उत्‍तर कोरिया नहीं ये 5 देश दुनिया में कहीं भी मिसाइल अटैक करने में हैं सक्षम

रूस, अमेरिका, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस ही ऐसे मुल्‍क हैं जो दुनिया के किसी भी कोने में हमला करने में सक्षम हैं.

उत्‍तर कोरिया नहीं ये 5 देश दुनिया में कहीं भी मिसाइल अटैक करने में हैं सक्षम
पिछले साल बिजनेस और पर्यावरण के बाद तीसरे नंबर पर सबसे अधिक वैश्विक चर्चा मिसाइलों की क्षमता को लेकर हुई.

उत्‍तर कोरिया लगातार अमेरिकी धरती पर मिसाइल हमले की धमकी देता रहा है. उसका कहना है कि उसने इतनी क्षमता विकसित कर ली है कि वह अमेरिकी सरजमीं तक अपनी मिसाइलों के माध्‍यम से धावा बोल सकता है. हालांकि उसके इस दावे पर रक्षा विश्‍लेषकों को संदेह है. आमतौर पर रक्षा विशेषज्ञ इस मामले में एक राय रखते हैं कि उत्‍तर कोरिया, ईरान जैसे मुल्‍क अभी इस स्‍तर पर नहीं पहुंचे हैं कि वह दुनिया के किसी भी कोने में मिसाइल हमले को सफलतापूर्वक अंजाम दे सकें. इन विशेषज्ञों के मुताबिक संयुक्‍त राष्‍ट्र की पांचों वीटो पॉवर शक्तियां ही अभी इस काम को करने में सक्षम हैं. यानी रूस, अमेरिका, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस ही ऐसे मुल्‍क हैं जो दुनिया के किसी भी कोने में हमला करने में सक्षम हैं.

मिसाइल टेक्‍नोलॉजी
द न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल बिजनेस और पर्यावरण के बाद तीसरे नंबर पर सबसे अधिक वैश्विक चर्चा मिसाइलों की क्षमता को लेकर हुई. उसकी एक बड़ी वजह यह रही कि उत्‍तर कोरिया ने पिछले साल कई मिसाइल टेस्‍ट कर दुनिया के पारे को बढ़ाया. वह लगातार अपनी मिसाइल क्षमता और सटीकता को बढ़ाने की कोशिशों में लगा हुआ है. इस मामले में उत्‍तर कोरिया वास्‍तव में भारत, पाकिस्‍तान, इजरायल, ईरान, सऊदी अरब, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की श्रेणी में शुमार होने का इच्‍छुक है क्‍योंकि ये देश भी इस दिशा में लगातार कोशिश कर रहे हैं. इनमें से कई ऐसे मुल्‍क हैं जिन्‍होंने पिछले 20 सालों में सबसे अधिक पैसा मिसाइलों पर खर्च किया है.

सुखोई फायटर जेट से पहली बार ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण, भारत ने रचा इतिहास

क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश
रक्षा विश्‍लेषकों के मुताबिक पश्चिम एशिया और एशिया उपमहाद्वीप के कई देशों में क्षेत्रीय तनाव को कम करने एवं संतुलन बनाने और पड़ोसी को डराने के लिए लगातार मिसाइल टेस्‍ट होते रहते हैं. भारत और पाकिस्‍तान उसका उदाहरण हैं. भारत के पास एडवांस टेक्‍नोलॉजी सिस्‍टम है. अपनी आधुनिक क्षमता के चलते यह पाकिस्‍तान के किसी भी हिस्‍से को निशाना बनाने में सक्षम है. चीन के बड़े क्षेत्र पर भी मिसाइल हमला करने में सक्षम है. इसी तरह चीन, भारत का क्षेत्रीय विरोधी माना जाता है. भारत ने रूस के सहयोग से क्रूज मिसाइलों का निर्माण किया है. अब भारत पनडुब्‍बी से लांच होने वाली मिसाइल क्षमता पर काम कर रहा है. यदि ऐसा होता है तो भारत का सुरक्षा कवच बेहद मजबूत हो जाएगा और यह किसी भी प्रकार के हमले का जवाब देने में सक्षम हो जाएगा.

भारत ने किया अग्नि-5 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण, चीन-पाकिस्‍तान तक कर सकती है मार

इसी तरह पाकिस्‍तान, ईरान और उत्‍तर कोरिया भी अपने मिसाइल कार्यक्रम को मजबूत करने की कोशिशों में लगातार लगे हुए हैं. पाकिस्‍तान ने 1990 के दशक से चीन के सहयोग से मिसाइल विकास कार्यक्रम पर अधिक पैसा खर्च करना शुरू किया. वैसे पाकिस्‍तान, ईरान और उत्‍तर कोरिया की टेक्‍नोलॉजी में कई समानताएं भी मिलती हैं. इसलिए कई रक्षा विश्‍लेषकों का आकलन है कि ऐसा लगता है कि इन मुल्‍कों ने टेक्‍नोलॉजी एक-दूसरे से शेयर की है. हालांकि इन सबके बीच सबसे बड़ी चिंता मिसाइल टेक्‍नोलॉजी की सुरक्षा को लेकर है. आतंकी समूह लगातार इनको हासिल करने में कोशिशों में लगे हैं.