का दूसरा सोमवार आज है. उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर समेत देश भर के शिव मंदिरों में दर्शन करने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी.   

Sawan Somwar Vrat 2021: सावन में MP के इन मंदिरों में जुटती है भारी भीड़, जानिए क्या है पूजा की सही विधि

अश्विन सोलंकी/नई दिल्लीः Sawan Somwar Vrat 2021: सावन के पावन माह (Sawan Mass 2021) की शुरुआत 25 जुलाई से हुई. आज सावन का दूसरा सोमवार है (Sawan Somwar Second), उज्जैन के महाकाल मंदिर (Mahakal Mandir, Ujjain), मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर (Pashupatinath Mandir, Mandsaur) समेत मध्य प्रदेश के कई शिव मंदिरों (Madhya Pradesh Famous Shiv Mandir) में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आकर भोलेनाथ से प्रार्थना कर रहे हैं. 

सावन सोमवार व्रत (Sawan Somwar Vrat 2021)
सावन का पहला सोमवार 26 जुलाई को रहा, 2 अगस्त को दूसरा, 9 अगस्त को तीसरा और 16 अगस्त को सावन का चौथा सोमवार है. आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक, अध्यक्ष मध्य प्रदेश ज्योतिष एवं विद्वत परिषद ने जी मीडिया से बात करते हुए बताया कि सावन के पावन महीने में भगवान शिव का व्रत क्यों रखना चाहिए व व्रत और पूजन की सही विधि क्या होती है. 

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सावन सोमवार व्रत का महत्त्व (Sawan Somwar Vrat Mahatva)
पंडित शर्मा ने बताया कि व्रत शरीर की शुद्धि और मन की शांति के लिए होता है. इससे काम करने में आनंद आता है. भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा रहता है, बताया गया है कि चंद्रमा से मन को स्थिर करने की प्रेरणा मिलती है. देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने भी कहा था, सप्ताह में एक बार व्रत जरूर रखना चाहिए. 'ऊँ नमः शिवाय' के मंत्र और सावन महीने में शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. 

उन्होंने बताया कि व्यक्ति जीवन भर धर्म, अर्थ (धन), काम (इच्छा) और मोक्ष (शांति) के लिए प्रार्थन करता है. वैसे तो भोले की भक्ति पूरे साल करनी चाहिए, लेकिन सावन मास में भोलेनाथ की आराधना लोक कल्याणकारी होती है. इस दौरान व्रत करने मात्र से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी होती है. 

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सावन सोमवार व्रत की विधि (Sawan Somwar Vrat Vidhi)
सावन में आने वाले चार सोमवार के दौरान व्रत रखे जाते हैं, आज दूसरा सोमवार है. अभी दो सोमवार आना बाकी है. पंडित शर्मा के अनुसार, सोमवार सुबह नित्यकर्म के बाद व्यक्ति को निराहार रहना चाहिए. जरूरत लगने पर फलाहार और दूध का सेवन कर सकते हैं. युवाओं को उन्होंने निराहार रहने की सलाह दी, वहीं बच्चे व बुजुर्ग फलाहार का सेवन कर व्रत रख सकते हैं.

  • जल्दी उठकर स्नान करें
  • धूप, दीप से गणेश जी की आरती करें
  • मंदिर जाकर शिव का जलाभिषेक करें
  • मां पार्वती और नंदी को भी गंगाजल या दूध चढ़ाएं
  • शिवलिंग पर धतूरा, भांग, व चंदन चढ़ाएं
  • घी और शक्कर को भोग लगाकर प्रसाद बांटें
  • गन्ना, दूध, शहद, शक्कर, आम में से किसी एक के रस से भी शिवाभिषेक करें
  • दूध, दही, शक्कर, शहद व घी से बने पंचामृत से भी अभिषेक कर सकते हैं
  • शिव को जनेऊ पहनाए, फूल, दुर्वांकुर, अबीर व गुलाल चढ़ाएं
  • फल, सूखे मेवे व मिठाई भी चढ़ा सकते हैं
  • पान के ऊपर लोंग व इलायची लगाकर चढ़ाएं
  • आखिर में भगवान शिव की आरती के बाद प्रसाद बांटें

