Mumbai Corona Vaccination Model: लोगों को ढूंढ-ढूंढकर टीका लगवा रही हैं टीमें, SC भी कर चुका है तारीफ

कोरोना महामारी के इस दौर में मुंबई का वैक्सीनेशन मॉडल चर्चा में है. सुप्रीम कोर्ट भी इस मॉडल की सराहना करते हुए बाकी हिस्सों में इसे लागू करने की सलाह दे चुका है. 

Mumbai Corona Vaccination Model: लोगों को ढूंढ-ढूंढकर टीका लगवा रही हैं टीमें, SC भी कर चुका है तारीफ
फाइल फोटो

मुंबई: सुप्रीम कोर्ट ने देश में कोरोना (Coronavirus) के हालात को देखते हुए मुंबई मॉडल को अपनाने के लिए कहा था. लेकिन आखिर ये मुंबई मॉडल ( Mumbai Vaccination Model) है क्या? ये जानने के लिए जी न्यूज की टीम मुंबई (Mumbai) की सड़कों से लेकर वैक्सीनशन सेंटर तक, कम्युनिटी वॉर रूम से लेकर झुग्गी बस्तियों तक ग्राउंड रिपोर्ट करने पहुंची. 

सबसे पहले हम बांद्रा ईस्ट के एक झुग्गी झोपडी इलाके में पहुंचे. यहां हमारी मुलाकात मेहराज से हुई, जो भामला फाउंडेशन नाम के NGO से जुड़े हुए है. वे हर रोज़ सुबह सुबह अपनी टीम के साथ ऐसी झुग्गी बस्तियों में जाते है. इसके बाद वहां रहने वाले 45 साल से ज़्यादा उम्र के वे लोग जो अभी तक वैक्सीन नहीं लगवा पाए हैं, उनकी लिस्ट तैयार करते हैं. 

लोगों को ढूंढकर करवा रहे हैं वैक्सीनेशन 

इसके बाद उनके आधार कार्ड के आधार पर पास के वैक्सीनशन (Corona Vaccination) सेंटर पर उनका रजिस्ट्रेशन करवाते हैं और फिर अगली सुबह उन्हें अपनी गाड़ियों में ले जाकर वैक्सीन लगवा रहे हैं. इसमे उनकी मदद स्थानीय वार्ड के BMC अधिकारी और कर्मचारी भी कर रहे हैं, जो इन इलाकों तक पहुंच नहीं पाते हैं. 

मेहराज और उनकी टीम के साथ हमने भी मुंबई (Mumbai) की इन झुग्गी झोपड़ियों में रहने वालों के साथ वैक्सीनशन सेंटर तक का सफर तय किया. पहले से रजिस्टर्ड होने के चलते एंट्री मे कोई परेशानी नहीं हुई.

मुंबई में भारत का पहला जंबो वैक्सीनेशन सेंटर

जिस वैक्सीनेशन सेंटर पर हम पहुंचे, वह भारत का पहला जंबो वैक्सीनेशन सेंटर था जहां Walk in और Drive in की सुविधा दी गई है. Walk in का मतलब अगर आपकी दूसरी डोज़ बाकी है तो आपको ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत नही है. आप सीधे आइए और यहां आकर अपनी वैक्सीन डोज़ ले लीजिए. 

वहीं Drive in का मतलब है कि आप अपनी कार इस वैक्सीनेशन (Corona Vaccination) सेंटर की ग्राउंड पार्किंग में ले जाइये. उसके बाद कार में ही बैठकर अपनी बारी का इंतज़ार कीजिए. बीएमसी की टीम कार में बैठे-बैठे ही आपको वैक्सीन लगा देगी. इस जंबो वैक्सीनेशन सेंटर की जिम्मेदारी BMC अधिकारी किरण दिघावकर ने ले रखी है. 

ये वही अधिकारी हैं, जिन्होंने पिछले साल पहली बार धारावी मॉडल ईज़ाद किया था, जिसे बाद में पूरे मुंबई शहर में अपनाया गया था. किरण दिघावकर बताते हैं कि BMC ने ट्रेसिंग, वैक्सीनेशन, सैनेटाइज़िंग पर ख़ास ध्यान दिया है. इसके अलावा BMC के अधिकारियों ने ऑक्सीजन की किल्लत को दूर करने के लिए पहले ही योजना बना ली थी. इसी वजह से ऑक्सीजन की जो किल्लत पूरे देश ने झेली, मुंबई शहर उससे बचा रह गया.

BMC ने वार्ड वार बनाए कम्युनिटी वॉर रूम

इसके बाद हमने जायज़ा लिया कम्युनिटी वॉर रूम का. BMC ने पिछले साल ही कोरोना से निपटने के लिए हर वार्ड में वॉर रूम बनाए थे. इसके बावजूद भी छोटी छोटी तंग गलियों में, झुग्गी झोपड़ियों में हर शख़्स तक पहुंच पाना मुश्किल था. इसे देखते हुए कुछ युवा लड़के लड़कियों ने एक कम्युनिटी वॉर रूम टीम बनाई, जिसके 3 हिस्से है. पहला वॉर रूम कम्युनिकेशन टीम, दूसरी ग्राउंड टीम और तीसरी मेडिकल टीम. 

वॉर रूम कम्युनिकेशन टीम में अधिकतर वो युवा लड़के लड़कियां है, जो टेक्नोलॉजी जानते हैं. इन्होंने अपना एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया हुआ है. इन लोगों के पास अपने लोकल इलाके का पूरा डेटा हर दिन के हिसाब से मौजूद रहता है. जैसे कि कौन से अस्पताल में ICU के कितने बेड खाली हैं, ऑक्सीजन गैस कहां मिल सकती है, कौन से ब्लड ग्रुप का प्लाज़्मा कहां मिल सकता है.

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जैसे ही कोई इन्क्वायरी आती है वॉर रूम कम्युनिकेशन टीम ग्राउंड टीम से संपर्क करती है. इसके बाद ग्राउंड टीम फिर जमीन पर जाकर ज़रूरतमंद लोगो से संपर्क करती है और उनका संपर्क मेडिकल टीम से करवाती है. हर दिन के हिसाब से इनके पास 50 से 60 इन्क्वायरी आ रही हैं.

घर-घर जाकर ट्रेसिंग कर रही हैं टीमें

वैक्सीनेशन (Corona Vaccination) के अलावा जो सबसे ज़्यादा ज़रूरी चीज़ है, वो है हर घर जाकर ट्रेसिंग करना. इसके लिए भी अलग अलग NGO की टीम हर दिन जाकर हर शख्स का टेंपरेचर चेक करती हैं. अगर किसी शख्स को लगातार 3 दिन तक बुखार आता है तो उसकी सूचना BMC के लोकल कर्मचारियों को दी जाती है. यही नहीं, इलाके में घूम घूम कर NGO की ये टीमें लोगों को आयुर्वेदिक काढा भी बांटती हैं ताकि घर पर रहकर इन लोगों की इम्युनिटी बढ़ाई जा सके.

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