द्वीप हो या समंदर, दुश्मनों को बर्बाद करने की ताकत रखती है भारतीय नौसेना का यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल

देश के रक्षा कवच तंत्र में एक और कड़ी तब जुड़ गई जब भारतीय नौसेना के एक पोत से शुक्रवार को पहली बार जमीन पर मार करने वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया. इसके साथ ही भारतीय नौसेना के युद्धपोत की सामरिक ताकत काफी ज्यादा बढ़ गई है. अब वह अपने लक्ष्य को किसी द्वीप या फिर समंदर से दूर कहीं भी हो उसको बर्बाद कर सकता है. यह एक ऐसा सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जो पाकिस्तान क्या, चीन की भी बोलती बंद कर देगा.

द्वीप हो या समंदर, दुश्मनों को बर्बाद करने की ताकत रखती है भारतीय नौसेना का यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल
यह है भारतीय नौसेना का ब्रह्मास्त्र ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल जिसका शुक्रवार को सफल परीक्षण किया गया.

नई दिल्ली : देश के रक्षा कवच तंत्र में एक और कड़ी तब जुड़ गई जब भारतीय नौसेना के एक पोत से शुक्रवार को पहली बार जमीन पर मार करने वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया. इसके साथ ही भारतीय नौसेना के युद्धपोत की सामरिक ताकत काफी ज्यादा बढ़ गई है. अब वह अपने लक्ष्य को किसी द्वीप या फिर समंदर से दूर कहीं भी हो उसको बर्बाद कर सकता है. यह एक ऐसा सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जो पाकिस्तान क्या, चीन की भी बोलती बंद कर देगा.

नौसेना के आईएनएस तेग से जमीन पर मार करने वाली ब्रह्मोस का सफल परीक्षण किया गया. नौसेना के अंग्रिम पंक्ति के युद्धपोत आईएनएस कोलकाता, रणवीर और तेग क्लास के युद्धपोत इस मिसाइल से पहले ही लैस हैं. भारतीय नौसेना ने अभी तक ब्रह्मोस के पोत रोधी संस्करण का ही परीक्षण किया था.  इस परीक्षण से भारत इस क्षमता वाले कुछ चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिसके पास ऐसी क्षमता है. 

भारतीय सेना में 2007 से ब्रह्मोस की जमीन पर मार करने वाली मिसाइल शामिल है. ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता 290 किलोमीटर है. इस मिसाइल का का कोई तोड़ नहीं है. भारत के पास जो ब्रह्मोस मौजूद है वह सुपरसोनिक है यानी इसकी स्पीड करीब एक किलोमीटर प्रति सेकेंड है. ये एक ऐसी मिसाइल है जो पनडुब्बी, युद्धपोत, लड़ाकू विमान आदि से दागा जा सकता है.

भारत और रूस ने इसे संयुक्त रूप से मिलकर तैयार किया है. इसे विश्व की एकमात्र ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल माना जाता है जिसका निशाना अचूक है. अब दोनों देश मिलकर इसकी रेंज के साथ-साथ स्पीड बढ़ाने पर काम कर रहे हैं. जब इसकी गति बढ़ जाएगी तब यह और भी घातक हो जाएगा. रक्षा मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति के जरिये ये जानकारी दी. 

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