करोड़ों कन्यादान से बढ़कर बिल पत्र
पंडित शर्मा के अनुसार शिव को भोले भी कहा जाता है. उनके मस्तक पर बिल पत्र चढ़ाने मात्र से करोड़ों कन्यादानों से बढ़कर लाभ होता है. बिल पत्र के साथ आक का फूल, धतूरा व भांग भी चढ़ाएं. उनका कहना है कि शिव तो एक लौटा जल व 'ऊं नमः शिवाय' के जाप मात्र से प्रसन्न हो सकते हैं. 

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इन बातों का रखें ध्यान

  • व्रत सोमवार सूर्योदय से मंगलवार सूर्योदय तक करें
  • व्रत के दौरान किसी का अहित नहीं करें और नियम व संयम से रहें
  • व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का धारण करें

ऐसे भागेगा कोरोना
जी मीडिया से बात करते हुए पंडित शर्मा ने बताया कि धर्मों में महामारी खत्म करने के उपायों का भी जिक्र है. उनके अनुसार सरकार को हिंदू, मुस्लिम, सिख, जैन, ईसाई व अन्य धर्म के गुरुओं को बुलाकर पूछना चाहिए कि महामारी से निजात किस तरह पाया जा सकता है. उनके अनुसार पूछने से हल जरूर निकलेगा. देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में अति रुद्र महायज्ञ होना चाहिए. उनका कहना है कि धार्मिक उपायों को अपनाकर महामारी को समाप्त किया जा सकता है. 

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MP के इन मंदिरों में जुटती है भक्तों की भीड़
महाकाल मंदिर, उज्जैन

उज्जैन का महाकाल मंदिर देशभर में प्रसिद्ध है. हर साल सावन माह में यहां श्रद्धालु भारी मात्रा में इकट्ठा होते हैं. इस बार कोविड के कारण मंदिर प्रबंधन www.mahakaleshwar.nic.in वेबसाइट पर आरती और पालकी का लाइव प्रसारण कर रहा है. 

पशुपतिनाथ मंदिर, मंदसौर
मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर में इस बार कम ही भक्तों को दर्शन करने की अनुमति दी गई. गर्भगृह में जाने की परमिशन दी गई. मंदिर के पुजारियों का कहना है कि सही विधि में पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. 

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, ओंकारेश्वर
खंडवा जिले में स्थित ओंकारेश्वर, ज्योतिर्लिंग, भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. मंदिर प्रबंधन समिति shriomkareshwar.org वेबसाइट और फेसबुक पर आरती का लाइव प्रसारण भी कर रहा है. 

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जटाशंकर महादेव, छतरपुर
मध्य प्रदेश के फेमस मंदिरों में छतरपुर का जटाशंकर महादेव मंदिर भी शामिल है. श्रद्धालु यहां सुबह तीन बजे से जल चढ़ाने के लिए कतार लगाकर खड़े हो जाते हैं. बताया जाता है कि डाकू मूरत सिंह ने इस मंदिर का निर्माण 1970 के दौरान करवाया था. 

बड़महादेव मंदिर, भोपाल
भोपाल में बड़महादेव मंदिर स्थापित है, जो करीब 300 साल पुराना है. यहां शिवभक्त बेलपत्र पर राम नाम लिखकर महादेव को अर्पित करते हैं. 

वनखंडेश्वर मंदिर, भिंड
मध्य प्रदेश के भिंड जिले में वनखंडेश्वर मंदिर भी स्थापित है, बताया जाता है कि पृथ्वीराज चौहान ने इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण करवाया था. हर बार की तरह इस बार भी यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जमा हो रहे हैं.  

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