12 वर्षीय दिव्यांग अब्दुल कादिर ने स्विमिंग में जीते मेडल, अब लोग कहते हैं 'डॉल्फिन

रतलाम का रहने वाला दिव्यांग अब्दुल कादिर बगैर हाथों की तैराकी में 3 नेशनल कॉम्पिटिशन जीत चुका है. 

12 वर्षीय दिव्यांग अब्दुल कादिर ने स्विमिंग में जीते मेडल, अब लोग कहते हैं 'डॉल्फिन
रतलाम का रहने वाला दिव्यांग अब्दुल कादिर 3 नेशनल पैरा स्विमिंग कॉम्पिटिशन जीत चुका है.

रतलाम: विश्व दिव्यांग दिवस (World Disability Day) पर हम आपको 12 साल के दिव्यांग अब्दुल कादिर के बारे में बताते हैं. जो हर उस व्यक्ति के लिए मिसाल हैं, जो जीवन में जल्दी हार मान लेते हैं. 12 वर्षीय दिव्यांग अब्दुल कादिर बगैर हाथों के न सिर्फ अच्छी स्विमिंग करता है बल्कि सामान्य बच्चों को भी पछाड़ कर रख देता है. अब तक दिव्यांग अब्दुल कादिर कई मेडल अपने नाम कर चुका है.

दिव्यांग अब्दुल कादिर ने अपने हौसले से सामान्य और शरीर से स्वस्थ बच्चों को भी पीछे छोड़ दिया है. रतलाम का रहने वाला दिव्यांग अब्दुल कादिर 3 नेशनल पैरा स्विमिंग कॉम्पिटिशन जीत चुका है. अब्दुल कादिर 2015 में बेलगाम, कर्नाटक में नेशनल मास्टर पैरा स्विमिंग कॉम्पिटिशन में जीत हासिल की थी. वहीं 2016 में जयपुर और 2017 में उदयपुर में नेशनल पैरा स्विमिंग कॉम्पिटिशन में जीत हासिल कर मेडल अपने नाम किया था. अब्दुल स्कूल स्तरीय सम्भागीय तैराकी प्रतियोगिता में सामान्य बच्चों को पीछे छोड़ 2 गोल्ड मेडल व जिला स्तरीय चेतना खेल मेला में सामान्य बच्चों के साथ तैराकी प्रतिस्पर्धा में 3 गोल्ड मेडल जीत चुका है.

पानी में अब्दुल कादिर इतना माहिर हो गया कि वो पानी में ऐसे करतब करता है, मानो कोई पानी का जीव हो. दिव्यांग अब्दुल कादिर को यहां के लोग तैराकी और करतब करते देख, डॉल्फिन के नाम से भी पुकारने लगे हैं. अब्दुल कादिर अपनी उम्र से बड़े तैराकों को भी कड़ी चुनौती देते हैं.

दरअसल, अब्दुल कादिर बचपन से दिव्यांग नहीं है, 2014 में 7 साल की उम्र में एक हादसे के दौरान अब्दुल ने अपने दोनों हाथ खो दिए थे. इसके बाद अब्दुल कुछ दिन तो हताश रहा, लेकिन फिर उसने स्विमिंग को चुना और कुछ महीनों में ही तैराकी में माहिर हो गया. तैराकी काफी कम समय में सीखने से अब्दुल का हौसला और बढ़ गया और अब्दुल ने अपने रोजमर्रा के काम भी हाथों की जगह पैरों से करते हुए महारथ हासिल कर ली. 7वीं कक्षा में पड़ रहा अब्दुल पैरों से राइटिंग करता है. वो भी बड़ी ही सफाई और सुंदरता के साथ.

आज दिव्यांग अब्दुल रतलाम की शान ही नहीं बल्कि हर दिव्यांग की प्रेरणा, हौसला और हिम्मत बन गया है. इतना ही नहीं अब्दुल अब 2024 के ओलंपिक में तैराकी स्पर्धा में जीत कर देश का नाम रोशन करने का लक्ष्य बना चुका है.