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मध्यप्रदेश में OBC आरक्षण अध्यादेश पर रोक का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

आपको बता दें कि कमलनाथ सरकार के ओबीसी को 14 की जगह पर 27 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी.

मध्यप्रदेश में OBC आरक्षण अध्यादेश पर रोक का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
मध्यप्रदेश सरकार ने 8 मार्च को अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण संबंधित एक अध्यादेश जारी किया था. (फाइल फोटो)

नई दिल्लीः मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण अध्यादेश पर रोक का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. अध्यादेश पर हाई कोर्ट के रोक के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मध्यप्रदेश महिला कांग्रेस की महासचिव डॉ. जया ठाकुर ने याचिका दायर की है. याचिका में हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई है. दरअसल, 8 मार्च को कमलनाथ सरकार ने 14 से 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण के लिए अध्यादेश लाई थी. इस अध्यादेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी और हाई कोर्ट ने इस अध्यादेश रोक लगा दी थी. जया ठाकुर ने अपनी याचिका में कहा है कि OBC को 27 फ़ीसदी आरक्षण देने का मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, ऐसे में हाई कोर्ट इस मामले में दखल नहीं दे सकता और हाई कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने अध्यादेश पर रोक लगाने की जो दलील दी है वह न्याय संगत नहीं है.

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आपको बता दें कि कमलनाथ सरकार के ओबीसी को 14 की जगह पर 27 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी. मध्यप्रदेश सरकार ने 8 मार्च को अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण संबंधित एक अध्यादेश जारी किया था. जिसके अनुसार पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित 14 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया है. पिछड़े वर्ग के लिए निर्धारित आरक्षण में बढ़ोतरी को असंवैधानिक बताते हुए याचिकाएं दायर की गई थीं.

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हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि वर्तमान में एससी वर्ग के लिए 16 प्रतिशत तथा एसटी वर्ग के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण है. ओबीसी वर्ग के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण था, जिसे प्रदेश सरकार ने बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया है. इस प्रकार कुल आरक्षण को प्रतिशत 63 प्रतिशत पहुंच जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए उन्होंने हाईकोर्ट को बताया था कि किसी भी स्थिति में कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए. याचिका की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण बढ़ाए जाने के आदेश पर रोक लगाते हुए पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.