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गंभीर रूप से बीमार नवजात की देखभाल की जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए :उच्च न्यायालय

 बंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार को एक दिन के उस नवजात की देखभाल करनी होगी जो गंभीर रूप से बीमार है.

गंभीर रूप से बीमार नवजात की देखभाल की जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए :उच्च न्यायालय
नवजात बीमार है और उसके माता-पिता ने उसे पालने में असमर्थता जताई है.

मुंबई: बंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार को एक दिन के उस नवजात की देखभाल करनी होगी जो गंभीर रूप से बीमार है और जिसके माता-पिता ने उसे पालने में असमर्थता जताई है. पहले उन्होंने गर्भपात की इजाजत मांगी थी.

दंपति ने अपनी याचिका में कहा कि वे दिहाड़ी मजदूर हैं और इसलिए बच्चे का पालन करने में आर्थिक रूप से अक्षम हैं. हालांकि, जब तक उन्हें पता नहीं था कि भ्रूण में मस्तिष्क संबंधी विसंगतियां हैं, वे उसे पालना चाहते थे.

 

न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति एन जे जामदार की अवकाशकालीन पीठ पिछले सप्ताह 29 साल की एक महिला और उसके लिव-इन साथी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी. उन्होंने महिला के 28 सप्ताह के गर्भ को गिराने की अनुमति मांगी थी क्योंकि उन्हें भ्रूण में मस्तिष्क संबंधी विसंगतियां होने का पता चला था.

अदालत ने पिछले सप्ताह सरकारी जे जे अस्पताल के विशेषज्ञों को निर्देश दिया था कि महिला की जांच की जाए और रिपोर्ट दी जाए. हालांकि, सोमवार को सुनवाई के दौरान दंपति के वकील प्रोस्पर डिसूजा ने पीठ को बताया कि महिला को रविवार को यहां सरकार सायन अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसने बच्चे को जन्म दिया.

डिसूजा ने अदालत को बताया कि बच्चे की हालत गंभीर है और उसे अस्पताल की नवजात देखभाल इकाई में भर्ती कराया गया है. न्यायाधीशों ने कहा कि उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ के पिछले फैसले में कहा गया था कि जिन मामलों में गर्भपात के प्रयासों के बावजूद बच्चा जीवित जन्म लेता है और गंभीर बीमार है तो डॉक्टर और संबंधित अस्पताल बच्चे को सर्वश्रेष्ठ उपचार मुहैया कराने की पूरी जिम्मेदारी लेंगे.पीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई के लिए छह जून की तारीख तय की है.