आपको जानकर खुशी होगी कि जो लंबा तना डंठल बेकार समझा जाता था, पशुओं को काटकर चारा खिला देते थे वो अब 'स्वीट' हो गया है. हां उससे एक कमाल की चीज बनाने का दावा किया गया है. पढ़िए पूरी जानकारी.
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अगर आपका कनेक्शन गांव से है तो शायद कभी मौका मिला हो और आपने ज्वार या मक्के का डंठल काटकर पशुओं के लिए चारा तैयार किया हो. कुछ इसे बेकार समझकर नष्ट होने के लिए छोड़ देते हैं लेकिन अब यही ज्वार का डंठल नई कहानी लिख रहा है. यह अब गन्ने का 'अन्ना' बन चुका है. हां, जैसे गन्ने से चीनी और गुड़ बनता है. उसी तरह अब भारत के एक किसान ने ज्वार के ठंडल से गुड़ बनाने का दावा किया है. यहां यह भी जान लीजिए कि तेलुगु और कुछ अन्य भाषाओं में भाई को अन्ना कहकर संबोधित करते हैं.
यह कमाल करने वाले किसान कर्नाटक के महालिंगप्पा हैं. बागलकोट के रहने वाले किसान महालिंगप्पा इटनाल ने मीठे ज्वार के डंठलों से सफलतापूर्वक गुड़ तैयार करने में कामयाबी हासिल की है. यह एक ऐसा इनोवेशन है जो ग्रामीण क्षेत्रों में क्रांति ला सकता है.
आमतौर पर गुड़ और चीनी, गन्ने से बनाए जाते हैं लेकिन अब बागलकोट जिले के प्रगतिशील किसान महालिंगप्पा ने जो किया है उसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है. तमाम कृषि एक्सपर्ट उनकी तरकीब पर गौर कर रहे हैं.
आमतौर पर ज्वार के डंठलों का उपयोग मवेशियों के चारे के रूप में किया जाता है या बाजार में कच्चा बेचा जाता है, जिससे किसानों को बहुत कम फायदा होता है लेकिन महालिंगप्पा ने ज्वार के डंठलों में छिपी चीनी की मात्रा में नई संभावना खोजी. गन्ने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पारंपरिक गुड़ बनाने की प्रक्रिया अपनाई और डंठलों से मीठा स्वाद तैयार कर लिया.
आजकल मिलने वाली नई ज्वार की किस्म में मोटे डंठल और मिठास ज्यादा पाई जाती है. इसका फायदा उठाते हुए, महालिंगप्पा ने साबित कर दिया कि ज्वार के डंठलों का इस्तेमाल रस निकालने और अच्छी गुणवत्ता वाला गुड़ बनाने के लिए किया जा सकता है. यह आय का एक नया स्रोत बन गया है. दावा किया गया है कि 120 दिनों में काटी गई ज्वार की फसल से प्रति टन 3,000 रुपये की अतिरिक्त कमाई हो सकती है. ज्वार के डंठलों से बना गुड़ बेहतर बताया जा रहा है.
गन्ने की फसल में काफी समय लग जाता है लेकिन ज्वार की फसल चार महीने में तैयार हो सकती है. महालिंगप्पा का कहना है कि ऐसे में हम साल में दो फसलें उगा सकते हैं. यह गुड़ सेहत के लिए भी बढ़िया होता है. उन्होंने कहा कि एक टन गन्ने से लगभग 100-110 किलो गुड़ बनता है, जबकि ज्वार के डंठलों से लगभग 60-70 किग्रा गुड़ बनता है क्योंकि उसमें पानी की मात्रा कम होती है.