महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव: विपक्षी पार्टियों को परेशान कर रहा है यह ट्रेंड

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने शनिवार को विधानसभा चुनावों की घोषणा की. इसके बाद महाराष्ट्र और हरियाणा में इस बहुप्रतीक्षित चुनाव के लिए पूरी तैयारी शुरू हो गई.

महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव: विपक्षी पार्टियों को परेशान कर रहा है यह ट्रेंड
चुनाव आयोग ने शनिवार को विधानसभा चुनावों की घोषणा की...

मुंबई: मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा (Sunil Arora) ने शनिवार को विधानसभा चुनावों की घोषणा की. इसके बाद महाराष्ट्र (Maharashtra Assembly Elections 2019) और हरियाणा (Haryana Assembly Elections 2019) में इस बहुप्रतीक्षित चुनाव के लिए पूरी तैयारी शुरू हो गई. महाराष्ट्र (Maharashtra) के 12 करोड़ लोग 21 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनाव 288 नए प्रतिनिधियों को चुनेंगे. उधर, करीब ढाई करोड़ की आबादी वाले हरियाणा में एक करोड़ 83 लाख मतदाता अपनी पसंद की नई सरकार चुनेंगे. राज्य में कुल 90 विधानसभा सीटें हैं. हरियाणा में करीब एक करोड़ 83 लाख मतदाता हैं. इसके बाद 24 अक्टूबर को चुनाव का परिणाम घोषित किया जाएगा. 

महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ बीजेपी, शिवसेना और उनके सहयोगी दल एक बार फिर राज्य की सत्ता हासिल करने का पूरा प्रयास करेंगे. वहीं, विपक्षी पार्टी कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) इन्हें सत्ता से बाहर करने के लिए पूरा जोर लगाएंगी. दोनों खेमों ने हालांकि अभी भी अपने प्रस्तावित गठबंधन से संबंधित पत्ते नहीं खोले हैं. मगर वह विश्वास जरूर जता रहे हैं कि गठबंधन को अंतिम रूप देकर जल्द ही इसकी घोषणा की जाएगी. उम्मीद है कि दोनों गठबंधन अगले सप्ताह की शुरुआत में इसकी घोषणा कर देंगे. शिवसेना ने भाजपा से 135 सीटों की मांग की है, मगर भाजपा उसे कम सीटों पर मनाने की कोशिश कर रही है. 

उधर, हरियाणा में खट्टर सरकार फिर से सत्ता में आने के लिए जोर लगा रही है. कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल उसका रास्ता रोकने का पूरा प्रयास कर रहे हैं. साल 2014 में 'मोदी लहर' पर सवार होकर बीजेपी ने 47 सीटें जीतकर राज्य में पहली बार अपने दम पर सरकार बनाई थी. कांग्रेस को 15 सीटें मिली थीं. आईएनएलडी को इस चुनाव में 19 सीटें मिली थीं. पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा नुकसान आईएनएलडी को हुआ है. ओपी चौटाला आईएनएलडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. ओपी चौटाला और उनके बड़े बेटे अजय सिंह जूनियन बेसिक ट्रेनिंग टीचर्स भर्ती में घपला करने में 10 साल की जेल की सज़ा काट रहे हैं. पार्टी शक्ति का दूसरा केंद्र ओपी चौटाला के छोटे बेटे अभय सिंह को माना जाता है. अभय चौटाला और उनके भतीजे दुष्यंत के बीच पारिवारिक कलह इन्हीं पांच वर्षों में खुलकर सामने आई. नतीजतन दुष्यंत ने आईएनएलडी से अलग होकर जननायक जनता पार्टी (JJP) बना ली. आईएनएलडी के काफी विधायक बीजेपी का थामन थाम चुके हैं. हरियाणा में विपक्ष पूरी तरह से बिखरा हुआ है. 

 

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पिछले 15 वर्षों से कायम है ट्रेंड
महाराष्ट्र और हरियाणा दोनों राज्यों से जुड़े ट्रेंड विपक्षी दलों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं. ये ट्रेंड पिछले 15 वर्षों से कायम है. 2004 से दोनों राज्यों में विधानसभा वही पार्टी जीती है जो लोकसभा जीती है. 2004, 2009 में यूपीए की सरकार केंद्र में बनी थी, तभी इन दोनों राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनी. 2014 में एनडीए की जीत के बाद समीकरण बदल गए. 2014 के बाद महाराष्ट्र और हरियाणा में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी को सफलता मिली.  2019 के लोकसभा में एनडीए को हरियाणा में 58% और महाराष्ट्र में 52% वोट मिले थे.