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डिलिवरी के लिए छुट्टी लेने पर नौकरी से निकाला, महिला ने सिस्टम को ऐसे सिखाया सबक

एक महिला ने बेटी को जन्म दिया. इसके बाद उनसे महज 10 दिन की छुट्टी ली. जब वो वापिस अपने ऑफिस पहुंची तो उन्हें बताया गया कि उनकी नौकरी जा चुकी है.

डिलिवरी के लिए छुट्टी लेने पर नौकरी से निकाला, महिला ने सिस्टम को ऐसे सिखाया सबक
हाईकोर्ट बेंच ने महिला के हक में दिया फैसला (फाइल फोटो- Zee)

नई दिल्ली: एक महिला ने बेटी को जन्म दिया. इसके बाद उन्होंने महज 10 दिन की छुट्टी ली. जब वो वापिस अपने ऑफिस पहुंची तो उन्हें ये कहते हुए उन्हें वापिस लौटा दिया कि उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है, क्योंकि उन्होंने छुट्टी ली थी. महिला ने न्याय मांगने के लिए अधिकारियों से मदद मांगी लेकिन हर जगह से उन्हें सिर्फ और सिर्फ निराशा ही हाथ लगी. आखिरकार महिला ने हाईकोर्ट की शेयर ली, जहां से अब उन्हें न्याय मिला है. लेकिन इसे पाने में उन्हें एक साल का वक्त लग गया. 

खबरों के मुताबिक, मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के सबलगढ़ के झुंडपुरा कस्तूरबा गांधी स्कूल में सुनीता डांडोतिया शिक्षिका के रूप में काम करती थीं. 2016 में उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया. इसके 10 दिन बाद जब वो ड्यूटी पर गईं तो कह दिया गया कि आप छुट्‌टी नहीं ले सकतीं, आपकी नौकरी गई. 

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अपनी बच्ची को गोद में लिए सुनीता अधिकारियों के ऑफिस के चक्कर लगाती रही ताकि उसे उसकी नौकरी वापिस मिल सके. यहां तक कि वो कलेक्टर तक के पास गुहार लेकर गई, जिन्होंने डीपीसी को सिफारिश की कि सुनीता को ज्वाइन कराया जाए, लेकिन उनकी बात भी नहीं मानी गई.

परेशान सुनीता तत्कालीन आयुक्त राज्य शिक्षा केंद्र के पास गईं और उन्हें भी आवेदन दिया. वहां भी सुनवाई नहीं हुई. इसके बाद उन्होंने तय किया कि वो अब सिस्टम से लड़ेंगी और न्याय पा कर रहेंगी. सुनीता मप्र संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष से मिली और उनकी मदद से हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में तीन महीने पहले याचिका दायर की.

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मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने आदेश दिया कि सुनीता को ज्वाइन कराने के साथ ही, उन्हें जिस दिन से नौकरी से हटाया गया था तब से लेकर अब तक का वेतन भी दिया जाए. कोर्ट ने ये भी आदेश दिया कि सभी विभागों की महिला संविदा कर्मचारियों को प्रसूति अवकाश दिया जाए. कोर्ट ने कहा कि प्रदेश के सभी सरकारी विभागों, अर्द्धशासकीय दफ्तरों, निगम-मंडलों में कार्यरत महिला संविदा कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश लेने पर नौकरी से नहीं हटाया जाए.

इस फैसले के आने के बाद सुनीता खुश हैं. उनका कहना है कि उन्हें यकीन था कि कोर्ट से न्याय मिलकर रहेगा. गौरतलब है कि कोर्ट के नए आदेश से प्रदेश की करीब एक लाख संविदा महिला कर्मचारियों को फायदा मिलेगा.