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पश्चिम एशिया युद्ध का नहीं होगा असर, सेना ने बना लिया खास प्लान; अब रोजाना बचेगी 30,000 किलो LPG बचेगी

मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग का असर दुनिया के सभी देशों पर पड़ा है. वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कमी महसूस की गई है, लेकिन भारतीय सेना ने ऐसी प्लानिंग बनाई है, जिससे पश्चिम एशिया के ऊर्जा सोर्स पर सेना की निर्भरता कम होगी. सेना के उन्हीं प्लानों के बारे में आज हम बात करेंगे. 

पश्चिम एशिया युद्ध का नहीं होगा असर, सेना ने बना लिया खास प्लान; अब रोजाना बचेगी 30,000 किलो LPG बचेगी

मिडिल ईस्ट में छिड़े जंग के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट मंडराने लगा है. दुनिया के कई देशों में इसका सीधा प्रभाव देखने को मिला है, तो वहीं कुछ देशों पर इसका अप्रत्यक्ष तौर पर असर देखने को मिला है. इन सबके बीच भारतीय सशस्त्र बल एलपीजी और ईंधन की बचत के लिए कई उपायों पर विचार कर रहे हैं। 

दरअसल, इस संबंध में अधिकारियों ने बताया कि अल्पकालिक समाधान के रूप में बायोगैस आधारिक कुकिंग स्रोतों की खरीदारी की जा रही है. इसके अलावा आने वाले समय में बड़े स्तर पर सोलर और विंड ऊर्जा का उपयोग बढ़ाने पर जोर है. अधिकारियों के अनुसार, सेना की ओर से बायोगैस स्टोव की खरीद के आदेश जल्द ही दिए जाने की संभावना है. अधिकारियों ने कहा कि कदम ईंधन संरक्षण पर केंद्रित है.  

इन कदमों को उठाने पर विचार 

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईंधन बचत पर फोकस करने के लिए आर्मी काफिले की प्रशासनिक आवाजाही को 400 KM तक वाहन से करने पर विचार किया जा रहा है और इससे अधिक के सफर को ट्रेन से करने की कोशिश की जा रही है. इस पूरे मामले को लेकर सेना के एक अधिकारी ने कहा कि आर्मी वाहनों की दिन-प्रतिदिन की आवाजाही पर सीमित पाबंदियां लगाने पर विचार किया जा रहा है. इससे परिचालन की क्षमता पर कई असर नहीं पड़ेगा. 

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अधिकारी के अनुसार, इसमें वाहनों का पूलिंग, राशन संग्रह, स्टोर और सानिकों के परिवहन जैसे कर्तव्यों को संयोजित करना शामिल हैं. उन्होंने बताया कि जहां भी संभव होगा, सीएनजी या इलेक्ट्रिक सिविल हायर ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा दिया जाएगा. बता दें कि पिछले समय में कुछ उपायों को लागू किया गया है, जबकि बाकी को लागू करने की प्रक्रिया जारी है.  

परिचालन उड़ाने प्रभावित होने की संभावना? 

मीडिया रिपोर्ट्स में सेना के अधिकारी के हवाले से बताया गया कि इन उपायों से परिचालन उड़ाने प्रभावित नहीं होंगी. हालांकि, रूटीन फ्लाइट्स को ऑप्टिमाइज किया जाएगा. परिचालन उड़ानों में रेकी, कैजुअल्टी इवैक्यूएशन, सैनिकों की आपतकालीन रिलोकेशन और राशन-उपकरण शामिल है. रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्तमान समय में सनिक के लिए खाना पकाने के लिए प्रतिदिन 125-135 ग्राम गैस अधिकृत है. सेना की हर एक यूनिट में 4 से 6 कुक हाउस हैं, जहां पर रोजाना 125 से 150 सैनिकों को भोजन परोसा जाता है. 

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रोजाना कितनी कुकिंग गैस होती है इस्तेमाल? 

सेना में प्रतिदिन करीब 1,56,000 किलोग्राम कुकिंग गैस की खपत होती है. बायोगैस के माध्यम से इसमें से 20 प्रतिशत यानी लगभग 30,000 किलोग्राम प्रतिदिन बचाई जा सकती है. इसके साथ ही सेना के पास दो लाख से अधिक प्रकार के वाहन हैं, जिनका इस्तेमाल प्रशासन, प्रशिक्षण, परिचालन, रखरखाव, स्टोर, उपकरण, सैनिकों और राशन के परिवहन के लिए किया जाता है. इसमें भी प्रतिदिन भारी मात्रा में ईंधन की खपत होती है. 

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abhinav tripathi

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजन...और पढ़ें

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