समर्थन के लिए नेता हमेशा ठाकरे के घर मातोश्री गए, अब उद्धव सत्‍ता के लिए पवार से मिलने गए

महाराष्‍ट्र की सियासत में ठाकरे परिवार के घर 'मातोश्री' की हमेशा से हनक रही है. विभिन्‍न दलों के नेता हमेशा शिवसेना के समर्थन के लिए इस परिवार के मुखिया से मिलने के लिए मातोश्री जाते रहे हैं.

समर्थन के लिए नेता हमेशा ठाकरे के घर मातोश्री गए, अब उद्धव सत्‍ता के लिए पवार से मिलने गए

मुंबई: महाराष्‍ट्र की सियासत में ठाकरे परिवार के घर 'मातोश्री' की हमेशा से हनक रही है. विभिन्‍न दलों के नेता हमेशा शिवसेना के समर्थन के लिए इस परिवार के मुखिया से मिलने के लिए मातोश्री जाते रहे हैं. लेकिन इस बार विधानसभा चुनाव के बाद महाराष्‍ट्र की सियासत नई करवट ले रही है. बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के बिखरने के साथ ही सत्‍ता के लिए नए साथी तलाशने की चाहत में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को 'मातोश्री' से निकलना पड़ा है. इस सिलसिले में उद्धव आज होटल ताज लैंड्स एंड में एनसीपी नेता शरद पवार से मिलने पहुंचे. दोनों नेताओं के बीच क्या बात हुई अभी इस बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है. हालांकि सूत्रों के मुताबिक मुलाकात में उद्धव ठाकरे ने सरकार बनाने के लिए शरद पवार को साथ आने का न्‍योता दिया है. उद्धव ने कहा कि केंद्र की गलत नीतियों के कारण एक साथ आना जरूरी है.

इससे पहले आज सुबह एनसीपी की बैठक के बाद पार्टी नेता नवाब मलिक ने कहा कि शाम चार बजे कांग्रेस की बैठक के बाद उनका दल अपनी पोजीशन स्‍पष्‍ट करेगा. उन्‍होंने कहा कि एनसीपी और कांग्रेस दोनों ने मिलकर चुनाव लड़ा था. इसलिए कांग्रेस की राय जानने के बाद ही एनसीपी अगले कदम का ऐलान करेगी. इस बीच उद्धव से मुलाकात के बाद शरद और अजित पवार एक बार फिर एनसीपी के वरिष्‍ठ नेताओं के साथ शाम चार बजे मुलाकात करने वाले हैं.

महाराष्‍ट्र: सत्‍ता की धुरी संख्‍या में चौथे नंबर की पार्टी कांग्रेस पर आकर टिकी, शाम 5 बजे फैसला

इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि महाराष्‍ट्र में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के सहयोग से सरकार बनाने की कोशिशें कर रही है. गवर्नर ने भी उनको आज शाम साढ़े सात बजे तक अपनी स्थिति स्‍पष्‍ट करने को कहा है.

अब सारी निगाहें कांग्रेस पर टिकी है. वरिष्‍ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्‍व शाम चार बजे महाराष्‍ट्र इकाई के नेताओं के साथ बैठक करेगा. सूत्रों के मुताबिक उसमें शिवसेना को अंदर या बाहर से समर्थन देने का फैसला लिया जाएगा. वैसे सूत्रों का ये भी कहना है कि कांग्रेस के 44 विधायकों में से ज्‍यादातर शिवसेना के नेतृत्‍व में बनने वाली सरकार में शामिल होने के इच्‍छुक हैं.

अरविंद सावंत ने दिया इस्‍तीफा     
इन सबके बीच शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर शिवसेना से किए 50:50 फॉर्मूले का वादा तोड़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे भाजपा-शिवसेना के गठबंधन के जारी रखने पर सवाल खड़ा हो गया है. केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री ने कहा, "राज्य में नई सरकार और नया गठबंधन बनेगा."

उन्होंने कहा, "हालिया घटनाओं के बाद मंत्री बने रहना ठीक नहीं है, इसीलिए मैंने इस्तीफा देने का फैसला किया है." यह पूछने पर कि क्या शिवसेना भाजपा की अगुआई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से निकल रही है?, उन्होंने कहा, "मेरी कार्रवाई से इसका मतलब कोई भी समझ सकता है."

ये वीडियो भी देखें: