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NRC- जो लोग बाल ठाकरे का मताधिकार छिनने पर जश्‍न मनाते हैं, वे इस मुद्दे पर मातम मना रहे हैं: PM मोदी

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि 1985 में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने असम समझौते पर हस्‍ताक्षर किए थे.

NRC- जो लोग बाल ठाकरे का मताधिकार छिनने पर जश्‍न मनाते हैं, वे इस मुद्दे पर मातम मना रहे हैं: PM मोदी
फाइल फोटो

नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में असम नागरिक रजिस्‍टर (एनआरसी) का मसौदा जारी होने के बाद उसमें 40 लाख लोगों के नाम छूटने के मुद्दे पर सियासत में उबाल आ गया है. पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने यहां तक कह दिया कि इससे गृहयुद्ध छिड़ सकता है. दैनिक जागरण को दिए एक इंटरव्‍यू में इस मुद्दे पर बोलते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि 1985 में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने असम समझौते पर हस्‍ताक्षर किए थे. उसके बाद जनता की आंखों में धूल झोंककर ठंडे बस्‍ते में डाल दिया गया. उसे अब धरातल पर उतारने का साहस हमने किया है.

इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि ममता बनर्जी ने 2005 में पश्चिम बंगाल में अवैध वोटरों के मुद्दे पर तो आक्रामक रुख अपनाया था लेकिन अब उसके उलट बात कह रही हैं. उन्‍हें स्‍पष्‍ट करना चाहिए कि वह तब सही थीं या आज सही हैं? दरअसल जिनका जनाधार खत्‍म हो चुका है, जिनको देश के संविधान पर भरोसा नहीं है, वहीं कहते हैं कि इस मुद्दे पर सिविल वॉर हो जाएगा.

इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा, ''वोट बैंक की राजनीति करने वाले लोग ही एनआरसी के मुद्दे पर अलग-अलग भाषा में बोल रहे हैं. ये वही लोग हैं जो वोटरलिस्‍ट से लोगों का नाम निकालने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा देते हैं. ये लोग बालासाहेब ठाकरे के मताधिकार छिनने पर जश्‍न मनाते हैं और आज एनआरसी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मातम मना रहे हैं.''

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'राजीव गांधी भरी संसद में मंडल कमीशन के खिलाफ बोले थे'
गोरखपुर, कैराना, फूलपुर लोकसभा उपचुनावों में हार और एससी-एसटी एक्‍ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उपजी राजनीति के बीच कहा जा रहा है कि 2019 का लोकसभा चुनाव दलितों और पिछड़ों के मुद्दे पर लड़ा जाएगा. कांग्रेस समेत विपक्ष बीजेपी को दलित और पिछड़ा विरोधी कह रहे हैं. इस संदर्भ में दैनिक जागरण को दिए इंटरव्‍यू में पीएम नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा, 'राजीव गांधी भरी संसद में मंडल कमीशन के खिलाफ बोले थे और वह सब रिकॉर्ड में है. पिछड़े समाज को न्‍याय न मिले, उसके लिए उन्‍होंने बड़ी-बड़ी दलीलें पेश की थीं. 1997 में कांग्रेस और तीसरे मोर्चे की सरकार ने प्रमोशन में आरक्षण बंद कर दिया था. वह तो अटल जी की सरकार थी, जिसने फिर से एससी-एसटी समाज को न्‍याय दिलाया.'

तेल और पानी की तरह है विपक्षी महागठबंधन
बीजेपी को घेरने के लिए विपक्षी महागठबंधन की बढ़ती कवायद पर टिप्‍पणी करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ''महागठबंधन तेल और पानी के मेल जैसा है, इसके बाद न तो पानी काम का रहता है, न तेल काम का होता है और न ही ये मेल. यानी ये मेल पूरी तरह फेल है.'' इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि जनता ने इन पार्टियों को खुद को साबित करने के लिए पर्याप्‍त मौका दिया लेकिन ये भ्रष्‍टाचार, भाई-भतीजावाद और कुशासन से बाहर नहीं निकल सकीं. अब ये जान गई हैं कि जाति, धर्म के आधार पर बनाए गए इनका चुनावी समीकरण हमारे विकास के एजेंडे को चुनौती नहीं दे सकता. इसलिए डर कर महागठबंधन बना रहे हैं. ऐसे में यह सवाल उठता है कि जो खुद डरा हुआ है, वह दूसरे को संबल कैसे दे सकता है?

इस बीच दलित और पिछड़ों के मुद्दों पर विपक्ष के हमलावर रुख के बीच लोकसभा ने पिछले दिनों अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां अत्याचार निवारण संशोधन विधेयक 2018 को मंजूरी दे दी. सरकार ने जोर दिया था कि बीजेपी नीत सरकार हमेशा आरक्षण की पक्षधर रही है और कार्य योजना बनाकर दलितों के सशक्तिकरण के लिये काम कर रही है. लोकसभा में लगभग छह घंटे तक हुई चर्चा के बाद सदन ने कुछ सदस्यों के संशोधनों को नकारते हुए ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी दे दी.

इसके साथ ही राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को भी मानसून सत्र में संसद की मंजूरी मिल गयी. राज्यसभा ने इससे संबंधित ‘संविधान (123वां संशोधन) विधेयक को 156 के मुकाबले शून्य मतों से पारित कर दिया. लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है.