दिल्ली में हिंसा करने के लिए 300 से ज्यादा लोग यूपी से आए थे: अमित शाह
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दिल्ली में हिंसा करने के लिए 300 से ज्यादा लोग यूपी से आए थे: अमित शाह

दिल्ली हिंसा में जान गंवाने वालों को मैं श्रद्धांजलि देता हूं. 25 फरवरी रात 11 बजे के बाद दिल्ली में हिंसा नहीं हुई. 

दिल्ली में हिंसा करने के लिए 300 से ज्यादा लोग यूपी से आए थे: अमित शाह

नई दिल्ली: लोकसभा में आज दिल्ली हिंसा (Delhi Violence) पर हुई चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कहा, 'दिल्ली हिंसा में जान गंवाने वालों को मैं श्रद्धांजलि देता हूं. 25 फरवरी रात 11 बजे के बाद दिल्ली में हिंसा नहीं हुई. भावनाओं को ध्यान में रखते हुए होली के बाद सदन में इस मुद्दे पर चर्चा की गई. दिल्ली में दंगा प्रभावित इलाकों 20 लाख की आबादी थी. 12 थाना क्षेत्रों में हिंसा फैली. 4 प्रतिशत इलाकों में हिंसा को रोका गया'

अमित शाह ने कहा, 'दिल्ली में हिंसा को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई. दिल्ली पुलिस हिंसा की जांच कर रही है. दिल्ली पुलिस ने हिंसा को 36 घंटे के अंदर हिंसा पर काबू पा लिया गया.'

ट्रंप के साथ ना लंच में था, ना डिनर में
विपक्ष द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यक्रम में व्यस्त रहने के सवाल पर अमित शाह ने जवाब देते हुए कहा, 'मेरे कहने पर ही एनएसए अजित डोभाल हिंसा प्रभावित इलाकों में दौरे के लिए गए. मैं राष्ट्रपति ट्रंप के दौरे के दौरान दिल्ली पुलिस के साथ था. लगातार बैठक ले रहा था. मैं ट्रंप के साथ आगरा, लंच या डिनर में नहीं गया था. मैं अगर हिंसा प्रभावित इलाकों में जाता तो पुलिस सुरक्षा के लिए मेरे पीछे लगी रहती. ऐसी गलियों में दंगे हुए जहां बाइक भी नहीं जा सकती है.'

700 से ज्यादा एफआईआर, 2647 लोग हिरासत में
अमित शाह ने बताया '27 फरवरी की तारीख से आज तक 700 से ज्यादा एफआईआर हमने दर्ज की है. ये एफआईआर दोनों समुदाय के लोगों पर हुई है. 2647 लोग हिरासत में लिए गए हैं. दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से दंगों के वीडियो मांगे ताकी अपराधियों को पहचाना जा सके. दंगा प्रभावित इलाकों में 80 कंपनियां अभी भी तैनात हैं. 300 से ज्यादा लोग यूपी से आए थे दंगा करने के लिए. 24 तारीख की रात को 10 बजे यूपी की बॉर्डर सील कर दी गई थी.'

ऐसे होगी दंगाइयों की पहचान
अमित शाह ने कहा, 'फेस आइडेंटिफिकेश सॉफ्टवेयर के माध्यम से 1100 से ज्यादा लोगों की पहचान हो चुकी है. 40 टीमें इन दंगाइयों को खोजने में लगी है. नरेंद्र मोदी सरकार किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शेगी जिसका इन दंगों में रोल है. साक्ष्यों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं. उनकी वीडियोग्राफी हो रही है. दो एसआईटी की टीम बनाई है जो 49 गंभीर मामलों की जांच करेगी. 152 अवैध हथियार भी हमने रिकवर किए हैं. हमने 25 फरवरी शाम 4 बजे शांति समितियों की मीटिंग शुरू कर दिया है. 400 से ज्यादा शांति समितियों की बैठक हो चुकी है.'

षड़यंत्र की सुगबुगाहट, जांच जारी है
अमित शाह ने कहा, 'हमने षड़यंत्र का भी केस दर्ज किया है. ताकि इसकी जांच हो सके कि आखिर कैसे दिल्ली में इतने बड़े दंगों को अंजाम दिया गया है. दंगाइयों को फंडिंग कहां से हुई इसकी भी जांच की जा रही है. दिल्ली दंगों को फाइनेंस करने वाले 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. आईएसआईएस से जुड़े एक शख्स को गिरफ्तार किया है एक को हिरासत में लिया है. ये लोग सोशल मीडिया पर आईएसआईएस के वीडियो शेयर कर रहे थे...

