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मुंबई में जानलेवा गढ्ढों से परेशान लोगों ने बीएमसी के खिलाफ छेड़ा एक अनोखा अभियान

इलाके में फैले गढ्ढों की जांच अब लोग खुद ही कर रहे है. इलाके में कितने गढ्ढे है. उनकी लंबाई, गहराई कितनी है, इसका पुरा डेटा तैयार किया जा रहा है.

मुंबई में जानलेवा गढ्ढों से परेशान लोगों ने बीएमसी के खिलाफ छेड़ा एक अनोखा अभियान
महाराष्‍ट्र में 2018 में सड़क हादसों में कुल 3600 लोगों की मौत हुई थी.

अमोल पेडणेकर, मुंबई: मुंबई के भांडुप में रहने वाले लोग रास्ते पर हुए गढ्ढों से परेशान है. भांडुंप के टेंभीपाडा रोज, सन्मान सिंग मार्ग और शिवाजी तालाब इलाके में मानो गढ्ढों का साम्राज्य है. यहां से गुजरते वक्त लोगो को काफी परेशानी होती है. इस बारे में बीएमसी को बार बार शिकायत करने पर भी कोई कार्रवाई नही हुई है. ना रास्ते की मरम्मत हुई ना ही गढ्ढे बुझाए गए. अब यहाँ रहने वाले लोगे ने अनोखा आंदोलन छेड़ा है. इलाके में फैले गढ्ढों की जांच अब लोग खुद ही कर रहे है. इलाके में कितने गढ्ढे है. उनकी लंबाई, गहराई कितनी है, इसका पूरा डेटा तैयार किया जा रहा है. 

रविवार को यहां रहने वाले लोगों ने दिन भर हाथ में मीटर पट्टी लिए गढ्ढों को नापा है. यह डेटा अब स्थानीय बीएमसी वार्ड अधिकारी को दिया जाएगा. अधिकारी से गुजारिश की जाएगी की यह गढ्ढे तुरंत भरे जाए. लेकिन यह आंदोलन बस यहीं नहीं रुकेगा. सिर्फ निवेदन और ज्ञापन देने से कुछ भी नहीं होता है, तो लोगो ने कहा कि वह रोजाना वार्ड ऑफिस जाएगे. यहां के बीएमसी अफसरो के पीछे लगेंगे. कार्रवाई करने के लिए मजबूर करेंगे. 

किरण गायचोर ने बताया कि हम बीएमसी को रोज जाकर रास्ते की स्थिति के बारे मे अवगत कराएंगे. यहां पर  रोजाना हादसे हो रहें हैं. क्या बीएमसी बड़ा हादसा होने का इंतजार कर रही है. इसलिए अब बीएमसी अफसरों को हम डेटा देंगे. उसका फॉलोअप भी हम लेंगे. हम चाहते हैं कि हमारे इलाके के रास्ते जल्द से जल्द गढ्ढों से मुक्त हो जाएं. 

उल्‍लेखनीय है कि मुंबई में रास्ते पर गढ्ढों के कारण मौत की संख्या हर साल बढ़ रही है. पिछले साल अकेले जुलाई के महीने में 10 लोगो की मौत गढ्ढों में गिरने से हुई थी. रास्ते पर गढ्ढों का मामला हमेशा बीएमसी और एमएमआरडीए की लढ़ाई में फंस जाती है. रास्‍तों के गढ्ढों की जिम्मेदारी किसकी इस पर लंबी बहस चलती है. दोनो एजेंसियां अपने-अपने हाथ खड़े कर देती हैं. और आम आदमी को इसका नुकसान पहुंचता है. 

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आकड़ों पर नजर डाले तो महाराष्ट्र सड़क हादसों में उत्‍तर प्रदेश के बाद दूसरे नंबर पर है. 2016 में सडक हादसे में महाराष्ट्र में 329 लोगों की जान चली गयी थी. वहीं 2017 में यह संख्‍या लगभग दोगुना हो गयी थी. इस दौरान, 726 लोग सड़क हादसे में मारे गए. 2018 में लगभग 3600 मौतें सड़क हादसों में हुई है. जिसका संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को कड़े कदम उठाने को कहा था. 

वहीं, मुंबई के कल्याण इलाके में पिछले साल 3 लोगो की गढ्ढों में गिरने से हुए हादसों में दर्दनाक मौत की तस्वीरे सामने आई थी.‍ जिसके बाद, मुंबई और आसपास के इलाकों में रास्‍तों की स्थिति को ठीक करने की मांग बढ़ी है. इस बारिश में अब तक कोई बड़ा हादसा तो नहीं हुआ है, लेकिन पिछले हफ्ते हुई बरसात ने रास्ते खराब हो गए है. जिनकी मरम्मत के लिए अब बीएमसी पर दबाव बनाया जा रहा है.