Delhi Bomb Blast Latest News: दिल्ली में बम धमाके के बाद यूपी में मस्जिदों में रुकने वाले अनजान लोगों पर सख्ती शुरू हो गई है. उनके वेरिफिकेशन के लिए स्पेशल ड्राइव चलाई जा रही है.
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DNA on Action against Mosques in UP: उमर ने धमाका कर दिल्ली को दहला दिया लेकिन अब ऐसे हमले ना हो पाएं इसलिए जांच एजेंसियां आतंकियों पर शिकंजा कस रही है. कट्टरवाद के बिष वृक्ष पर चोट कर रही है लेकिन ये कुछ लोगों को अखर रहा है. कुछ कट्टरपंथियों को आतंकी वारदात रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों से भी आपत्ति है.
दिल्ली धमाकों के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी सख्ती बरती जा रही है. आगरा में सुरक्षा जांच चल रही है तो कुछ लोगों को इससे नाराजगी है. दिल्ली धमाके के बाद उत्तर प्रदेश की ATS एक्शन में है क्योंकि व्हाइट कोट मॉड्यूल का कई सिरा उत्तर प्रदेश में ही आकर मिल रहा है. उत्तर प्रदेश से अब तक 5 डॉक्टरों की गिरफ्तारी हो चुकी है. कानपुर, सहारनपुर, शामली से लेकर लखीमपुर तक जाँच एजेंसी दबिश दे रही है. यूपी पुलिस ने भी सतर्कता बढ़ा दी है.
आगरा में जमातियों पर पुलिस का शिकंजा
विशेषकर उन इलाकों में पुलिस अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है, जहां पर बाहर से लोगों की भीड़ पहुंच रही है. आगरा में पुलिस ने मस्जिदों के इमामों से कहा है कि बाहर के जो लोग आकर मरकज में ठहरते हैं, उनकी जानकारी पुलिस को दें.
जमात के लोग बड़ी संख्या में हर वर्ष आगरा में आते हैं. यहां मरकज में रुकने के बाद वह मंटोला समेत शहर की विभिन्न मस्जिदों में रुककर धर्म का प्रचार-प्रसार करते हैं. नवंबर से जनवरी के दौरान कश्मीर से शाल और गर्म कपड़े बेचने बड़ी संख्या में युवक आते हैं. यही कारण है कि जमात के लोगों के लिए संबंधित जिले से अपना सत्यापन कराने का प्रमाण पत्र लेकर आने को कहा है. जो लोग आ चुके हैं, उन्हें अपना दस्तावेज सत्यापित कराने के लिए कहा गया है. कश्मीर के कारोबारियों और जमात के लोगों को किराए पर घर देने वालों को इसकी जानकारी पुलिस को देने को कहा गया है.
ऑल इंडिया जमीयत उल कुरैश को नहीं हुआ बर्दाश्त
आगरा में मंटोला इलायची की रमजानी मस्जिद में ठहरी जमात को पुलिस ने वेरिफिकेशन के लिए बुलाया. इससे हड़कंप मच गया और मुस्लिम समाज के तमाम लोग थाने पर पहुंच गए. ऑल इंडिया जमीयत उल कुरैश को ये बर्दाश्त नहीं है कि इस तरह जांच पड़ताल हो.
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— Zee News (@ZeeNews) November 15, 2025
इस विरोध वाली मनसिकता को समझिए. ऐसी मानसिकता में भी कट्टरवाद की मात्रा आपको ज्यादा मिलेगी. इन्हें समझना चाहिए कि पुलिस का काम किसी धर्म विशेष को लक्षित करना नहीं है. बल्कि इसलिए जांच पड़ताल हो रही है क्योंकि उत्तर प्रदेश आतंकियों के टारगेट पर रहा है.
इसी आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में डॉ. परवेज पढ़ा है. बतौर सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर छह महीने तक काम किया है. आगरा में डॉक्टर परवेज का नेटवर्क एक्टिव होने की आशंका भी है. यही कारण है कि आगरा में सख्ती बरती जा रही है. आगरा में मॉक ड्रिल भी हुई है. मॉक ड्रिल में SSF कर्मी 15 सिक्योरिटी अधिकारी और उत्तर प्रदेश मेट्रो के कर्मचारी शामिल थे. सभी ने मिलकर आतंकी हमले की स्थिति में उससे निपटने के तौर-तरीकों का अभ्यास किया.
आतंकियों को पीड़ित बताकर गढ़ रहे नैरेटिव
ये जो कुछ भी हुआ उसका सिर्फ एक ही उद्देश्य है और वो है आगरा को सुरक्षित रखना. लेकिन धर्मांधों को इतनी सी बात समझ में नहीं आती. आगरा से लेकर लखनऊ तक लोगों को बर्दाश्त नहीं हो पा रहा है. इन्हें सिर्फ जांच-पड़ताल में मजहब दिखाई पड़ता है. जैसे ही कोई आतंकी घटना होती है, वैसे ही ये लोग अलग-अलग नैरेटिव गढ़ने लगते हैं. अब सख्ती बरती जा रही है तो भी ये नया नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे ही लोग पाखंडी कहे जाते हैं. जिनके अंदर कट्टरवाद वाला रसायन भरा रहता है. जो आतंकी वारदात पर आतंकी का मजहब नहीं होता जैसी बातें करने लगते हैं, लेकिन जैसे ही सख्ती होती है, पीड़ित वाला कार्ड खेलने लगते हैं.