मराठा क्रांति मोर्चा आंदोलन पर झुकी फडणनवीस सरकार, पिछड़ा आयोग को भेजा मामला!

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने विधानसभा में मराठा समाज की मांगों पर कई आश्वासन दिए. फड़नवीस ने मराठा समाज के लिये घोषणाओं के साथ ही उनकी समस्याओं के निराकरण के लिये कैबिनेट की उप समिति बनाने का भी वादा किया. इसके बाद आजाद मैदान में रैली समाप्ति की घोषणा की गई. बुधवार को सुबह 11 बजे से मुंबई के भायखला स्थित जीजामाता उद्यान के सामने से शुरू हुई विशाल रैली में जहां एक अनुमान के मुताबिक पांच लाख से अधिक मराठों ने भाग लिया.

मराठा क्रांति मोर्चा आंदोलन पर झुकी फडणनवीस सरकार, पिछड़ा आयोग को भेजा मामला!
कड़ी सुरक्षा के बीच भगवा झंडों के साथ मराठा पुरुषों और महिलाओं ने नौकरी और शिक्षा में आरक्षण के लिए मार्च किया

मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने विधानसभा में मराठा समाज की मांगों पर कई आश्वासन दिए. फड़नवीस ने मराठा समाज के लिये घोषणाओं के साथ ही उनकी समस्याओं के निराकरण के लिये कैबिनेट की उप समिति बनाने का भी वादा किया. इसके बाद आजाद मैदान में रैली समाप्ति की घोषणा की गई. बुधवार को सुबह 11 बजे से मुंबई के भायखला स्थित जीजामाता उद्यान के सामने से शुरू हुई विशाल रैली में जहां एक अनुमान के मुताबिक पांच लाख से अधिक मराठों ने भाग लिया.

नौकरी में आरक्षण की मांग पर विचार करने के लिए यह मामला सरकार ने बैकवर्ड क्लास कमीशन (पिछड़ा वर्ग आयोग) के पास भेजने की बात कही, जो मराठाओं को आरक्षण देने के आधार और संभावनाओं का अध्ययन करेगा. फडणवीस ने कहा कि वह कमीशन से आग्रह करेंगे कि वह तेजी से प्रक्रिया को पूरा करे और बॉम्बे हाई कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपे.

कड़ी सुरक्षा के बीच भगवा झंडों के साथ मराठा पुरुषों और महिलाओं ने नौकरी और शिक्षा में आरक्षण के लिए मार्च किया. इस मार्च में मराठी बहुल वाले मुंबई के डब्बा वालों ने भी शिरकत की. सड़कों पर लोगों के हुजूम के चलते ही जेजे फ्लाइओवर पट गया, दक्षिण मुंबई में वाहनों के लिये जेजे फ्लाइओवर बंद कर दिया गया.

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साथ ही स्कूलों की भी छुट्टी कर दी गई. वहीं विधानसभा में शिवसेना समेत सभी दलों के मराठा विधायकों ने मिलकर उनकी मांगें जल्द से जल्द पूरी करने का दबाव बनाया. विधानसभा में मुख्यमंत्री फड़नवीस के आश्वासन दिए जाने के बाद छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज सांसद संभाजी राजे भोसले ने आजाद मैदान में राज्य भर से आए लोगों को यह जानकारी दी और शांतिपूर्ण मूक प्रदर्शन समाप्त घोषित किया गया.

मुंबई के मशहूर ‘डब्बावाले’ लोगों में से अधिकांश लोग मराठा समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोग हैं और उन्होंने भी मार्च में हिस्सा लिया. मराठा समाज का यह शांतिपूर्ण आंदोलन ठीक एक साल पहले नौ अगस्त, 2016 को औरंगाबाद में विशाल मूक मोर्चा निकाल कर शुरू हुआ था. आज 58वें मोर्चे के साथ मुंबई में समाप्त हुआ.

इस बीच राज्य के सभी जनपदों में इसी प्रकार के एक या दो विशाल मोर्चे होते रहे हैं. आंदोलन की शुरुआत अहमदनगर जनपद के कोपर्डी गांव में मराठा समाज की एक बालिका से दुष्कर्म के बाद हत्या किए जाने के विरोध में हुई थी.

लेकिन फिर इसके उद्देश्यों में शिक्षा व नौकरियों में आरक्षण की मांग, दलित उत्पीड़न की घटनाओं में मराठों पर लगनेवाले एट्रोसिटी एक्ट में सुधार करने सहित कई और मांगें जुड़ गई थीं.