चांद आया नजर, आज धूमधाम से मनाई जाएगी ईद

रविवार देर शाम ईद का चांद नजर आ गया, ईद का जश्न सोमवार को होगा. जैसे ही लोगों को यह जानकारी मिली रोजेदार खुशी से झूम उठी.

चांद आया नजर, आज धूमधाम से मनाई जाएगी ईद
चांद आया नजर, आज धूमधाम से मनाई जाएगी ईद

नई दिल्ली: रविवार देर शाम ईद का चांद नजर आ गया, ईद का जश्न सोमवार को होगा. जैसे ही लोगों को यह जानकारी मिली रोजेदार खुशी से झूम उठी.

मुस्लिम बाहुल्य कालोनियों में ईद की खुशी में आतिशबाजी की गई. मगरिब की नमाज के बाद रोजेदारों ने एक दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी.

मगरिब की नमाज के बाद रोजेदार चांद की तलाश में छतों पर चढ़ गए. आसमान साफ था, इसलिए कुछ ही देर में चांद नजर भी आ गया. रविवार को सऊदी अरब में ईद मनाई गई थी, इसलिए सोमवार को यहां ईद का होना तय माना जा रहा था.

चांद दिखते ही बाज़ारों में उमड़ पड़ी भीड़

चांद का दीदार होते ही बड़े ही नहीं, बच्चे भी बाजारों की ओर दौड़ पड़े. लोगों ने बाजारों में पहुंचकर दूध, ड्राई फ्रूट और सेवई आदि खरीदे. युवाओं ने कपड़ों की खरीदारी की. महिलाएं सौंदर्य प्रसाधन कपड़े और होम डेकोरेट सामग्री खरीदने में लगी रहीं.

दिल्ली की जामा मस्जिद ने भी करीब रात आठ बजे अधिकारिक घोषणा कर दी कि सोमवार को ईद है. इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अपनी छतों और मस्जिदों में ईद के चांद के दीदार करने को बेकरार दिखे. चांद दिखने के बाद बाजार में खरीदारों की भीड़ उमड़ पड़ी.

यूं तो लोग रमजान के पहले दिन से ही ईद की तैयारियों में जुट जाते थे, लेकिन जैसे-जैसे ईद का दिन नजदीक आ रहा था, बाजार की रौनक बढ़ती जा रही थी. हर किसी के चेहरे पर जश्न का उत्साह और इसकी तैयारियों को लेकर खुशी दिख रही थी.

ईद के मौके पर राष्ट्रपति ने देशवासियों को दी मुबारकवाद

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने ईद की पूर्वसंध्या पर देशवासियों को मुबारकवाद दी और उम्मीद जताई कि यह त्योहार एकता में लोगों के विश्वास को मजबूत करेगा.

राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा, ईद-उल-फितर के मुबारक मौके पर मैं अपने सभी देशवासियों, खासकर भारत में और विदेशों में मेरे मुस्लिम भाइयों और बहनों को बधाइयां और मुबारकवाद देता हूं.

उन्होंने कहा, रमजान के पाक महीने में रोजों और नमाज के बाद आया यह त्योहार खुशी, अमन और समृद्धि लाए तथा हमें मानवता की सेवा करने का मौका दे. मुखर्जी ने कहा कि यह दिन हम सभी के अंदर हमारी एकता में बेजोड़ विश्वास भरे जो सदियों से हमारी समग्र संस्कृति में निहित रही है.