महाराष्ट्र की फिल्म में अभी बाकी है रोमांच, राणे और फडणवीस के बयान से आया ट्विस्ट

शिवसेना लाख कोशिशों के बाद भी तय समयसीमा में कांग्रेस और राष्ट्रवाद कांग्रेस (एनसीपी) का समर्थन हासिल नहीं कर पाई. मंगलवार को कांग्रेस-एनसीपी के प्रेस कांफ्रेंस और शिवसेना के संवाददाता सम्मेलन के बाद बीजेपी के नेता नारायण राणे (Narayan Rane) और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra fadnavis) ने ताजा बयान देकर पूरे खेल में फिर से ट्विस्ट पैदा कर दिया है.

महाराष्ट्र की फिल्म में अभी बाकी है रोमांच, राणे और फडणवीस के बयान से आया ट्विस्ट
महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए बीजेपी और शिवसेना दोनों कोशिश कर रही है.

मुंबई: महाराष्ट्र (Maharashtra) में 18 दिनों की जद्दोजहद के बाद भी कोई भी पार्टी सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो पाई. आखिरकार राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari) ने राष्ट्रपति शासन लगाने की घोषणा कर दी. शिवसेना लाख कोशिशों के बाद भी तय समयसीमा में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का समर्थन हासिल नहीं कर पाई. मंगलवार को कांग्रेस-एनसीपी के प्रेस कांफ्रेंस और शिवसेना के संवाददाता सम्मेलन के बाद बीजेपी के नेता नारायण राणे (Narayan Rane) और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra fadnavis) ने ताजा बयान देकर पूरे खेल में फिर से ट्विस्ट पैदा कर दिया है.

बीजेपी नेता नारायण राणे (Narayan Rane) ने कहा कि बीजेपी अभी भी महाराष्ट्र (Maharashtra) में सरकार बनाने के लिए हर संभव कोशिश में जुटी है. राणे ने राष्ट्रपति शासन को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि बीजेपी की पूरी कोशिश है कि जनादेश का अपमान होने से रोका जा सके. उन्होंने कहा कि कई विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं. अगली बार बीजेपी बहुमत के 145 विधायकों का समर्थन लेकन राज्यपाल के पास जाएंगे.

राणे ने कहा, 'हम 145 सदस्यों के एक सामान्य बहुमत की कोशिश में लगे हुए हैं, हमारा यही लक्ष्य है और हम राज्यपाल को उसे सौंपेंगे. मुझे नहीं लगता कि शिवसेना एनसीपी-कांग्रेस के साथ जाएगी. वे शिवसेना को मोहरा बना रहे हैं.'

नारायण के बयान के तुरंत बाद महाराष्ट्र (Maharashtra) के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी विधायक दल के नेता देवेंद्र फडणवीस (Devendra fadnavis) ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि जनता ने महायुति (महागठबंधन) के पक्ष में स्पष्ट जनादेश दिया था, मगर सरकार न बनने के कारण राष्ट्रपति शासन लगा, जो दुर्भाग्यपूर्ण है. हालांकि, फडणवीस ने राज्य को जल्द स्थिर सरकार मिलने की आशा जताई. 

देवेंद्र फडणवीस (Devendra fadnavis) ने राज्य में राजनीतिक अस्थिरता से होने वाले खतरों की तरफ आगाह किया. उन्होंने कहा कि राजनीतिक अस्थिरता से निवेश पर बुरा असर पड़ सकता है. सरकार के दैनिक कामकाज पर असर पड़ने से जनता को परेशानी हो सकती है. बेमौसम बारिश से परेशान किसानों के सामने संकट और गहरा सकता है. फडणवीस ने यह भी कहा कि उम्मीद है कि राज्य के हालात पर सभी दल विचार करते हुए स्थिर देने की दिशा में आगे बढ़ेंगे.

शिवसेना ने क्या कहा?
शिवसेना बीजेपी को सरकार बनाने से रोकने में सफल हुए रही है, लेकिन खुद भी सरकार नहीं बना पाई है. इसके बाद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मंगलवार शाम को कहा कि उन्हें समर्थन जुटाने के लिए महज 24 घंटे का वक्त मिला. इतने कम समय में अलग-अलग विचारधारा की पार्टियों को एक मंच पर लाना आसान नहीं है. हालांकि उद्धव ने कहा कि अभी भी छह महीने का वक्त है. कांग्रेस और एनसीपी से न्यूतनम साझा कार्यक्रम पर बातचीत होने के बाद ही सरकार बनाएंगे. शिवसेना ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने गठबंधन तोड़ा है. साथ ही ये भी कहा कि 'बीजेपी वाले हर बार अस्पष्ट और अलग-अलग प्रस्ताव दे रहे हैं. लेकिन हमने कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ जाने का निर्णय लिया है.'

इसके थोड़ी ही देर बाद बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे (Narayan Rane) ने उद्धव के बयान की एक तरह से पुष्टि करते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें सरकार गठन के लिए बीजेपी संग गठबंधन को फिर से जिंदा करने पर शिवसेना को समझाने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए लगा रखा है. ठाकरे ने बीजेपी की चुटकी लेते हुए कहा, 'जब से उन्होंने हमें शुभकामनाएं दी हैं, लगता है यह हमें दिशा दिखा रहा है. हम उन्हें निराश नहीं करेंगे.'

कांग्रेस-एनसीपी के साथ वैचारिक मतभेदों के सवाल पर ठाकरे ने बीजेपी द्वारा विपरीत विचारधारा की पार्टियों से किए गए गठबंधन पर सवाल उठा दिया, जिसमें नीतीश कुमार, रामविलास पासवान, चंद्रबाबू नायडू और अन्य शामिल हैं.

पहले हम बात कर लें फिर शिवसेना को बताएंगे: कांग्रेस-एनसीपी
इससे पहले महाराष्ट्र (Maharashtra) में सरकार गठन को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस पार्टी के बीच बातचीत पूरी हो जाने के बाद दोनों पार्टियां बातचीत के लिए शिवसेना से संपर्क करेंगी. दोनों दलों के शीर्ष नेताओं ने मंगलवार को यहां यह बात कही. एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के साथ संयुक्त रूप से एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने कहा कि शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने औपचारिक रूप से पहली बार सोमवार को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से संपर्क किया था.

उन्होंने कहा, 'कई ऐसे मुद्दे हैं, जिनपर चर्चा की जरूरत है. दोनों दलों ने एकमत से तय किया कि पहले हम अपने बीच (कांग्रेस-एनसीपी) चर्चा कर लें, उसके बाद कोई अंतिम निर्णय लेने से पहले एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम और अन्य पहलुओं पर शिवसेना से बातचीत करेंगे.'

पटेल ने यह भी कहा कि जिस तरीके से सरकार ने राष्ट्रपति शासन लागू किया है, वह लोकतंत्र का मजाक है. उन्होंने कहा, 'राज्यपाल ने पहले भाजपा को आमंत्रित किया गया, उसके बाद शिवसेना को बुलाया गया और बाद में एनसीपी को, लेकिन कांग्रेस को उन्होंने सरकार बनाने की संभावना तलाशने के लिए आमंत्रित तक नहीं किया.' पवार ने कहा कि राष्ट्रपति शासन दोनों दलों को चर्चा करने के लिए एक राहत की तरह है.

दोनों दलों के सूत्रों ने अनाधिकारिक रूप से दावा किया कि सरकार बनाने की कोशिश में लगीं पार्टियों के बीच चर्चा और फार्मूला तय हो जाने के बाद बहुत जल्द ही राज्य को कोई अच्छी खबर मिलने वाली है. 

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