कोर्ट में पेशी के बाद क्या होगा- सोनिया और राहुल लेंगे बेल या जाएंगे जेल?

नेशनल हेराल्ड केस में आज दिल्ली की अदालत में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी की पेशी पर लोगों का उतना ध्यान नहीं जितना कि पेशी के बाद वो बेल लेते हैं या फिर जेल जाते हैं पर लगा हुआ है। सियासी गलियारे में इस बात को लेकर चर्चा जोरों पर है कि कांग्रेस बेल बॉन्ड नहीं भरने की बजाय जेल भेजे जाने का विकल्प चुनेगी।

कोर्ट में पेशी के बाद क्या होगा- सोनिया और राहुल लेंगे बेल या जाएंगे जेल?

नई दिल्ली : नेशनल हेराल्ड केस में आज दिल्ली की अदालत में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी की पेशी पर लोगों का उतना ध्यान नहीं जितना कि पेशी के बाद वो बेल लेते हैं या फिर जेल जाते हैं पर लगा हुआ है। सियासी गलियारे में इस बात को लेकर चर्चा जोरों पर है कि कांग्रेस बेल बॉन्ड नहीं भरने की बजाय जेल भेजे जाने का विकल्प चुनेगी। हालांकि कांग्रेस के अंदर इसको लेकर दो तरह के मत हैं जिसमें दूसरा धड़ा जमानत लेने की बात कर रहा है। लेकिन बेल बॉन्ड नहीं भरे जाने की सूरत में क्या सोनिया और राहुल को जेल जाना पड़ेगा? यह जानना जरूरी होगा।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अरविंद जैन का कहना है कि चूंकि यह मामला शिकायत का है इसलिए मजिस्ट्रेट उन्हें जमानत पर छोड़ सकते हैं और फिर मुकदमा आगे चलेगा जिसमें गवाहियां होंगी और बहस का दौर चलेगा। यह एक लंबी चौड़ी कानूनी प्रक्रिया है। जैन का कहना है कि सोनिया और राहुल गांधी की भले ही कोर्ट में पेशी हो रही है, लेकिन ऐसे मामलों में मजिस्ट्रेट आमतौर पर जमानत दे देते हैं।

अरविंद जैन का यह भी कहना है कि इस मामले में एक और सूरत है जिस पर कांग्रेस के अंदर चर्चा चल रही है कि बेल बॉन्ड न दिया जाए। अगर पार्टी के इस फैसले पर सोनिया और राहुल मुहर लगाते हैं तो फिर कोर्ट के पास इन्हें जेल भेजने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता है, जैसा कि अरविंद केजरीवाल के केस में हुआ था।

कोर्ट में पेशी के बाद दोनों नेताओं को कोर्ट जमानत के लिए कह सकता है। इसमें फॉर्म 45 भरना होता है, जिसमें पर्सनल बांड यानी निजी मुचलका और जमानती यानी श्योरटी होती है। पर्सनल बांड में आरोपी को लिखकर देना होता है कि वह कोर्ट की शर्तों का पालन करेगा, जबकि श्योरटी के लिए किसी जमानती की जरूरत होती है जो आरोपी के लिए बांड भरेगा और कोर्ट के आदेशानुसार तय राशि के लिए दस्तावेज देगा। वैसे कोर्ट के पास अधिकार होता है कि वह निजी मुचलके पर जमानत देकर आरोपी को रिहा कर सकता है।

कोर्ट की जमानत के लिए कुछ सामान्य शर्तें होती हैं, मसलन जब भी अदालत कहेगी आरोपी कोर्ट में हाजिर रहेगा। आरोपी बिना अनुमति के देश छोड़कर नहीं जा सकता। वह सबूतों से छेड़छाड़ नहीं कर सकता। गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं कर सकता और कोर्ट को अंदेशा हो तो वह पासपोर्ट भी जब्त कर सकता है।

पटियाला हाउस कोर्ट ने जो समन जारी किए हैं, उनमें भारतीय दंड विधान की कई धाराएं शामिल हैं। आईपीसी 420, धोखाधड़ी जिसमें अधिकतम सजा सात साल), आईपीसी 403, बेईमानी से संपत्ति हथियाना जिसमें अधिकतम सजा दो साल), आईपीसी 406, अमानत में खयानत जिसमें अधिकतम सजा तीन साल और आईपीसी 120, आपराधिक साजिश जिसमें अपराध के अनुसार सजा का प्रावधान है।

गौरतलब है कि 26 जून 2014 को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी के अलावा ऑस्कर फर्नांडिस, मोतीलाल वोरा, सुमन दुबे और सैम पित्रोदा को समन जारी कर पेश होने के आदेश दिए थे। बाद में अपील करने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने समन पर रोक लगा दी थी। 4 दिसंबर 2015 को दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर आदेश सुरक्षित रख लिया था। 7 दिसंबर को हाईकोर्ट ने समन रद्द करने की याचिका खारिज कर दी और 8 दिसंबर की पेशी से छूट देने से इनकार कर दिया। 8 दिसंबर को ही पटियाला हाउस कोर्ट ने 19 दिसंबर की तारीख दे दी।