Ujjain Mahashivratri: उज्जैन में होने वाले शिव नवरात्रि उत्सव की तैयारियां पूरी हो चुकी है, यह आयोजन महाशिवरात्रि के पर्व तक मनाया जाएगा. जिसके लिए उज्जैन में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं.
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Ujjain Shiv Nvratri Festival: उज्जैन में हर साल की तरह इस साल भी महाशिवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा. वहीं उससे पहले वैदिक परंपराओं के अनुरूप विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में शिव नवरात्रि उत्सव का शुभारंभ 6 फरवरी होने वाली हैं, यह आयोजन 15 फरवरी यानि महाशिवरात्रि तक चलेगा. मान्यताओं के अनुसार यह पर्व शिव के प्रकटोत्सव के रूप में जाना जाता है, जबकि लोक परंपराओं में यह उत्सव शिववाहक स्वरूप में प्रचलित है. महाकालेश्वर मंदिर विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां शिव नवरात्रि का आयोजन परंपरागत वैदिक विधि-विधान के साथ किया जाता है.
उज्जैन मंदिर में होता रुद्र पाठ
उज्जैन में शिव नवरात्रि के दौरान मंदिर के गर्भगृह में 11 ब्राह्मणों की तरफ प्रतिदिन लघु रुद्र पाठ किया जाएगा. इसके पश्चात भगवान महाकाल का विविध स्वरूपों में श्रृंगार किया जाएगा. यह पर्व नौ दिनों तक मनाया जाता है, लेकिन एक तिथि अधिक होने के कारण इस बार यह यह आयोजन 10 दिन तक मनाया जाएगा. पहले दो दिन भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में वस्त्र धारण कर भक्तों को दर्शन देंगे, उसके बाद तीसरे दिन से शेषनाग धरण किया जाएगा. इसके बाद अलग-अलग स्वरूपों में भगवान अपने भक्तों को दर्शन देंगे जिसमें घटाटोप, उमा-महेश, मन-महेश और शिव तांडव जैसे स्वरूपों में भगवान के दर्शन श्रद्धालुओं को होंगे.
महाशिवरात्रि की तैयारियां
महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा. जहां 2 बजकर 30 बजे से सुबह 4 बजकर 30 बजे तक विशेष भस्मारती संपन्न होगी, इसके पश्चात भगवान महाकाल पर पूरे दिन और रात्रि तक निरंतर जलाभिषेक किया जाएगा. इसी रात्रि में भगवान का मन्त्रोंपचार पूजन किया जाएगा, जो साल में केवल एक बार होता है. महाशिवरात्रि के अगले दिन भगवान महाकाल को पृथक श्रृंगार अर्पित किया जाएगा तथा सेहरा धारण कराया जाएगा. इसके बाद दोपहर 12 बजे वर्ष में एकमात्र दिनकालीन भस्मारती संपन्न होगी, जो शिव नवरात्रि उत्सव की विशेष परंपरा मानी जाती है.
उज्जैन अनुष्ठान भी होंगे
भस्मारती के पश्चात 10 दिनों तक पुजारी परिवार द्वारा विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे, जिनका समापन ब्रह्मभोजन के साथ किया जाएगा. वहीं जिन श्रद्धालुओं को शिव नवरात्रि के दौरान श्रृंगार दर्शन नहीं हो पाते, वे दूज के दिन यानी 18 फरवरी को भगवान महाकाल के विशेष पंचमुखुटा दर्शन का लाभ प्राप्त कर सकेंगे. वैदिक परंपराओं में इस पर्व को शिव प्रकटोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जबकि लोक परंपराओं में यह उत्सव शिववाहक स्वरूप में प्रचलित है. शिव नवरात्रि के दौरान महाकाल नगरी पूरी तरह भक्ति और आस्था के रंग में रंगी नजर आएगी. मंदिर समिति भी आने वाले उत्सव को लेकर तैयारी में जुट गई है मंदिर में सौंदर्यकरण और साफ सफाई का कार्य लगातार जारी है, इसके अलावा अन्य व्यवस्थाओं को भी दुरुस्त किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी तरीके की कोई भी असुविधा न हो.
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