भारत के ये 'बाहुबली' जी रहे हैं 'जय जवान जय किसान' का नारा

आज पूरे देश में एक ही नाम गूंज रहा है- बाहुबली... बाहुबली... बाहुबली..., लेकिन फिल्म के इस बाहुबली से इतर भारत के कुछ असली 'बाहुबली' भी हैं. फिल्म के बाहुलबी को तो सब जानते ही हैं, लेकिन इन बाहुबलियों ने देश के लिए अपना सच्चा समर्पण दिखाया है. 

भारत के ये 'बाहुबली' जी रहे हैं 'जय जवान जय किसान' का नारा
ये सितारे देश की मदद के लिए हमेशा रहते हैं तैयार

नई दिल्ली : आज पूरे देश में एक ही नाम गूंज रहा है- बाहुबली... बाहुबली... बाहुबली..., लेकिन फिल्म के इस बाहुबली से इतर भारत के कुछ असली 'बाहुबली' भी हैं. फिल्म के बाहुलबी को तो सब जानते ही हैं, लेकिन इन बाहुबलियों ने देश के लिए अपना सच्चा समर्पण दिखाया है. 

क्रिकेटर गौतम गंभीर 

हाल ही छत्तीसगढ़ के सुकमा में शहीद हुए जवानों के लिए जहां एक ओर अभिनेता अक्षय कुमार ने अपने सोशल साइट के जरिए लोगों से जवानों के परिजनों की मदद करने की अपील की है तो वहीं दूसरी ओर भारतीय क्रिकेटर गौतम गंभीर भी इस काम में आगे आए हैं. क्रिकेट खिलाड़ी गौतम गंभीर सुकमा में नक्सली हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों के परिवारों की मदद के लिए आगे आए हैं. उन्होंने शहीद 25 जवानों के बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने का ऐलान किया है. वह गौतम गंभीर फाउंडेशन के जरिए यह मदद देंगे और इसके लिए जरूरी कदम उठाए जा चुके हैं.

अक्षय कुमार 

बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने भी देश के लोगों से सुकमा नक्सली हमले में शहीद जवानों के परिवारों की मदद करने की अपील की है. राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अक्षय ने एक ऑडियो मेसेज में कहा, 'हाल ही में हुए सुकमा हमले में सीआरपीएफ के हमारे बहादुर जवानों ने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए. मेरा आप सबसे हाथ जोड़कर अनुरोध है कि अगर आप इन शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजिल अर्पित करना चाहते हैं तो भारत सरकार की वेबसाइट bharatkeveer.gov.in पर जाकर अपना योगदान दीजिए ताकि शहीदों के परिवारों को महसूस हो सके कि इस दुख की घड़ी में पूरा देश उनके साथ खड़ा है. वे अकेले नहीं हैं.'

गौरतलब है कि 11 मार्च को सुकमा में हुए नक्सली हमले के बाद बालीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने भी 12 सीआरपीएफ जवानों के परिवारों के लिए 1.08 करोड़ रुपए दान में दिए थे. अक्षय कुमार के इस कदम की सभी ने जमकर तारीफ की थी. 

दरअसल, अक्षय ने शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों के परिवारों को 9-9 लाख रुपए की आर्थिक मदद की है. अक्षय ने प्रत्येक परिवार को 9 लाख रुपए दिए हैं. यानि अक्षय ने शहीद के परिवारों की कुल मिलाकर 1.8 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद की है. 

अक्षय कुमार इसके अलावा देश के किसानों की मदद क अलावा स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए भी काम करते है. 2015 में बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार ने भी महाराष्ट्र में आत्महत्या कर चुके किसानों के परिवारों की मदद की थी. अक्षय ने 180 किसान परिवारों को 50-50 हजार रुपए की मदद की थी.

नाना पाटेकर 

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा से लेकर विदर्भ तक के किसानों पर सूखे ने जो कहर ढाहा था, वह किसी से छुपा नहीं है. किसानों की खुदकुशी देख बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर से रहा नहीं गया और वे किसानों की मदद के लिए आगे आए. नाना ने महाराष्ट्र के अलग अलग इलाकों में जाकर किसानों की करीब 300 विधवाओं की आर्थिक मदद की थी और मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर उन्होंने किसान परिवारों के लिए 'नाम' नामक संस्था भी शुरु की.

नाना पाटेकर एक ऐसे एक्टर है जो अपनी आय का 70 प्रतिशत किसानों की विधवाओं को दान दे देते है. हालांकि ये अलग बात है कि वे इस बात का प्रचार नहीं करते है. मराठवाड़ा में उनके किए गए कार्यों को सभी जानते है. नाना वाकई में एक सच्चे इंसान है जो अपनी जड़ो को नहीं भूले है.

