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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने योग को लेकर सरकार पर साधा निशाना

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने राजग सरकार पर धर्मनिरपेक्ष भारत के संविधान का उल्लंघन करने और योग तथा सूर्य नमस्कार जैसी चीजें शुरू करके आरएसएस के एजेंडा को लागू करने का आरोप लगाते हुए करारा हमला किया और मुस्लिम समुदाय के सदस्यों से ‘चौकन्ना’ रहने को कहा।

नई दिल्ली : ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने राजग सरकार पर धर्मनिरपेक्ष भारत के संविधान का उल्लंघन करने और योग तथा सूर्य नमस्कार जैसी चीजें शुरू करके आरएसएस के एजेंडा को लागू करने का आरोप लगाते हुए करारा हमला किया और मुस्लिम समुदाय के सदस्यों से ‘चौकन्ना’ रहने को कहा।

देश में मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व करने वाली इस शीर्ष संस्था ने मुस्लिम संगठनों और इमामों से सीधे संपर्क साधते हुए कहा कि समुदाय को ‘चौकन्ना’ रहना चाहिए क्योंकि ऐसे संगठन हैं जो इस्लामी मान्यताओं पर हमले कर रहे हैं। बोर्ड ने सरकार की योग को बढ़ावा देने की योजना को खरी खरी सुनाते हुए कहा कि यह धर्मनिरपेक्ष संविधान का उल्लंघन है, जो सरकार द्वारा धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की इजाजत नहीं देता।

बोर्ड ने एक पत्र में कहा कि मौजूदा हालात में सरकार और उसके मातहत काम करने वाले कई इदारे और लोग आज संविधान का उल्लंघन कर रहे हैं। यह पत्र बोर्ड के कार्यकारी महासचिव मौलाना वली रहमानी ने लिखा है। विभिन्न मुस्लिम संगठनों और व्यक्तियों को भेजे गए इस पत्र में रहमानी ने आरोप लगाया है कि योग दिवस समारोह और स्कूलों में सूर्य नमस्कार तथा बंदे मातरम की शुरुआत  आरएसएस के एजेंडा को लागू करने के इरादे से की गई है।

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ इत्तफाक नहीं है कि अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस और संघ के विचारक के बी हेडगेवार की पुण्यतिथि एक ही दिन 21 जून को थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन गतिविधियों के जरिए मूल्य वृद्धि जैसे मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाना चाहती है। उन्होंने लोगों, संस्थानों और मस्जिदों के इमामों से इसके बारे में जागरूकता बढ़ाने की अपील की। गीता के छठे अध्याय का संदर्भ देते हुए रहमानी ने कहा कि योग और सूर्य नमस्कार हिंदू धर्म की धार्मिक गतिविधियां हैं और यह ‘‘मुसलमानों की विचारधारा के खिलाफ हैं। वयोवृद्ध मौलाना ने अपने दो पन्ने के पत्र में कहा कि मुसलमानों को चौकन्ना रहना चाहिए क्योंकि ऐसे संगठन हैं जो इस्लामी मान्यताओं पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने मौलवियों से कहा कि वह शुक्रवार की नमाज के वक्त इन मुद्दों पर बात करें और मुस्लिम समुदाय को आंदोलन के लिए तैयार करें।

पत्र में कहा गया है कि लखनउ में सात जून को हुई आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारी समिति की बैठक में योग के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित कर इसे इस्लाम विरोधी बताया गया। रहमानी ने सरकार के नियंत्रण वाली पुरानी मस्जिदों को भी इबादत के लिए खोलने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर इबादत की इजाजत नहीं दी गई तो बोर्ड इस संबंध में दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा। रहमानी ने कहा कि किसी धर्म और संस्कृति को मजबूत करने के लिए सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल करना भी संविधान के खिलाफ है इसलिए सूर्य नमस्कार और योग को सरकारी स्कूलों पर थोपा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बोर्ड यह रेखांकित करना चाहता है कि देश के नागरिकों को अपनी पसंद के धर्म का पालन करने का अधिकार है और संविधान के अनुसार सरकार धर्मनिरपेक्ष रहेगी। एक धर्म की आस्थाओं को अन्य धर्मों को मानने वाले लोगों पर थोपने की कोशिश का दावा करते हुए रहमानी ने कहा कि इसके खिलाफ आंदोलन चलाने की जरूरत है और इस मसले पर तमाम मस्जिदों में जुमे की नमाज से पहले चर्चा होनी चाहिए।

पत्र में कहा गया है, मुसलमानों को यह याद रखना चाहिए कि देश में ऐसे लोग हैं जो उनके हुकूक छीन लेना चाहते हैं। पत्र के अनुसार, बोर्ड संविधान के अनुरूप काम करना चाहता है और संविधान के खिलाफ होने वाली किसी भी गतिविधि पर अंकुश लगाना चाहता है।

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