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'मोदी सरकार को कोई हक नहीं', गोरखा मुद्दे पर वार्ताकार नियुक्ति को लेकर ममता ने फिर फोड़ा लेटर बम

PM Modi Mamata Banerjee: ममता ने आगे कहा, 'यह केंद्र सरकार का मनमाना और एकतरफा फैसला है, जिसमें बंगाल सरकार से कोई सलाह नहीं ली गई है. यह पूरी तरह असंवैधानिक है. इस आदेश का ना तो भारत के संविधान में ना ही किसी अन्य वैध प्रावधान में कोई आधार है.'

'मोदी सरकार को कोई हक नहीं', गोरखा मुद्दे पर वार्ताकार नियुक्ति को लेकर ममता ने फिर फोड़ा लेटर बम

Mamata Banerjee Letter: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को एक बार फिर खत लिखा है. मामला है दार्जीलिंग हिल्स में गोरखा के मुद्दे को लेकर वार्ताकार नियुक्त करने का. केंद्र की मोदी सरकार ने इस मामले में एक रिटायर्ड आईपीएस को बतौर वार्ताकार नियुक्त किया है, जिसने काम भी शुरू कर दिया है. ममता बनर्जी ने 18 अक्टूबर 2025 को भी इसी मामले को लेकर पीएम मोदी को खत लिखा था. लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. अब उन्होंने सोमवार को फिर से खत लिखकर मामले पर हैरानी जताई है. 

ममता बोलीं- ये शॉकिंग है

ममता ने अपने खत में लिख, 'यह बेहद चिंता की बात है कि मेरे खत का बिना कोई जवाब दिए और आपके दखल के बिना गृह मंत्रालय के तहत वार्ताकार ने 10 नवंबर को एक मेमो में बताया कि वार्ताकार के कार्यालय ने काम करना शुरू कर दिया है. यह बेहद शॉकिंग है.'

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ममता ने आगे कहा, 'यह केंद्र सरकार का मनमाना और एकतरफा फैसला है, जिसमें बंगाल सरकार से कोई सलाह नहीं ली गई है. यह पूरी तरह असंवैधानिक है. इस आदेश का ना तो भारत के संविधान में ना ही किसी अन्य वैध प्रावधान में कोई आधार है.'

खत में ममता ने क्या कहा?

दार्जीलिंग क्षेत्र बंगाल राज्य का अभिन्न अंग है. यह गोरखा टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन एक्ट 2011 के तहत चलता है. इस कानून को बंगाल विधानसभा ने पास किया था और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 12 मार्च 2012 को इसे नोटिफाई किया गया था. यह कानून दार्जीलिंग, कलीमपोंग और कुरसोंग सब डिविजिन में सेल्फ गवर्नेंस के लिए डिजाइन किया गया था. इस कानून का सेक्शन 2(h) कहता है कि इसमें गवर्नेंट का मतलब बंगाल सरकार से है. लिहाजा केंद्र सरकार के पास इस क्षेत्र के लिए किसी तरह का वार्ताकार नियुक्त करने का कोई अधिकार नहीं है. 

बता दें कि 16 अक्टूबर को गृह मंत्रालय ने दार्जीलिंग हिल्स की राजनीतिक पार्टियों और उनकी सियासी मांगों पर बात करने को लेकर रिटायर्ड IPS अफसर पंकज कुमार सिंह को वार्ताकार नियुक्त किया था. पंकज सिंह बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) के चीफ और पूर्व डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर भी रह चुके हैं.  

 

 

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Rachit Kumar

नवभारत टाइम्स अखबार से शुरुआत फिर जनसत्ता डॉट कॉम, इंडिया न्यूज, आजतक, एबीपी न्यूज में काम करते हुए साढ़े 3 साल से ज़ी न्यूज़ में हैं. शिफ्ट देखने का लंबा अनुभव है.

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