आखिर क्यों बेटे ने अपनी ही मां से मांगा डेढ़ करोड़ का मुआवजा, चौंका देगी ये उलझे रिश्तों की कहानी

शख्स ने आरोप लगाया है कि उसकी मां ने 38 साल पहले में उसे महज 2 साल की उम्र में अकेला लावारिस छोड़ दिया था. 

आखिर क्यों बेटे ने अपनी ही मां से मांगा डेढ़ करोड़ का मुआवजा, चौंका देगी ये उलझे रिश्तों की कहानी

मुंबई: मायानगरी मुंबई (Mumbai) में एक अजीबो गरीब मामला सामने आया है. ये कहानी किसी फिल्म की नहीं बल्कि रियल जिंदगी की है. बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) में दाखिल एक याचिका में एक शख्स ने आरोप लगाया है कि उसकी मां ने 38 साल पहले में उसे महज 2 साल की उम्र में अकेला लावारिस छोड़ दिया था और ये मां उसे अब भी अपने बेटे के रूप में स्वीकार नहीं कर रही है.

पेशे से मेकअप आर्टिस्ट श्रीकांत सबनीस ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए अपनी मां आरती महस्कर से डेढ़ करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा है. अदालत में दाखिल याचिका में 40 वर्षीय श्रीकांत ने कहा है कि आरती महस्कर की ये दूसरी शादी है इससे पहले उनका नाम उषा था जिनकी शादी (लव मैरेज) दीपक सबनीस नाम के शख्स से पुणे में हुई थी. 1979 में श्रीकांत का जन्म हुआ. 

श्रीकांत के मुताबिक उनकी मां महत्वाकांक्षी थी और फिल्मों में अभिनेत्री बनने के लिए वे 1981 में मुंबई आईं. पिता को पागल घोषित करने के बाद मां ऊषा ने महज 2 साल की उम्र में बेटे श्रीकांत को ट्रेन में लावारिस छोड़ दिया. लावारिस बच्चे की तस्वीर अखबारों में छापी गई जिसके बाद राजस्थान के एक दंपति ने श्रीकांत को गोद लिया लेकिन ये जानकरी श्रीकांत की नानी को मिलते ही उन्होंने 4 साल तक कानूनी लड़ाई लड़कर राजस्थानी दंपति से अपने नाती की कस्टडी हासिल की. इसके बाद श्रीकांत अपनी नानी के पास ही पले बढ़े लेकिन 1991 में नानी के देहांत के बाद वे अपनी मौसी आशा के साथ रहने लगे. साल 2006 में श्रीकांत की शादी हो गई और साल 2017 तक वह बतौर एक मेकअप आर्टिस्ट अपने पैरों पर मजबूत खड़े हो चुके थे. 

याचिकाकर्ता श्रीकांत सबनीस ने बताया कि मैं अपने अतीत से बेखबर था. मेरी मौसी ने मुझे अतीत की पूरी हकीकत बयान की. इसके बाद सोशल मीडिया की मदद से किसी तरह श्रीकांत अपनी मां उषा तक पहुंचा. लेकिन अब उसकी मां उषा सबनीस से आरती महस्कर बन चुकी थी और अपने दूसरे पति उदय महस्कर के साथ संसार बसा चुकी थी. श्रीकांत का आरोप है कि अपनी पहचान बताने के बावजूद आरती महस्कर ने उसे सबके सामने बेटा स्वीकारने से इंकार कर दिया. इसी के बाद श्रीकांत ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और पिछले 38 साल तक झेले मानसिक यातना के लिए डेढ़ करोड़ रुपए के मुआवजे की भी मांग की.

श्रीकांत ने बताया कि 80 के दशक में उनकी मां अपने स्क्रीन नेम उषा पंडित के तौर पर सफल कलाकार थीं, उनका आरोप है कि अपनी महत्वकांक्षाओं के लिए मां ने बेटे को लावारिस छोड़ दिया. इस चौंका देनेवाले मामले में आरती महस्कर ने कैमरे के सामने आकर कोई भी बयान देने से इंकार कर दिया लेकिन उनकी तरफ से उनके पति उदय महस्कर ने अपना पक्ष रखा. 

उन्होंने कहा कि मेरी पत्नी आरती ने इस बात से कभी इंकार नहीं किया कि श्रीकांत उनका जैविक बेटा है. अदालत जाने से पहले श्रीकांत और उनकी मां की चंद मुलाकातें भी हुईं जो कि सुखद थीं. श्रीकांत द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद निराधार हैं. उसकी नजर मेरी संपत्ति पर है. मेरी संपत्ति में हिस्से की लालच के चलते श्रीकांत सबनीस से श्रीकांत महस्कर बनना चाहता है. तमाम सहानुभूतियों के बाद भी मैं श्रीकांत का जैविक पिता न होने के चलते अपना नाम उसे कभी नहीं दे सकता. 

उन्होंने कहा कि इस मामले में श्रीकांत ने अब तक सिर्फ अधूरा सच सबके सामने रखा है. हमें हाई कोर्ट से अब तक कोई नोटिस नहीं मिली है, नोटिस मिलने पर हम अपना पक्ष विस्तृत रूप से अदालत के सामने रखेंगे. 

उलझते रिश्तों की ये गुत्थी कब सुलझेगी ये कह पाना मुश्किल है, बहरहाल इस इस मामले की हाई कोर्ट में अगली सुनवाई 6 हफ्तों के बाद के लिए तय है.