राज्‍यसभा का 250वां सत्र: PM मोदी ने NCP की तारीफ की, महाराष्‍ट्र की राजनीति से जोड़े जा रहे प्रशंसा के तार

पीएम मोदी ने कहा कि राज्‍यसभा में NCP और BJD ने वेल में जाकर विरोध नहीं करने का फैसला किया और उस पर अमल भी किया. इससे इन दलों की राजनीति विकास यात्रा पर कोई फ़र्क नहीं पड़ा.

राज्‍यसभा का 250वां सत्र: PM मोदी ने NCP की तारीफ की, महाराष्‍ट्र की राजनीति से जोड़े जा रहे प्रशंसा के तार

नई दिल्‍ली: महाराष्‍ट्र की सियासत के चाणक्‍य माने जाने वाले शरद पवार जहां शिवसेना और कांग्रेस के साथ राज्‍य में वैकल्पिक गठबंधन बनाने के सूत्रधार कहे जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पीएम मोदी ने उनकी राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की राज्‍यसभा में तारीफ की. इस शीतकालीन सत्र में राज्‍यसभा के 250वें सत्र के मौके पर बोलते हुए पीएम मोदी ने दो बार एनसीपी की तारीफ की. उन्‍होंने कहा कि NCP और BJD ने सदन में अनुशासन को बनाए रखा. दोनों ही पार्टियों ने वेल में जाकर विरोध नहीं करने का फैसला किया और उस पर अमल भी किया. इससे इन दलों की राजनीति विकास यात्रा पर कोई फ़र्क नहीं पड़ा. NCP की तारीफ़ को महाराष्ट्र की ताजा राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है.

पीएम मोदी ने कहा कि उच्‍च सदन की दो खास बाते हैं: 1) स्थायित्व 2) विविधता. स्थायित्व - लोकसभा तो भंग होती है लेकिन ये कभी भंग नहीं होती. विविधता - राज्यों का प्रतिनिधित्व प्राथमिकता है. भारत की विविधता-अनेकता में एकता का सूत्र सबसे बड़ी ताकत है. वह इस सदन में दिखता है. हर किसी के लिए चुनावी अखाड़ा पारकर पाना आसान नहीं होता लेकिन इससे उनकी उपयोगिता कम नहीं होती और देश के नीति निर्धारण में लाभ मिलता है.

राज्यसभा के 250वें सत्र तक वक्त ही नहीं गुजरा, विचार यात्रा भी चलीः पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, 'यह मेरे लिए सौभाग्य का विषय है कि मुझे इस अवसर में शामिल होने का अवसर मिला. अनुभव कहता है कि संविधान निर्माताओं ने जो व्यवस्था दी वह कितनी अद्भूत है. इस सदन ने देश में इतिहास बनते देखा है. अनेक महानुभावों का लाभ हमें राज्यसभा के माध्यम से मिला है. यही राज्यसभा थी जहां से बाबा साहब अंबेडकर को आने का मौका मिला, क्योंकि लोकसभा से तो उन्हें आने नहीं दिया गया. सदन ने बदले हालात में खुद को ढालने की कोशिश की. इस सदन में ऐसे विद्वान लोग बैठे थे जिन्होंने शासन व्यवस्था को कभी निरंकुश नहीं होने दिया.'

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प्रधानमंत्री ने आगे कहा,  'हमारे प्रथम उपराष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी ने कहा था, हमारे विचार, हमारा व्यवहार और हमारी सोच ही दो सदनों वाली हमारी संसदीय प्रणाली के औचित्य को साबित करेगी. संविधान का हिस्सा बनी इस द्विसदनीय व्यवस्था हमारी परीक्षा होगी. 250 सत्र की यात्रा के बाद वर्तमान की पीढ़ियों का दायित्व और बढ़ जाता है कि डॉ राधाकृष्णन ने जो अपेक्षाएं की थी उसे पूरा किया जाए.'

पीएम मोदी ने कहा, 'राज्यसभा में दूर दृष्टि का अनुभव है. इसी सदन की परिपक्वता है कि इसने तीन तलाक का कानून पास किया. इसी सदन ने जनरल कैटगरी को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का काम किया. इसी तरह जीएसटी को लेकर वन नेशन वन टैक्स को लेकर सर्वसहमति बनाने का काम किया. इसी सदन में 1964 में जो वादे किए गए थे. वो धारा 370 और 35ए इसी सदन में हटाया गया. यह सदन देश की एकता और अखंडता को लेकर की गई कार्यवाही के लिए याद किया जाएगा.' 

पीएम मोदी ने कहा, 'राज्यसभा इस बात को सुनिश्चित करती है कि देश में केंद्र और राज्य सरकार के प्रतिद्वंदी नहीं है. हम मिलकर देश को आगे ले जाकर काम करते हैं. देश का विकास और राज्य का विकास दो अलग चीजे नहीं है. बहुत सी नीतियां केंद्र सरकार बनाती हैं. उन नीतियों में राज्य की बातों को इस सदन के जरिए सरकार के समक्ष लाया जाता रहा है.'

राज्यसभा के 200वें सत्र में भी एनडीए की सरकार थी
पीएम ने आगे कहा, '2003 में जब इस सत्र के 200 साल हुए थे तब भी एनडीए की सरकार थी. उस वक्त अटल जी ने कहा था कि हमारे संसदीय लोकतंत्र की शक्ति बढ़ाने लिए यह सेकेंड हाउस मौजूद है. अटल जी ने कहा था कि इस सेकेंड हाउस को कई भी सेकंड्री हाउस बनाने की कोशिश ना करें. मैं कहूंगा कि राज्यसभा सेकेंड हाउस है यह सेंकड्री हाउस कभी भी नहीं है. भारत के विकास के लिए इसे सपोर्टिव हाउस बने रहना चाहिए.'