पीएम मोदी बोले, 'संकीर्ण मानसिकता के लोग नहीं देते बच्चियों को जीने का अधिकार'

पीएम मोदी ने आवास योजना का जिक्र करते हुए कहा कि अब तक सवा करोड़ से अधिक भाई-बहनों को घर का अधिकार मिल चुका है.

पीएम मोदी बोले, 'संकीर्ण मानसिकता के लोग नहीं देते बच्चियों को जीने का अधिकार'
फोटो सौजन्य: ANI

नई दिल्ली: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की रजत जयंती के दिल्ली में हुए आयोजन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डाक टिकट और स्पेशल कवर जारी किया. इस दौरान पीएम मोदी ने महिला सुरक्षा और अधिकारों की बात करते हुए कहा, 'हमारी सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और समस्याओं को दूर करने की दिशा में काम किया है. हमारी सरकार ने रात की शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए व्यवस्थाएं की हैं.'   

संकीर्ण मानसिकता के लोग बेटियों को नहीं देते जीने का अधिकार- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा, 'देश में भ्रूण हत्या को लेकर आज भी सवाल उठते हैं. संकीर्ण मानसिकता के लोगों का समाज आज भी बेटियों को जीने का अधिकार नहीं देता है. बेटियों को कोख में ही मार दिया जाता है. आज मैं गर्व से कह सकता हूं कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान से कई राज्यों में बच्चियों की संख्या का अनुपात बढ़ रहा है.' उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में NHRC ने देश को आगे बढ़ने में मदद की है. उन्होंने आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस कालखंड में जीवन का अधिकार भी छीन लिया गया था, बाकी अधिकारों की तो बात ही क्या थी. लेकिन, भारतीयों ने मानवाधिकारों को अपने प्रयत्नों से फिर हासिल किया. 

बीजेपी सरकार का सेवा मंत्र है ‘सबका साथ, सबका विकास’
पीएम मोदी ने केंद्र में बीजेपी सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि पिछले 4 वर्षों की ये बहुत बड़ी उपलब्धि रही है कि इस दौरान गरीब, वंचित, शोषित, समाज के दबे-कुचले व्यक्ति की गरिमा को उसके जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए गंभीर प्रयास हुए हैं. बीते 4 वर्षों में जो भी कदम उठाए गए हैं, जो योजनाएं बनी हैं, उनका लक्ष्य यही है और हासिल भी यही है. हमारी सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को सेवा का माध्यम मानती है. 

मानवाधिकारों के लिए केंद्र सरकार ने किए कई काम- पीएम
पीएम मोदी ने आवास योजना का जिक्र करते हुए कहा कि अब तक सवा करोड़ से अधिक भाई-बहनों को घर का अधिकार मिल चुका है. दिव्यांगों के अधिकार को बढ़ाने वाला राइट्स ऑफ पर्सन विद डिसेबिलिटीस एक्ट हो, उनके लिए नौकरियों में आरक्षण बढ़ाना हो या फिर ट्रांसडेंडर पर्सन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) बिल, ये मानवाधिकारों के प्रति हमारी सरकार की प्रतिबद्धता का ही उदाहरण है. उन्होंने कहा कि केस से संबंधित जानकारियां, फैसलों से जुड़ी जानकारियां ऑनलाइन होने से न्याय प्रक्रिया में और तेजी आई है और लंबित मामलों की संख्या में कमी हुई है.