तहसील के बगल में हो रहा है अवैध खनन, धमाकों के चलते खंडहर बनती जा रही है बस्ती

यह मामला किशनगंज क्षेत्र के महरावता रूण्डी गांव का है. जहां खनन माफियाओं ने सरकारी नाले में भी सेंध लगा दी है.

तहसील के बगल में हो रहा है अवैध खनन, धमाकों के चलते खंडहर बनती जा रही है बस्ती
खनन में होने वाली ब्लास्टिंग के धमाकों से बस्ती के घरों में दरार आने के साथ ही कई पक्के मकान गिर भी गए हैं

किशनगंज(बारां): किशनगंज तहसील मुख्यालय से 2 किलोमीटर के भीतर अवैध खनन जोरों पर चल रहा है. खनन करने वालों को किसी तरह का डर नहीं है. यही वजह है कि वे खनन के लिए भारी भरकम ब्लास्टिंग करने से भी नहीं डरते. खनन के लिए की जाने वाली इन ब्लास्टिंग का असर है कि एक पूरा गांव अब खंडहर में बदल चुका है. जानकारी के मुताबिक सहरिया आवास योजना के 65 मकान खंडहर में तब्दील हो चुके हैं. ये वो मकान हैं जो काफी मेहनत से बनाए गए थे लेकिन रहने से पहले ही खंडहर में तब्दील हो चुके हैं. धमाकों के डर के चलते लोग यहां रहने से भी कतराते हैं. धमाकों के चलते सिर्फ मकानों ही नहीं बल्कि देवी-देवताओं के स्थान में भी काफी दरारें आई हैं.

यह मामला किशनगंज क्षेत्र के महरावता रूण्डी गांव का है. जहां खनन माफियाओं ने सरकारी नाले में भी सेंध लगा दी है. जबकि नियम यह है कि सरकारी नाले से 45 मीटर दूरी तक खनन नहीं किया जा सकता लेकिन उचित कार्यवाही व निरीक्षण के अभाव में इस पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है. प्रशासन के ढीलेढाले रवैये के चलते खनन माफियाओं के हौंसले बुलंद हैं और वे दिन-रात हाईकोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं. खनन माफिया नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाते हुए दिन रात खनन कर रहे हैं.

कस्बे में 200 घरों की बस्ती है. खनन में होने वाली ब्लास्टिंग के धमाकों से बस्ती के घरों में दरार आने के साथ ही कई पक्के मकान गिर भी गए हैं. ब्लास्टिंग की तेज आवाज से बस्ती के महिला, पुरुष और बच्चे डर के साए में जीने को मजबूर हैं. कस्बे में स्थित सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र की दीवारों में भी दरारें आ गई हैं. बस्ती के ग्रामीण कई बार अवैध ब्लास्टिंग रुकवाने के लिए अधिकारियों के सामने गुहार लगा चुके हैं लेकिन किसी ने अवैध खनन ब्लास्टिंग को रुकवाने की जहमत नहीं उठाई.

डर के साए में बस्ती
जानकारी के मुताबिक ब्लास्टिंग से बस्ती की महिलाएं, पुरुष और बच्चे डर के साए में जीते हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक बस्ती के कई लोग बहरे तक होने लगे हैं. ब्लास्टिंग से कई मकान क्षतिग्रस्त हो रहे हैं तो कई पक्के मकान ढहने की कगार पर हैं. ऐसे में कई परिवार अपने पक्के घरों को छोड़कर अस्थाई कच्चे मकानों में निवास करने लगे हैं. छोटे बच्चों में हमेशा डर बना रहता है.

नहीं होती कार्यवाही
माइंस विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस द्वारा भी इस अवैध कारोबार के खिलाफ कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की जाती. जिसके चलते खनन का खेल दिन-रात बदस्तूर जारी है. माइंस विभाग की ओर से कभी-कभी खनन के काम में लगीं ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को पकड़कर इति श्री कर ली जाती है.

ऐसे में तो उजड़ जाएगी बस्ती
यहां खनन के लिए की जाने वाली ब्लास्टिंग से घरों में दरारें आने जाने से कई घरों की छतें लकड़ी के सहारे टिकी हुई हैं. बस्ती के लोगों के अनुसार यदि खनन ब्लास्टिंग ऐसे ही चलती रही तो बस्ती ही उजड़ जाएगी. खनन करने वाले जेब भरने के चक्कर में बस्तीवासियों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं. स्थानीय सरपंच राजेंद्र सहरिया ने ग्रामीणों के साथ कई बार अधिकारियों के पास जाकर इस मामले से अवगत करवाया और धरना तक दिया लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. स्थानीय लोगों के मुताबिक खनन माफिया ट्रैक्टर से 3 फुट की ब्लास्टिंग की जगह बोरिंग मशीन से 20 फुट के गहरे होल करा कर भारी ब्लास्टिंग करवा रहे हैं.