उग्र हुआ मराठा आरक्षण आंदोलन, महाराष्ट्र बंद का ऐलान, औरंगाबाद में इंटरनेट सेवा ठप

आरक्षण की मांग को लेकर मराठा क्रांति समाज ने बुधवार को मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र बंद का ऐलान किया है. बंद को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं.

उग्र हुआ मराठा आरक्षण आंदोलन, महाराष्ट्र बंद का ऐलान, औरंगाबाद में इंटरनेट सेवा ठप
औरंगाबाद में आंदोनकारियों ने सरकारी गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया है

मुंबई (दीपक भातुसे) : मराठा समुदाय को आरक्षण की मांग को लेकर उठा आंदोलन लगातार फैल रहा है. महाराष्ट्र के कई इलाकों में यह आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा. सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने औरंगाबाद की इंटरनेट सेवाओं को अस्थाई तौर पर बंद कर दिया है. प्रदर्शनकारियों ने कई स्थानों पर तोड़फोड़ की और सरकारी वाहनों में आग लगा दी. आंदोलनकारियों ने बुधवार को महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया है. सोमवार को औरंगाबाद और पुणे में आंदोलनकारियों ने कई स्थानों पर धरने-प्रदर्शन किए. इतना ही नहीं आरक्षण की मांग पर नदी में कूद कर आत्महत्या करने वाले काकासाहेब शिंदे को शहीद का दर्जा देने की भी मांग तेज हो गई है.

मराठा क्रांति समाज ने कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती हैं, उनका आंदोलन जारी रहेगा. काकासाहेब शिंदे का मंगलवार को अंतिम संस्कार किया गया. अंतिम संस्कार में मराठा समुदाय के लोगों के अलावा कई राजनेता भी शामिल हुए. हालांकि मराठा समाज के लोगों ने अंतिम संस्कार में नेताओं के आने पर आपत्ति उठाई और उनका विरोध किया. उधर, शिवसेना ने मराठा आरक्षण का समर्थन किया है.

बता दें कि महाराष्ट्र के मराठा समुदाय ने सरकारी नौकरियों तथा अन्य संस्थाओं में आरक्षण की मांग करते हुए आंदोलन शुरू किया है. इसी के क्रम में मराठा क्रांति समाज ने बुधवार को मुंबई बंद रखने का ऐलान किया है. समाज ने कहा कि बंद के दौरान स्कूल-कॉलेज तथा जरूरी सेवाओं को छोड़कर पूरी मुंबई बंद रहेगी. आंदोलनकारियों के मुताबिक, मुंबई, नवी मुंबई, रायगढ़, थाणे और पालघर में बंद के दौरान धरने-प्रदर्शन किए जाएंगे. 

मराठा क्रांति समाज के संयोजक वीरेंद्र पवार ने कहा कि सरकार की भूमिका वजह सें आंदोलन की नौबत आई है. उन्होंने कहा कि सरकार ने उनके समाज की हमेशा अनदेखी की है. हालांकि पवार ने कहा कि उनका यह आंदोलन शांतिपूर्वक रहेगा, उनका समाज किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करता है.  

शिवसेना का समर्थन
उधर, महाराष्ट्र के मंत्री तथा शिवसेना नेता सुभाष देसाई ने मराठा आरक्षण के मुद्दे पर कहा कि शिवसेना मराठा आरक्षण का समर्थन करती है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने इस मुद्दे को हल करने के लिए आरक्षण का वादा किया था, उन्हें आगे आना चाहिए. सुभाष देसाई ने कहा कि मराठा आरक्षण में देरी हुई है. यह काफी पहले ही लागू हो जाना चाहिए था. उन्होंने कहा कि कोर्ट इस पर प्रतिक्रिया कैसे करेगा, उसे ध्यान में रखा जाना चाहिए.

Maratha

प्रशासन चौकस
मराठा समाज के बंद को देखते हुए प्रशासन चौकस हो गया है. हालांकि लोकल ट्रेन सामान्य दिनों की तरह चलेंगी, बस सेवा कुछ हद तक प्रभावित हो सकती है. आंदोलन के चलते ट्रैफिक जाम हो सकता है. बंद के कारण मंडी में कारोबार भी ठप रहेगा. महाराष्ट्र सरकार ने आंदोलन को देखते हुए पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं. मुंबई में करीब 35 हजार पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे. कानून व्यवस्था ना बिगडे इसलिए एसआरपीएफ को भी तैनात किया गया है.

मराठा आंदोलन के दौरान नदी में कूद कर युवक ने की खुदकुशी, आंदोलन के भड़कने की आशंका

युवक ने नदी में कूद कर दी जान
बता दें कि सोमवार को मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान औरंगाबाद जिले में एक युवक ने गोदावरी नदी में कुद कर खुदकुशी कर ली थी. औरंगाबाद के गंगापुर में मराठा समाज के लोग आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे, उस वक्त काकासाहेब शिंदे (29 वर्ष) नामक युवक गोदावरी नदी में कूद गया. वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे बाहर निकाला और अस्पताल में भर्ती कराया गया. लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. युवक की मौत पर आंदोलनकारी और ज्यादा भड़क गए. उन्होंने मृतक को शहीद का दर्जा देने की मांग करते हुए मृतक के परिजनों को 50 लाख की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की.

पिछले साल किया था बड़ा मार्च
बता दें कि पिछले साल 9 अगस्त को मराठा समाज के लाखों लोगों ने महाराष्ट्र की सड़कों पर उतर कर एक बड़ा मार्च निकाला था. यह मार्च औरंगाबाद से शुरू होकर मुंबई में समाप्त हुआ था. इस मार्च की चारों और चर्चा हुई थी, क्योंकि लाखों लोग एकसाथ सड़कों पर उतरे और शांतिपूर्वक मार्च निकाला. यह मार्च अपनेआप में ऐतिहासिक मार्च था. यह मराठा समुदाय का 58वां मार्च था. मुंबई के भायखला स्थित जीजामाता उद्यान के सामने से शुरू हुई विशाल रैली में लगभग पांच लाख से अधिक मराठों ने भाग लिया. उस समय सूबे के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने मराठा समाज की मांगों पर कई आश्वासन दिए. मुख्यमंत्री ने मराठा समाज के लिए घोषणाओं के साथ ही उनकी समस्याओं के निराकरण के लिये कैबिनेट की उप समिति बनाने का भी वादा किया था.