Video: महासमुंद में हाथियों का उत्पात, दहशत में किसान और ग्रामीण

अगर यह दल तितर-बितर होता है, या हाथी अपने झुंड से बिछड़ जाता है तो उसके सामने जो कुछ भी आता है वह उसके गुस्से का शिकार हो जाता है.

Video: महासमुंद में हाथियों का उत्पात, दहशत में किसान और ग्रामीण
प्रतीकात्मक फोटो

महासमुंदः छत्तीसगढ़ के महासमुंद में जंगली हाथियों का उत्पात है कि थमने का नाम ही नहीं ले रहा. आए दिन हाथियों द्वारा कभी घरों को तहस-नहस करने ते कभी इंसानों और पशुओं को नुकसान पहुंचाने की खबरों से पूरी जिला प्रशासन परेशान है. बीते रविवार महासमुंद से कुछ ही दूर स्थित मुरुमदिह गांव में आ धमके और पूरी फसल तहस-नहस कर दी. ग्रामीणों के मुताबिक यह पहली बार नहीं है जब हाथियों ने इस तरह से गांव में घुसकर फसल या घरों पर हमला किया हो. इससे पहले भी हाथी घरों, फसल यहां तक की यहां रहने वाले लोगों को भी नुकसान पहुंचा चुके हैं. वहीं वन विभाग के अफसरों के मुताबिक हाथी अक्सर झुंड में रहना पसंद करते हैं. ऐसे में अगर यह दल तितर-बितर होता है, या हाथी अपने झुंड से बिछड़ जाता है तो उसके सामने जो कुछ भी आता है वह उसके गुस्से का शिकार हो जाता है.

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हाथी रेडियोकॉलर लगाया
बता दें कुछ समय पहले ही जंगल से भटके जंगली हाथियों ने एक महिला को कुचलकर मार दिया था. वन विभाग के मुताबिक, हम कई बार लोगों को हाथियों से सतर्क रहने की समझाइश दे चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी हाथी देखने की चाहत में वह इनका पीछा करने लगते हैं. जिससे कई बार हाथियों को गुस्सा आ जाता है और वह लोगों पर हमला कर देते हैं. वहीं वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक रिहायशी इलाकों में हाथियों की आवाजाही होने के कारण यहां के लोगों ने हाथी रेडियो कॉलर के अलावा सुरक्षा संसाधन की मांग शासन-प्रशासन से की थी. जिसके बाद प्रशासन ने यहां कुछ दिन पहले ही हाथी रेडियोकॉलर लगाया था. 

दिन भर में 15 किमी घूमते हैं हाथी
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक हाथियों को घूमते रहने की आदत होती है. दिन भर में वे करीब 15 किमी के आस-पास घूमते हैं. जिसके चलते वे कभी-कभी घूमते हुए रिहायशी इलाकों में घुस जाते हैं. वहीं महासमुंद में इन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी मिल जाता है जिसके चलते महासमुंद हाथियों के लिए अनुकूल माना जाता है और शायद यही कारण है कि आए दिन हाथी इन इलाकों में घुसते रहते हैं. वहीं हाथियों के लगातार रिहायशी इलाकों में घुसने से ग्रामीण काफी परेशान हैं.