7/11 मुंबई ट्रेन सीरियल ब्लास्ट: आज हो सकता है दोषियों की सजा का ऐलान

11 जुलाई 2006 को मुंबई लोकल ट्रेनों में हुए सीरियल बम ब्लास्ट मामले में स्पेशल मकोका कोर्ट आज (मंगलवार) सजा पर फैसला सुना सकती है। मामले पर आज फिर कोर्ट में सजा पर बहस होगी। बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के वकील आज हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए सजा पर दलीलें देंगे। सोमवार को भी सजा पर दलीलें हुई और सभी 12 दोषियों ने कोर्ट से मानवीय आधार पर मौत की सजा नहीं सुनाने का अनुरोध किया गया।

7/11 मुंबई ट्रेन सीरियल ब्लास्ट: आज हो सकता है दोषियों की सजा का ऐलान

मुंबई: 11 जुलाई 2006 को मुंबई लोकल ट्रेनों में हुए सीरियल बम ब्लास्ट मामले में स्पेशल मकोका कोर्ट आज (मंगलवार) सजा पर फैसला सुना सकती है। मामले पर आज फिर कोर्ट में सजा पर बहस होगी। बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के वकील आज हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए सजा पर दलीलें देंगे। सोमवार को भी सजा पर दलीलें हुई और सभी 12 दोषियों ने कोर्ट से मानवीय आधार पर मौत की सजा नहीं सुनाने का अनुरोध किया गया।

लोकल ट्रेनों में हुए विस्फोटों में 188 लोगों की मौत हुई थी। एक विशेष अदालत ने पिछले सप्ताह 13 में से 12 आरोपियों को दोषी ठहराया था जबकि एक अन्य आरोपी को इस मामले में बरी कर दिया था। विशेष मकोका अदालत द्वारा 11 सितंबर को दोषी ठहराये गये सभी 12 दोषियों द्वारा लिखित बयान में कहा गया कि गंभीरता कम करने की ऐसी परिस्थितियां हैं जो बताती हैं कि उनमें सुधार हुआ है और इसलिए उन पर नरमी बरती जानी चाहिए। न्यायाधीश यतिन डी शिंदे ने हर दोषी को अपने सामने बुलाया और उन्हें सजा पर उनका मौखिक बयान दर्ज किया।

न्यायाधीश के सामने पेश पहले दोषी कमाल अंसारी ने उसे न्यूनतम सजा दिये जाने का अनुरोध किया। अंसारी ने अदालत से कहा, मेरे छोटे बच्चे हैं। एक अन्य दोषी डाक्टर तनवीर अहमद ने कहा कि उसने गरीबों की मदद के लिए यह पेशा चुना था और वह जरुरतमंदों की सेवा करना चाहता था। उसने कहा कि उसने चैरिटेबल अस्पताल में काम किया। तनवीर ने अदालत से कहा, मेरा कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और मैंने (विचाराधीन कैदी के रूप में) अच्छा व्यवहार किया है। मैंने आपदा प्रबंधन में परास्नातक की पढाई की और अपना शैक्षणिक रिकॉर्ड सुधारा। उसने कम से कम सजा की प्रार्थना की।

एक अन्य दोषी मोहम्मद फैसल शेख ने भी कम सजा की प्रार्थना करते हुए कहा कि वह बीते तीन साल से ब्रेन ट्यूमर से ग्रस्त है। उसने कहा, जेल में मुझे ब्रेन ट्यूमर हो गया। मुझे रीढ़ की हड्डी संबंधी बीमारियां भी हैं। उसने कहा कि इससे पहले किसी अदालत ने उसे दोषी नहीं ठहराया और उसकी भविष्य में कोई अपराध करने की मंशा नहीं है। शेख ने कहा कि उसके माता पिता बुजुर्ग हैं और उनका ख्याल रखने वाला कोई नहीं है। उसने कहा, इसी मामले में मेरे भाई को भी दोषी ठहराया गया है।

एक अन्य दोषी एहतेशाम सिद्दीकी ने अदालत से कहा कि वह गरीब परिवार से आता है और गिरफ्तारी से पहले छोटा कारोबार चला रहा था। सिद्दीकी ने कहा, मैं पढाई नहीं कर सका क्योंकि हम गरीब थे और बड़ी मुश्किल से मैं थोड़ा बहुत सीख सका। मेरा भाई परिवार चलाता है और वह वित्तीय रूप से मजबूत नहीं है। उसने कहा कि जेल जाने के बाद उसे शिक्षा मिली और फिलहाल वह विधि में स्नातक कर रहा है। उसने भी न्यूनतम सजा का अनुरोध किया।

गौरतलब है कि नौ साल पहले 11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेन में सिलसिलेवार धमाके हुए थे, जिसमें 188 लोगों की मौत हुई थी और 800 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। यह धमाके प्रेशर कुकर बम से कराए गए थे। पहला धमाका दोपहर 4.35 के आसपास हुआ था, थोड़ी ही देर में माटुंगा, बांद्रा, खार, जोगेश्वरी, बोरीवली तथा भायंदर के पास उपनगरीय ट्रेनों में धमाके हुए। इन धमाकों में 188 लोगों की मौत हुई थी और 824 घायल हुए थे।

पुलिस के मुताबिक मार्च 2006 में लश्कर-ए-तैयबा के आजम चीमा ने अपने बहावलपुर स्थित घर में सिमी और लश्कर के दो गुटों के मुखियाओं के साथ इन धमाकों की साजिश रची थी। पुलिस के मुताबिक मई 2006 में बहावलपुर के ट्रेनिंग कैंप में 50 युवकों को भेजा गया। उन्हें बम बनाने और बंदूकें चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही कड़ी पूछताछ के दौरान अपनाए जाने वाले हथकंडों से निपटने का प्रशिक्षण दिया गया।