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व्यापमं घोटाला मामला : सीबीआई ने 17 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में दायर की चार्टशीट

इस मामले में बिचौलिए की भूमिका में रहे विशाल यादव और शैलेंद्र आनंद सिंह की पहले ही मौत हो चुकी है इसलिए इनके खिलाफ चालान पेश नहीं किया गया.  

इस घोटाले में सरकारी नौकरियों में भ्रष्टाचार कर रेवडियों की तरह नौकरियां बांटी गई थी.
इस घोटाले में सरकारी नौकरियों में भ्रष्टाचार कर रेवडियों की तरह नौकरियां बांटी गई थी.

भोपाल : मध्य प्रदेश में परीक्षा और भर्ती व्यापमं घोटाला मामले में पीएमटी 2012 के मामले में सीबीआई ने 17 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया. एसटीएफ द्वारा की गई जांच में इस मामले में 11 आरोपी बनाए थे, इसके बाद मामले की जांच में सीबीआई ने 6 आरोपियों की भूमिका पाए जाने पर उनके खिलाफ चालान पेश किया. 

इन दो आरोपियों के खिलाफ दर्ज नहीं हुआ चालान
इस मामले में बिचौलिए की भूमिका में रहे विशाल यादव और शैलेंद्र आनंद सिंह की पहले ही मौत हो चुकी है इसलिए इनके खिलाफ चालान पेश नहीं किया गया.  सीबीआई ने जिन आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया है उनमें विनय कुमार शाक्य, गजेन्द्र सिंह धाकड़, नीलेश गुप्ता, अजमेर सिंह बघेल, विन्ध्यवासिनी कुमार, राम कुमार शाक्य, श्रीराम शाक्य, विनोद शाक्य, नरेश राजपूत, देवी सिंह नरवरिया, वृंदावन लाल, वल्लभ अमृत फुले, सुरजीत सिंह, देवेंद्र यादव, सुशील चंद और नीरज यादव शामिल हैं. मंगलवार को एसीजेएम प्रकाश डामोर की बेंच के सामने चालान पेश करते हुए सीबीआई ने कहा कि इस मामले में यह सभी आरोपी हैं..

क्या है व्यापमं घोटाला
व्यापमं घोटाला मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा घोटाला माना जाता है. इस घोटाले में कई बड़े नाम सामने आए उनमें से कई लोग सलाखों के पीछे पहुंच चुके है. इस घोटाले में मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले में फर्जीवाड़ा कर भर्तियां की गई थी. इस घोटाले में सरकारी नौकरियों में भ्रष्टाचार कर रेवडियों की तरह नौकरियां बांटी गई थी.

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कब पता चला घोटाले के बारे में 
इस घोटाले में सरकारी नौकरी में 1000 फर्जी भर्तियां और मेडिकल कॉलेज में 514 फर्जी भर्तियों का शक है. खुद सीएम शिवराज सिंह ने एक बार विधानसभा में माना था कि इसमें 1000 फर्जी भर्तियां हुई थी. इस घोटाने का खुलासा 2013 में हुआ था. इसका पता तब चला जब   एमबीबीएस की भर्ती परीक्षा में बैठे कुछ फर्जी छात्रों को गिरफ्तार किया, ये छात्र दूसरे छात्रों के नाम पर परीक्षा दे रहे थे. बाद में पता चला कि प्रदेश में सालों से एक बड़ा रैकेट चल रहा है, जो फर्जीवाड़ा कर छात्रों को एमबीबीएस में इसी तरह एडमिशन दिलाता है.

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