... ये सारी जांच वैज्ञानिक आधारों पर हो रही है. मैं खुद मीटिंग के अंदर पूरी जांच प्रक्रिया का रिव्यू किया है. कहीं पर भी किसी निर्दोष को ना फंसाया जाए. जिसके खिलाफ पुख्ता सबूत होंगे उसे जांचा जाएगा. औवैसी साहब चिंता ना करें.'

ओवैसी जी को मस्जिद जलने का दुख, मंदिर का नहीं
कांग्रेस नेताओं ने आर पर की बात कही, क्या ये भड़काऊ बयान नहीं है. वारिस पठान का 15 करोड़ बयान क्या भड़काऊ नहीं है. मैं हिंदू मुसलमान में नहीं मानता हूं. 52 भारतीयों की मृत्यु हुई है. ये सदन को भी हम हिंदू मुसलमानों में बांटेंगे क्या. ओवैसी साहब ने केवल मस्जिद के जलने की बात कही. लेकिन कभी मंदिर जलने की भी बात कर लिया करो. कोई भी नहीं जलना चाहिए. ना मंदिर ना मस्जिद ना गुरुद्वारा किसी भी जगह दंगों की आग नहीं लगनी चाहिए.

भारत में जितने भी दंगे हुए उन दंगों में 76 प्रतिशत लोगों की मौत कांग्रेस के शासनकाल में हुई. 1984 से लेकर 2014 तक सिख दंगों के आरोपी पकड़े नहीं गए. सिख दंगों पर कांग्रेस ने क्या जांच करवाई. 3 हजार सिख जला दिए गए. बीजेपी की सरकार आने से पहले एक भी कांग्रेसी नहीं पकड़ा गया. 

पुलिस के पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि दिल्ली में हुई हिंसा एक सोची समझी साजिश थी. मैं इस हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों से कहना चाहता हूं कि आपके घरों के चिराग बुझाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. चाहे वो किसी भी धर्म का हो, किसी भी पार्टी का हो. 

पुलिस द्वारा पत्थरबाजी करने के वीडियो पर अमित शाह ने कहा कि पुलिसकर्मी दंगाइयों को भगाने के लिए पत्थर मार रहे थे. पुलिस ने इस हिंसा को 36 घंटे में समाप्त कर लिया है.

मीनाक्षी लेखी बोलीं- 'सोनिया गांधी ने भी लोगों को भड़काने का काम किया'
इससे पहले नई दिल्ली से बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने भड़काऊ बयान देने वाले लोगों पर जमकर निशाना साधा. मीनाश्री लेखी ने लोकसभा में कांग्रेस द्वारा बीजेपी नेता कपिल मिश्रा पर भड़काऊ बयान देने के आरोपों पर बोलते हुए कहा कि केवल कपिल मिश्रा ने भड़काऊ बयान नहीं दिए हैं. कांग्रेस के नेताओं ने भी अपने बयानों से लोगों को उकसाया है. मीनाक्षी लेखी ने कहा कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी भड़काऊ बयान दिए हैं. 

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उन्होंने कहा, 'कपिल मिश्रा पर आरोप लगाने वाले अमानतुल्ला और शरजिल को भूले. सिर्फ कपिल मिश्रा पर ही आरोप क्यों लग रहे हैं. सोनिया गांधी ने नागरिकता कानून को लेकर दिए अपने बयान में आर पार की बात कही थी. वारिस पठान और उमर खालिद ने भी भड़काऊ बयान दिया था. अमानतुल्ला के बयानों पर सवाल क्यों नहीं होते?  एनएसए होने के नाते अजित डोभाल हिंसा प्रभावित इलाकों में गए थे.'

मीनाक्षी लेखी ने कहा, 'लोग टूट जाते हैं घर बनाने को और तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने को. कुछ लोगों के पास चीजों को स्थापित करने का इतिहास है. मेरे पास डेटा है जो दिखाता है कि देश में जब भी हिंसा की घटनाएं हुईं, उसका कौन जिम्मेदार था? बीजेपी सांसद ने कहा कि दिल्ली हिंसा के पीछे पीएफआई और आईएसआईएस पर भी शक. ईडी ने पीएफआई सदस्य मोहम्मद दानिश समेत 2 लोगों पर केस दर्ज किया.

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