जम्मू कश्मीर में आतंक की फसल बोने आ रहा है एक और ओसामा, स्वागत को तैयार है सेना की बंदूकें

ओसामा को मसूद का उत्तराधिकारी माना जाता है. उसने वर्ष 2018 में अफ़ग़ानिस्तान में इस्लामी आतंकवादियों को प्रशिक्षित किया और नए जिहादियों को भर्ती करने में उसकी बड़ी भूमिका रहती है.

जम्मू कश्मीर में आतंक की फसल बोने आ रहा है एक और ओसामा, स्वागत को तैयार है सेना की बंदूकें
जम्मू कश्मीर को अशांत करने के लिए आतंकियों ने ओसामा यूसुफ को भेजा है. प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) में आतंकवाद (Terrorism) की आग भड़काने की कोशिश के लिए पाकिस्तान अब मौलाना मसूद अज़हर (Masood Azhar) के एक रिश्तेदार ओसामा युसुफ (Osama Yusuf) को भेजने की तैयारी कर रहा है. खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ओसामा को LoC के नज़दीक आतंकवादियों (Terrorism) सियालकोट के आसपास के लांच पैड पर कई बार देखा गया है. पाकिस्तानी सेना उसको LoC पार कराने से पहले कई बार टोह लेकर देख चुकी है कि भारतीय सुरक्षा बलों की चौकसी का स्तर क्या है? पाकिस्तानी सेना उसे पूरी तौर सुरक्षित तरीक़े से सीमा पार कराने के लिए पूरी सतर्कता बरत रही है.

ओसामा को मसूद का उत्तराधिकारी माना जाता है. उसने वर्ष 2018 में अफ़ग़ानिस्तान में इस्लामी आतंकवादियों को प्रशिक्षित किया और नए जिहादियों को भर्ती करने में उसकी बड़ी भूमिका रहती है. इससे पहले उसे मानसेरा ज़िले के बालाकोट में जैशे मोहम्मद के आतंकवादियों के ट्रेनिंग कैम्प का इंचार्ज बनाया गया था. ये वही कैम्प है जिसे भारतीय वायुसेना ने फ़रवरी में बमबारी करके तबाह कर दिया था. 

बालाकोट के बाद ओसामा को बहावलपुर में जैश के मुख्य सेंटर की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी. ओसामा न केवल मसूद अज़हर का बेहद भरोसेमंद है, आतंकवादियों को मॉटिवेट करने में भी उसकी बड़ी भूमिका रहती है.

जैशे मोहम्मद पिछले दशक में कश्मीर में सबसे ताकतवर आतंकवादियों गिरोह था. लेकिन पहले मुख्य सरगना गाज़ी बाबा और उसके बाद बाकी मुख्य आतंकवादियों के मारे जाने के बाद ये गिरोह घाटी से लगभग गायब हो गया. इसकी जगह मुख्यरूप से सैयद सलाहुद्दीन के गिरोह हिज़्बुल मुजाहिदीन ने ले ली, जिसमें स्थानीय आतंकवादियों की तादाद ज्यादा थी. 

पिछले कुछ सालों में भारतीय सुरक्षा बलों की कार्रवाई में हिजबुल के आतंकवादियों का लगभग सफाया हो गया. अब पाकिस्तान घाटी में आतंकवाद (Terrorism) फैलाने के लिए मुख्यरूप से पाकिस्तानी आतंकवादियों से बनाए गए जैश पर ही भरोसा कर रहा है. धारा 370 हटने के बाद आतंवादियों का मनोबल टूटा हुआ है इसलिए पाकिस्तान अपने बड़े मोहरे को घाटी में भेज रहा है.

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