गुरु पूर्णिमा 2017ः भारत में आज मनेगा पर्व, नासा ने भी जारी की तस्वीर

गुरु पूर्णिमा 2017ः भारत में आज मनेगा पर्व, नासा ने भी जारी की तस्वीर
गुरु पूर्णिमा 2017ः नासा ने इस मौके पर चंद्रमा की तस्वीर जारी की है. (फोटो-डीएनए)

नई दिल्लीः रविवार 9 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर पूरे देश में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाएंगे. अपने गुरुओं के पूजन-वंदन का दिन साल में एक बार आता है. लेकिन इस बार यह पर्व अंतरराष्‍ट्रीय ख्‍याति पा चुका है. अमेरिका की स्‍पेस एजेंसी नासा ने गुरु पूर्णिमा का विशेष तौर पर जिक्र किया है. 

आषाढ़ मास की पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला पर्व गुरु पूर्णिमा सोशल मीडिया पर भी छाया हुआ है. नासा ने अपने आफिशियल ट्विटर हैंडल से एक पोस्‍ट डालते हुए इसका जिक्र किया है और कहा है कि यह दिन फूल मून के रूप में मनाया जाने वाला है. नासा ने इस दिन के अन्‍य नाम भी सुझाए हैं, जैसे- राइप कॉर्न मून, हे मून, थंडर मून आदि. कैप्‍शन देते हुए नासा ने चांद का एक शानदार फोटो भी लगाई है, जिसे भारतीय काफी पसंद कर रहे हैं.  नासा के इस ट्वीट को 16 सौ से ज्यादा बार रिट्वीट किया गया है.

गुरू पूर्णिमा को लेकर आस्था

आषाढ़ मास की पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला पर्व गुरु पूर्णिमा को लेकर मान्यता है कि इस दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्म हुआ था. उन्होंने चारों वेदों को लिपिबद्ध किया था. इस कारण उनका एक नाम वेद व्यास भी है. उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है. उन्हें आदिगुरु भी कहा जाता है गुरु पूर्णिमा के त्‍योहार के दिन लाखों श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान करते है. इस दिन मथुरा के स्थित गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा भी की जाती है. ऐसा कहा जाता है कि इस‍ दिन बंगाली साधु सिर मुंडाकर गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करते हैं, ब्रज में इसे मुड़िया पूनों नाम से जाना जाता है.

सनातनी परंपरा मेंगुरु पूर्णिमा का महत्व

गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरम्भ में आती है. इस दिन से चार महीने तक परिव्राजक साधु-सन्त एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं. ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं. न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी. इसलिए अध्ययन के लिए उपयुक्त माने गए हैं. जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है, वैसे ही गुरु-चरणों में उपस्थित साधकों को ज्ञान, शान्ति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है.

प्राचीन काल मेंगुरु पूर्णिमा 

प्राचीन काल में जब विद्यार्थी गुरु के आश्रम में निःशुल्क शिक्षा ग्रहण करता था तो इसी दिन श्रद्धा भाव से प्रेरित होकर अपने गुरु का पूजन करके उन्हें अपनी शक्ति सामर्थ्यानुसार दक्षिणा देकर कृतकृत्य होता था. आज भी इसका महत्व कम नहीं हुआ है.पारंपरिक रूप से शिक्षा देने वाले विद्यालयों में, संगीत और कला के विद्यार्थियों में आज भी यह दिनगुरु को सम्मानित करने का होता है. मन्दिरों में पूजा होती है, पवित्र नदियों में स्नान होते हैं, जगह जगह भंडारे होते हैं और मेले लगते हैं.