मॉब लिंचिंग: अफवाहों पर अंकुश को लेकर IT मंत्रालय WhatsApp से फिर करेगा बातचीत

आईटी मंत्रालय का मानना है कि व्हाट्सएप ने भीड़ को उकसाने वाले फर्जी संदेशों पर लगाम लगाने के मामले में सरकार की सभी आपत्तियों को दूर नहीं किया है. 

मॉब लिंचिंग: अफवाहों पर अंकुश को लेकर IT मंत्रालय WhatsApp से फिर करेगा बातचीत
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर (साभार - रॉयटर्स)

नई दिल्ली: सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय एक बार फिर अफवाहें फैलाने वाले संदेशों पर अंकुश लगाने को लेकर सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी व्हाट्सएप से बात कर सकता है. मंत्रालय का मानना है कि व्हाट्सएप ने भीड़ को उकसाने वाले फर्जी संदेशों पर लगाम लगाने के मामले में सरकार की सभी आपत्तियों को दूर नहीं किया है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने आज कहा कि सरकार अगले कुछ दिनों के भीतर फिर से व्हाट्सएप कंपनी से पूछताछ कर सकती है. 

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा , ‘हमें व्हाट्सएप से पुन : बात करनी होंगी. यह सिर्फ तभी होता है जब इससे पहले की प्रतिक्रिया से पूरी तरह संतुष्टि नहीं मिली हो.’ 

उन्होंने कहा कि आईटी मंत्रालय को व्हाट्सएप से और उम्मीदें हैं और वह मामले को देख रही है. उन्होंने कहा कि इसमें 2-3 दिन लग सकते हैं. अधिकारी ने कहा, ‘मंत्रालय को लगता है कि अभी और किये जाने की जरूरत है. उन्होंने सभी आपत्तियों को दूर नहीं किया है.’ व्हाट्सएप ने इस मामले में भेजे गये ई-मेल का जवाब नहीं दिया है.

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल की नापाक साजिश पर चिंता जताई
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कर्नाटक में हैदराबाद के एक व्यक्त्ति की पीट पीटकर हत्या किये जाने पर बुधवार को क्षोभ प्रकट किया और कहा कि यह 2019 के आम चुनाव से पहले ‘ बतौर समाज हमारे सामूहिक विवेक में जहर घोलने ’ के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने की नापाक साजिश जान पड़ती है. 

राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें मोहम्मद आजम की दुखद मौत से बेहद क्षुब्ध हैं. आजम की 13 जुलाई को कर्नाटक में बीदर के समीप पीट पीट कर हत्या कर दी गयी थी. सोशल मीडिया पर आजम के बच्चा चोर होने की अफवाह फैलाने के बाद यह दुखद घटना हुई. कांग्रेस अध्यक्ष के निर्देश पर तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस ने आजम के परिवार से भेंट कर उसे राहत के तौर पर ढाई लाख रुपये दिए.

कांग्रेस अध्यक्ष ने तेलंगाना कांग्रेस के अध्यक्ष एन उत्तम कुमार रेड्डी को भेजे पत्र में कहा है, ‘सोशल मीडिया पर फैलायी गयी अफवाह के चलते किसी निर्दोष की जान लिये जाने की यथासंभव कठोरतम तरीके से निंदा की जानी चाहिए. अगले साल के आम चुनाव से पहले ‘ बतौर समाज हमारे सामूहिक विवेक में जहर घोलने ’ के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने की नापाक साजिश जान पड़ती है.’ 

उन्होंने कहा , ‘मोटे तौर पर अल्पसंख्यकों और हाशिये पर रहने वाले वर्गों के सदस्यों को निशाना बनाने के लिए इस माध्यम के उपयोग को बेनकाब करने और उससे मुकाबला करने की जरूरत है.’ 

(इनपुट - भाषा)