कारगिल युद्ध के दौरान सैनिकों का हौंसला बढ़ाते थे नाना नाना पाटेकर सेना और सैनिकों के लिए कितना सम्मान करते हैं, ये 1999 में भी दिखा था . कारगिल में जब हमारे सैनिक दिन-रात लड़ रहे थे, तो नाना की आंखों से भी नींद गायब थी. नाना पाटेकर ने कागरिल की जंग के दौरान हौंसला बढ़ाने के लिए बहुत सारा वक्त सैनिकों के साथ गुजारा था. वो एक पोस्ट से दूसरी पोस्ट पर घूमते हुए सैनिकों से मिलते और लड़ रहे सैनिकों से बातचीत करते थे. कारगिल युद्ध के दौरान नाना पाटेकर ने कहा था कि हमारी असली ताकत तोप और एके 47 नहीं हमारे जवान हैं. उन दिनों नाना ने लंबा वक्त सैनिकों के साथ गुजारा.

साइना नेहवाल 

बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार के बाद अब ओलंपिक में मेडल जीतने वाली साइना नेहवाल सुकमा नक्सली हमले में शहीद जवानों के परिवारों की मदद के लिए आगे आई थीं. साइना ने छह लाख रुपए (प्रत्येक को 50,000 रुपए) केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के उन 12 जवानों के परिवारों को दान देने का फैसला किया था, जो पिछले 11 मार्च 2017 को छत्तीसगढ़ में हुई मुठभेड़ में मारे गए थे.

अजिंक्य रहाणे

2015 में क्रिकेटर अंजिक्य रहाणे भी किसानों की मदद के लिए आगे आए थे. टीम इंडिया के खिलाड़ी अजिंक्य रहाणे ने भी 5 लाख रुपए किसानों के लिए दान किए थे. रहाणे ने मुख्यमंत्री राहत कोष में यह राशि जमा करवाई थी.

सलमान खान 

सलमान और विवादों का रिश्ता बहुत पुराना है. अक्सर अपने विवादों के कारण सुर्खियों में रहने वाले सलमान खान गरीब बच्चों की सहायता करते हैं. सलमान की संस्था बीइंग ह्यूमन गरीब और बेसहरा बच्चों के इलाज और पढ़ाई में मदद करती है.

दिया मिर्जा 

दिया मिर्जा को सिर्फ उनकी खूबसूरती की वजह से ही नही बल्कि उनके किये गए सामाजिक कार्यों की वजह से भी लोग जानते है. दिया कैंसर, एड्स, पेटा, क्राय आदि कैंपेन से भी जुड़ी है. इसके अलावा उन्होंने दो चीतों को भी अडॉप्ट किया हुआ है. एचआईवी को ले कर भारतीय जन के बीच जागरूकता फैलाने में मिर्ज़ा ने अपना सराहनीय योगदान देने के अलावा भ्रूण हत्या पर भी सचेतता फैलाना का सरोकार किया है.  दिया कैंसर के मरीज़ों के साथ भी समय बिताती हैं.

सचिन तेंदुलकर 

खामोश और संजीदा मिजाज सचिन तेंदुलकर अपने समाजसेवा के कामों को भी बेहद खामोशी से करते हैं. वे अपनी सास के अपनालय एनजीओ के साथ जुड़ कर करीब 200 जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई-लिखाई व पालन-पोषण का खर्च उठाते हैं. वे और भी कई समाजसेवा कार्यों से जुड़े हुए हैं.

युवराज सिंह 

कैंसर सरवाइवर क्रिकेटर युवराज सिंह अब कैंसर के प्रति लोगों को जागरुक करने और शुरूआत में उसे काबू करने तरीकों को लोगों तक पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं. वे इस काम के लिए 'यूवीकैन' नाम की संस्‍था भी चलाते हैं.

लक्ष्मी

दिल्ली की लक्ष्मी एसिड अटैक की शिकार महिलाओं के हक की लड़ाई लड़नेवाला जाना-माना चेहरा हैं. एक मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मी लक्ष्मी संगीत की दुनिया में गायक के तौर पर मुकाम बनाना चाहती थी.

एक दिन स्कूल जाते वक्त किसी ने एसिड से हमला किया और लक्ष्मी का 45 फ़ीसदी चेहरा जल गया. कई जटिल ऑपरेशन करवाने के बाद जब लक्ष्मी लौटीं तो संस्था ‘स्टॉप एसिड अटैक्स’ के साथ जुड़ गईं.

साल 2006 में लक्ष्मी ने एक जनहित याचिका की जिस पर 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुनाते हुए भारत में एसिड की खुली बिक्री पर रोक लगाने और पीड़िताओं के मुफ़्त इलाज़ का आदेश दिया. लक्ष्मी अब एक बच्ची की मां हैं और एसिड अटैक सरवाइर्स के लिए काम करती हैं. 

राहुल बोस

राहुल बोस अंडमान व निकोबार द्वीप पर जनजातियों को विस्थापित होने से बचाने के लिए लगातार अपनी मदद मुहैया करवाते रहे हैं. इसके अलावा वातावरण के प्रति गांव-गांव जा कर जागरूकता भी फैलाते हैं.

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