बूंद-बूंद पानी को तरस रहा है एमपी का ये इलाका, ससुराल छोड़ मायके जा रहीं बहुएं

एमपी का बुंदेलखंड इलाका इस बार अजीब सी स्थिति से गुजर रहा है. एक ओर पानी की कमी यहां के लोगों को परेशान किए हुए है, दूसरी और यहां की बहुएं ससुराल छोड़ अपने मायके जा रही हैं.

बूंद-बूंद पानी को तरस रहा है एमपी का ये इलाका, ससुराल छोड़ मायके जा रहीं बहुएं
20 साल में सरकार बदली लेकिन हालात नहीं (फाइल फोटो)

नई दिल्ली (आर.बी.सिंह परमार): मध्य प्रदेश का बुंदेलखंड इलाका इस बार अजीब सी स्थिति से गुजर रहा है. एक ओर पानी की कमी यहां के लोगों को परेशान किए हुए है, दूसरी और यहां की बहुएं ससुराल छोड़ अपने मायके जा रही हैं. इनमें से कुछ महिलाएं तो ऐसी हैं जिन्होंने अपने बच्चे तक यहीं छोड़ दिए हैं, जिस वजह से पति काम पर नहीं जा पा रहे हैं. ऐसे में उनके सामने आर्थिक समस्याएं भी आने लगी हैं. बताया जा रहा है कि इस सब की वजह पानी की भीषण कमी है.

एमपी के टीकमगढ़ में बछौडा गांव सूखे से जूझ रहा है. इस गांव के लोग काम-काज छोड़ पानी लाने के काम में लगे हुए हैं. इसके लिए उन्हें कई किलोमीटर पैदल भी चलना पड़ रहा है. कई ग्रामीण पानी ढोने के लिए बैलगाड़ी, साइकिल व बाइक का सहारा ले रहे हैं.

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बच्चों को भी ससुराल में छोड़ रही महिलाएं
हालात इतने बदतर होते जा रहे हैं कि इस गांव में ब्याह कर आईं महिलाएं अब ससुराल छोड़ वापस मायके जा रही हैं. वे रोज पानी के लिए यूं जूझते हुए परेशान हो गईं हैं. इस रोज की जद्दोजहद ने उन्हें कितना परेशान कर दिया है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे अपने बच्चों तक को छोड़ने को मजबूर हो गई हैं. एक महिला तो अपने दूधमुंहे बच्चे तक को छोड़ गई है. जिसे अब उसकी सास संभाल रही है. महिलाओं का कहना है कि जब तक गांव में पानी की व्यवस्था नहीं हो जाती तब तक वे वापस ससुराल नहीं आएंगी.

बिगड़ रही आर्थिक स्थिति
पत्नी के चले जाने से अब घर के पुरुषों को पानी लाने के काम के साथ ही बच्चों को संभालने व घर के अन्य काम भी करने पड़ रहे हैं. इस कारण वे काम पर नहीं जा पा रहे हैं. सात हजार की आबादी वाले इस गांव के कई पुरुषों के लिए रोज की मजदूरी ही पैसे कमाने का एकमात्र जरिया है. लेकिन घर पर कोई न होने के कारण वे मजदूरी करने भी नहीं जा पा रहे. इस स्थिति के कारण उनकी आर्थिक स्थिति भी बिगड़ती जा रही है.

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सरकारें बदलीं, हालात नहीं
ग्रामीणों के अनुसार, 20 साल पहले शासन द्वारा नलजल योजना शुरू की गई थी. इस योजना से करीब दो साल तक लोगों को पानी की परेशानी नहीं हुई. लेकिन इसके बाद पाइप लाइन टूट गई और तब से ही ये गांव बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है. गांव में कई हैंडपंप भी लगवाए गए जिनमें से सिर्फ दो में ही पानी आ रहा है. ये हैंडपंप भी गांव से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर हैं. बच्चियां भी पढ़ाई छोड़ पानी लाने के काम में ही लगी रहती हैं. इस वजह से वे ठीक से पढ़ भी नहीं पा रही हैं.