महाराष्ट्र: राजनीतिक दलों की नूरा कुश्ती के बीच 'कमल' साबित हुए राज्यपाल कोश्यारी!

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat singh koshyari) ने जिस तरह से काम किया है वह आने वाली पीढ़ी के लिए मिसाल साबित हो सकता है. हेडिंग में राज्यपाल कोश्यारी के लिए 'कमल' शब्द का प्रयोग के पीछे एक मायने हैं. 

महाराष्ट्र: राजनीतिक दलों की नूरा कुश्ती के बीच 'कमल' साबित हुए राज्यपाल कोश्यारी!
महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी मूल रूप से उत्तराखंड के हैं.

नई दिल्ली: हाल के वर्षों में भारतीय राजनीति में विभिन्न राज्यपालों ने ऐसे-ऐसे कदम उठाए हैं, जिसको लेकर उनकी भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं. वहीं महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat singh koshyari) ने जिस तरह से काम किया है वह आने वाली पीढ़ी के लिए मिसाल साबित हो सकता है. हेडिंग में राज्यपाल कोश्यारी के लिए 'कमल' शब्द का प्रयोग के पीछे एक मायने हैं. दरअसल आम बोल चाल में हम कहते हैं कि राजनीति कीचड़ समान होती है. लेकिन साथ ही ये भी कहा जाता है कि कीचड़ में ही कमल खिलता है. इस वक्त महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए सभी प्रमुख दलों के बीच भयंकर नूरा कुश्ती चल रही है. इन सबके बीच राज्यपाल कोश्यारी निष्पक्ष होकर अपनी ड्यूटी को निभा रहे हैं.

महाराष्ट्र के राज्यपाल ने राज्य में सरकार गठन को लेकर खरीद-फरोख्त रोकने के लिए संवैधानिक रास्ता अख्तियार किया है. यह बात संविधान विशेषज्ञों ने कही. 77 वर्षीय राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat singh koshyari) ने शिवसेना को दो दिन का समय देने से इनकार कर दिया. सेना ने सरकार गठन के लिए समर्थन का पत्र सौंपने के लिए दो दिन का समय मांगा था. शिवसेना के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात की और सरकार गठन की इच्छा जाहिर की. हालांकि सेना आवश्यक समर्थन पत्र नहीं सौंप सकी और इसके बदले समय मांगा. राज्यपाल ने एक बयान के जरिए समय देने से इनकार कर दिया.

राज्यपाल ने उसके बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है. इसके पहले राज्यपाल ने सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था. लेकिन भाजपा ने सरकार बनाने से इनकार कर दिया.

लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष कश्यप ने कहा, 'राज्यपाल संविधान का अनुसरण कर रहे हैं. पार्टियों को एक के बाद एक बुलाकर उन्होंने एक संवैधानिक रास्ता चुना है, जिसके जरिए खरीद-फरोख्त को रोका जा सकता है.'

संविधान के अनुसार, राज्य में सरकार बनाने के लिए समयसीमा के मामले में राज्यपाल का निर्णय अंतिम है, खासतौर से महाराष्ट्र में पैदा हुए एक राजनीतिक संकट के परिप्रेक्ष्य में.

कश्यप ने कहा कि यदि राज्यपाल को लगता है कि कोई भी दल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है, तब वह राष्ट्रपति को इस बारे में सूचित कर सकते हैं. कश्यप ने कहा, 'यदि वह चाहें तो राकांपा के बाद कांग्रेस को भी बुला सकते हैं. शिवसेना के मामले में संभवत: उन्हें नहीं लगा कि यह पार्टी सरकार बना पाने में सक्षम है.' लोकसभा के पूर्व सचिव पी.डी.टी. आचारी ने कहा कि समयसीमा के मामले में कोई निर्णय लेने के लिए राज्यपाल के पास पूरा अधिकार है.

आचारी ने महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक संकट पर कहा, 'राज्यपाल की प्राथमिकता राज्य में सरकार बनाने की है. यदि उन्हें लगता है कि कोई संभावना है, तो वह निश्चित रूप से समयसीमा बढ़ा सकते हैं जिससे कोई पार्टी सरकार बना सके. लेकिन यदि उन्हें लगता है कि इसकी कोई संभावना नहीं है तो वह इस बारे में राष्ट्रपति को सूचित कर सकते हैं.'

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