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मध्य प्रदेश में 60 से 70 मीटर नीचे पहुंचा जल स्तर, लगातार सूख रहे जल स्त्रोत

ऐसी खतरनाक स्थिति में पहुंच गए हैं कि कभी समाप्त न होने वाले भू-जल के भण्डार सूखने लगे हैं. जल स्तर 60-70 फुट के बजाय 60-70 मीटर नीचे तक पहुंच गया है. जिससे कई क्षेत्रों में पानी का संकट गहराने लगा है."

मध्य प्रदेश में 60 से 70 मीटर नीचे पहुंचा जल स्तर, लगातार सूख रहे जल स्त्रोत
मध्य प्रदेश में कई क्षेत्र सूखे की मार झेल रहे हैं (फाइल फोटो)
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भोपालः मध्य प्रदेश में जल स्त्रोत लगातार सूख रहे हैं, और जल स्तर नीचे गिरता जा रहा है. कभी जल स्तर 60 से 70 फुट पर हुआ करता था, जो अब 60 से 70 मीटर नीचे पहुंच गया है. यह खुलासा राज्य के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सुखदेव पांस ने किया है. राजधानी में मंगलवार को 'पेयजल स्रोतों के स्थायित्व' पर आयोजित कार्यशाला में राज्य के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सुखदेव ने कहा कि, "पृथ्वी पर जीवन को कायम रखने के लिए जल स्रोतों को अक्षुण बनाए रखने की जरूरत है. भूमिगत जल भंडारों की स्थिति निर्धारित करने और भू-जल भंडार बढ़ाने के लिए नए-नए तरीकों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए."

पांसे ने आगे कहा, "पानी जीवन की अनिवार्य आवश्यकता है, या यूं कहें कि अनिवार्य शर्त है. एक तरफ पानी निकालना तो बदस्तूर जारी है, लेकिन भूमि में पानी डालने की न तो चिंता की जा रही है और न ही इसे संरक्षित करने के प्रयास चल रहे हैं और इसी का नतीजा है कि कई क्षेत्र सूखे की मार झेल रहे हैं. आज हम ऐसी खतरनाक स्थिति में पहुंच गए हैं कि कभी समाप्त न होने वाले भू-जल के भंण्डार सूखने लगे हैं. जल स्तर 60-70 फुट के बजाय 60-70 मीटर नीचे तक पहुंच गया है. जिससे कई क्षेत्रों में पानी का संकट गहराने लगा है."

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प्रमुख सचिव संजय शुक्ला ने कहा, "लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, पीरामल फाउंडेशन और अन्य भागीदारों के साथ प्रदेश के सात जिलों में स्वजल योजनाओं को लागू करने के लिए कार्य किया जा रहा है. वहीं पेयजल की चुनौतियों का सामना करने के लिए संरचनाओं को संस्थागत बनाए जाने की आवश्यकता है." 

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बता दें राज्य में कई जगह पानी का संकट लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसके चलते लोगों को कोसों दूर जाकर पानी लाना पड़ रहा है. इसमें भी लोगों को स्वच्छ जल नहीं मिल पा रहा है. कई जगह तो लोग अपनी जान जोखिम में डालकर कई मीटर नीचे उतरकर पानी की आवश्यकता पूरी करना पड़ रहा है.